भारत माता पर विवाद

कौन भारत माता की जय बोलेगा और कौन नहीं बोलेगा। अब समाज के यह ठेकेदार तय करेंगे। समाज के ये ठेकेदार भारत माता की जय पर बयानबाज़ी करने से पहले उन शहीदों की कुर्बानी को ज़रा याद कर ले। जिन्होने हंसते हंसते भारत माता को आज़ाद कराने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। वैसे तो देश में जो मुद्दा छिड़ गया हैं। वो इतनी जल्दी शांत नहीं होने वाला है..क्योंकि भारत माता की जय पर विवाद गरमाता जा रहा है।


अब इस विवाद में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस पर भी कूद पड़े हैं। देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि भारत माता की जय नहीं बोलने वालों को इस देश में रहने का अधिकार नहीं है। भारत माता की जयनहीं कहतेउन्हें देश में रहने का हक नहीं है। फडणवीस ने कहा, 'मैं मुंबई की एक मजार पर गयासैंकड़ो मुस्लिम मौलवियों ने 'भारत माता की जयकहाजो भारत के टुकड़े होने की बात करते हैंवो नाकाम होंगे। भारत माता की जय किसी धर्म का नारा नहीं है।


वहीं गोरखपुर से बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा धरती माता हमारी मां है। हम सब इसके पुत्र हैं। जो भारत माता की जय नहीं बोल सकता, वो देश का हिस्सा नहीं हो सकता है। भारत मां की जय बोलने पर हमें गर्व होना चाहिए। इसके बाद मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि भारत माता की जयका नारा भावनाओं से जुड़ा है और हर मनुष्य को अधिकार है कि वह मां और मातृभूमि के लिए नारा लगाए।


भारत माता की जयबोलने या ना बोलने को लेकर पिछले कुछ दिनों से जमकर बहस छिड़ी हुई है। दारुल उलूम ने भारत माता की जय बोलने के मसले पर गुरुवार को फतवा जारी किया। दारुल उलूम ने कहा कि जिस तरह वंदे मातरम नहीं बोल सकते इसी तरह भारत माता की जय भी नहीं बोल सकते। फतवा जारी होने के बाद से विवाद और तेज हो गया है। दारूल उलूम देवबंदके फतवे के बाद एक नए विवाद का रूप ले लिया है। अब यूपी के बागपत की पंचायत ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए फैसला किया है कि इस नारे को नहीं कहने वाले का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार किया जाएगा।



यह विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी के मातृ संगठन आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने इस बात की वकालत की थी कि युवाओं को 'भारत माता की जयबोलने की शिक्षा दी जानी चाहिए। वहीं भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि अगर उनकी गर्दन पर चाकू भी रख दिया जाए तो भी वह 'भारत माता की जयनहीं बोलेंगे। हालांकि इस मामले में मौलाना खालीद रशीद का बयान भी सामने आया। 'दारूल उलूम देवबंदके फतवे पर रशीद ने कहा है कि इस तरह के फतवों को जारी करने की कोई जरूरत नहीं है और हम इसकी निंदा करते हैं।


मर के कैसे जीते हैं,इस दुनिया को बतलाने। तेरे लाल चलें हैं मायेअब तेरी लाज बचाने। आज़ादी का शोला बन के खून रगों में डोला..जिस देश में वीर सपूतों का जन्म हुआ। आज उसी देश में भारत की जय कहने पर कुछ लोगों को शर्म आती है।






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