अटल बिहारी वाजपेयी देश का वो सितारा है..जिसकी चमक ने देश को चमका दिया..विरोधियों को भी अपना मुरीद बना दिया..लेकिन आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देकर वो सम्मान दिया गया..जिसके वो असली हकदार है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वाजपेयी को भारत रत्न के लिए उनके घर गए। राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे।
90 साल के वाजपेयी काफी दिनों से अस्वस्थ है..और उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती है। पिछले साल दिसंबर में वाजपेयी और जाने माने स्वाधीनता सेनानी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। बीते कई वर्षो से विभिन्न पार्टियों के राजनेताओं सहित समाज के हर तबके ने वाजपेयी को भारत रत्न देने की मांग की..वे साल 1996 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने..इसके बाद साल 1998-2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वाजपेयी भारत रत्न ग्रहण करने वाले देश के सातवें प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मोरारजी देसाई, लाल बहादुर शास्त्री तथा गुलजारीलाल नंदा को ये सम्मान मिल चुका है...
वाजपेयी केवल भारतीय राजनेता ही नहीं हैं..बल्कि वे एक अंतरराष्ट्रीय शख्सियत हैं। जिन्हें हर कोई सम्मान और प्यार करता है। चाहे कोई अपनी पार्टी को हो या विरोध पार्टी का, हर कोई उनकी शख्सियत का आज भी कायल है। आज भी संसद में या अन्य सार्वजनिक मंचों पर विरोधी पार्टी के नेता वाजपेयी का गुणगान करने से नहीं चूकते। उनके शब्दों का भाव यदि गौर से देखें तो यह पता चलता है कि..उनके जैसा राजनेता कोई और नहीं। वाजपेयी को सम्मान मिलना कुछ ऐसा है कि 'भारत रत्न' हमेशा 'अटल' ही रहेगा।
यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है कि उन्हें भारत रत्न प्रदान किया गया। उनका व्यक्तित्व, उनकी भाषण देने की कला, उनकी ईमानदारी और विनम्रता उनकी महानता को दिखाता है। इस महान शख्सियत के राजनीतिक जीवन में कई उपलब्धियां जुड़ीं, जिसकी अहमियत कई मायनों में काफी बड़ी हैं। उन्होंने देश के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में एक अमिट छाप छोड़ी। संसद में दिए गए उनके भाषण समकालीन व नई पीढ़ी के सांसदों के लिए सदा प्रेरणा के स्त्रोत रहे।
वाजपेयी अपने नाम, व्यक्तित्व और करिश्मे के बूते भारतीय राजनीति के शिखर पर पहुंचे और अपनी वाकपटुता से विरोधियों को भी अपना मुरीद बनाया.. “भारत ज़मीन का टुकङा नही है, जीता-जागता राष्ट्र पुरुष है। हिमालय इसका मस्तक है, गौरी शंकर शिखा है। कश्मीर किरिट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं। विनध्याचल कटि है, नर्मदा करधनी है। पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जँघाए हैं। कन्याकुमारी उसके चरण हैं, सागर उसके चरण पखारता है। पावस के काले-काले मेघ इसके कुंतल केश हैं। चाँद और सूरज इसकी आरती उतारते हैं। यह वंदन की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है। यह तर्पण की भूमि है। इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है। हम जियेगें तो इसके लिये और मरेंगे तो इसके लिये।”
करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता और प्रखर कवि के रुप में प्रख्यात वाजपेयी को साहसिक पहल के लिए भी जाना जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री के रुप में उनकी 1999 की ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा शामिल है, जब पाकिस्तान जाकर उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए। अटली बिहारी वाजपेयी अपने भाषणों के सम्बंध में कहते हैं कि “मेरे भाषणों में मेरा लेखक मन बोलता है लेकिन राजनेता भी चुप नही रहता। राजनेता लेखक के समक्ष अपने विचार रखता है और लेखक पुनः उन विचारों को पैनी अभिव्यक्ति देने का प्रयास करता है। मै तो मानता हूँ कि मेरे राजनेता और मेरे लेखक का परस्पर सम्मनव्यय ही मेरे भाषण में दिखाई देता है। मेरा लेखक राजनेता को मर्यादा का उल्घंन नही करने देता”
अटल जी सदैव दल से ऊपर उठकर देशहित के बारे में सोचते, लिखते और बोलते हैं..अटल जी कुछ कविताएं ऐसी थी जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.. “छोटे मन से कोई, बड़ा नहीं होता..टूटे मन से कोई, खड़ा नहीं होता”। इसमें कोई दोराय नहीं हो सकती कि अटल जी के नेतृत्व में छह साल तक चली एनडीए की सरकार का कार्यकाल सुशासन का युग माना जाता है। विशेष तौर पर, विभिन्न विचारधाराओं वाले कई राजनीतिक दलों को लेकर जिस प्रकार अटल जी ने एक स्थिर और स्वच्छ सरकार चलाई, वह अपने आप में शासन करने का अनूठा उदाहरण है। पूरा देश आज इस सम्मान पर गौरवान्वित कर रहा है। वास्तव में भारत रत्न अटल तो 'अटल' ही रहेंगे।
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