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Showing posts from January, 2012

Gumnaam.......

             क्या सोचा था ? और क्या हो गया ? बस ! एक पल में सब कुछ... वीरान हो गया। कुछ अनसुनी , अनकही और अनजानी-सी आवाज़े कानों में अक्सर गूंजती रही... न जाने क्या कहना चाहती है। न जाने क्या बात छुपी है। इस फिज़ा में... जो अक्सर मुझे बुलाती रही है।        मंज़िल की तलाश में... गुमनाम राह पर निकल पड़ी जिसकी दूर-दूर तक.... कोई आस नही थी लेकिन सुनसान राह पर खड़ी रही। जैसे वो राह... मेरा रास्ता तक रही हो। न जाने क्या बात छुपी है। इस फिज़ा में... जो अक्सर मुझे बुलाती रही है।          एक आस दिल में रही। होंठों पर सिर्फ फारियाद रही। अपना सबकुछ खो गया । उस राह में... आँखों से अश्क तो बहे... लेकिन वो भी बेवफ़ा हो चले। न जाने क्या बात छुपी है। इस फिज़ा में... जो अक्सर मुझे बुलाती रही है।       एक सवाल जो मुझे जाने किस में सोच में डूबो रहा है। जो चाहकर भी मुझसे … कुछ कह नही पा रहा है। मेर...

डायरी

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           कौन हूँ मैं ?      क्या है मेरी पहचान ?      मै खुद भी नहीं जानती हूँ।      लेकिन हरपल,      बदलती इस दुनिया के...      हर रंग में ढलना,      मेरी ज़िंदगानी है।      हर ज़िंदगी को पनाह देना,      मेरी कहानी है। कोई मेरा साथ दे या न दे। लेकिन अपनी मंज़िल को... पाना ही मेरी जवानी है। बस ! एक आस में … गुमनाम राह पर निकल पड़ती हूं।      अनजान चेहरों से...      मिलती हूं।      कोई अपना कहता है,      तो कोई पराया।        काली स्याही से लिखी... सफेद पन्नों पर।      मेरी आधी-अधूरी दास्तान है।      मेरे अंदर ना जाने...      कितनी खुशियाँ समायी हैं,    ...

चाहत

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1.      क्यों किसी की चाहत में..   ज़िंदगी को कुर्बान कर देते है।  क्यों अपनी जान से भी  ज्यादा... किसी को चाहने लगते है। किसी को पाने कि खातिर... अपना सब कुछ... निछावर कर देते है। हर पल एक धुन में... गुम रहते है। प्यारे-से एहसास में जिया करते है क्यों किसी की चाहत में.... हम अक्सर.... डूब जाते है। 2.    क्यों किसी कि खुशी...  खुद से ज्यादा  प्यारी लगने लगती है।  और एक चाहत में लाखों हसरते...  दिल में पल जाती है।  किसी को पाने की चाहत  तो किसी को अपना बनाने की...  चाहत ! इस चाहत में लाखों...  ज़िंदगी अर्पण हो  चुकी है।  एक चाहत को पूरा...  करने के लिए...  ज़िंदगी की परवाह किए बिना...  हँसती-खेलती ज़िंदगी को  दाव पर लगा देते है।  फिर भी वो चाहत...  पूर्ण नही हो पाती है। 3.       चाहत चाहत चाहत   क्या है चाहत ? इसमें ऐसा क्या है ? जो अपना-अपना नही पराया अपना लगने लगता है खुदा ने धरती पर... इस चाहत क्यों बनाया ? ये तो खुदा की...