चाहत
ज़िंदगी को कुर्बान कर देते है।
क्यों अपनी जान से भी
ज्यादा...
किसी को चाहने लगते है।
किसी को पाने कि
खातिर...
अपना सब कुछ...
निछावर कर देते है।
हर पल एक धुन में...
गुम रहते है।
प्यारे-से एहसास में
जिया करते है
क्यों किसी की चाहत में....
हम अक्सर....
डूब जाते है।
खुद से ज्यादा
प्यारी लगने लगती है।
और एक चाहत में लाखों हसरते...
दिल में पल जाती है।
किसी को पाने की चाहत
तो किसी को अपना बनाने की...
चाहत! इस चाहत में लाखों...
ज़िंदगी अर्पण हो
चुकी है।
एक चाहत को पूरा...
करने के लिए...
ज़िंदगी की परवाह किए बिना...
हँसती-खेलती ज़िंदगी को
दाव पर लगा देते है।
फिर भी वो चाहत...
पूर्ण नही हो पाती है।
क्या है चाहत?
इसमें ऐसा क्या है?
जो अपना-अपना नही
पराया अपना लगने लगता है
खुदा ने धरती पर...
इस चाहत क्यों बनाया?
ये तो खुदा की…
गई वो रचना है।
जिसे हर कोई
प्राप्त करना चाहता है
इसलिए तो चाहत को
खुदा का
दूजा नाम कहते है।
वो धारा है...
जिसके आवेग को कोई रोक
नही सकता...
जिसे पाने का अरमान
हर दिल में होता है।
अस्तिव के दोराहें पर खड़ा
हर व्यक्ति इसकी
तलाश करता है
या फिर राह में बैठकर
इसके आने का
इंतज़ार!
दुश्मन है हमारी
जो कभी चैन से
जीने नही देती।
हर दिन, हर लम्हा,
और हर पल दिल में...
आशा घर कर लेती है।
और हर दिन, हर लम्हा,
और हर पल हसरते
कांच की तरह
टूटती रहती है।
6. क्यों किसी की चाहत में....
अपना सब कुछ
गँवाने के लिए
एक एक पल लाखों
आशिक़ तत्पर रहते है।
लेकिन जिस राह पर
ना चलने की कसमें खाते है।
बन जाते है।
और इस अग्निपथ
पर चलते जाते है।
चाहें कितने ही?
गम क्यो ना मिले
लेकिन ये चाहते के मारे...
हार नही मानते।
7. ज़िंदगी के हर मोड़ पर
कुछ अनजाने चेहरे...
मिल जाते है।
तो कुछ अच्छे होते है।
तो कुछ की बुराई...
उन्हें बुरा बना देती है।
असल में...
वे बुरे नही होते है लेकिन क्या कहें?
और क्या ना कहें?
इसी कशमकस में...रात गुज़र जाती है।
8. फिर एक नयी सुबह...
ढ़ेरों उम्मीदें लाती है
इसकी विडंबना से अनजान चेहरे
इसकी मीठी-सी कसक में
कहीं गुम हो जाते है?
और क्यों ना हो?
इतना प्यारा है
और इसकी झलक पाने के लिए
दिल...
दिन-रात,
लम्हा-लम्हा तरसता है।
क्यों किसी को...
अपना कहने लगते है?
एक पल की खुशी
मिलती में ढ़ेर सारा गम छिपा है।
बस! दिल में ऐसी
चाहत को पनाह
ना दे।
जो तुमसे तुम्हारी
खुशियों को छीन लें।
ये चाहत...
एक पल में ना जाने...
कितने रंग बदलती है?
कितनो को रूसवा…
कर देती है।
और कितनो का दिल…
तोड़ देती है।
10. ये तो हसरतों का
एक ऐसा पिटारा है...
जो किसी के भी दिल को
धड़का देता है।
और अपने एहसास में
कैद कर लेता है
जो धीरे-धीरे ही सही
लेकिन बड़ी आसानी से
अपनी गिरफ्त में लेता है।
एक बार इसके शिंकजे में
आ जाए तो...
उसका निकलना मुश्किल ही
नही नमुमकिन होता है।




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