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कब तक दोहरा चरित्र?

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बड़ी-बड़ी बातें , ढेरी सारी नसीहत , ऐसा लगता है कि हमारे देश में लोगों की मानसिकता ऐसी बन गई है। अगर कोई सड़का हादसा हो जाए तो जमकर सरकार को कोसना है.. सरकार की नाकामियों पर चर्चा करना है.. सवाल पूछने है.. आखिर इन हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जाता है ? आखिर कब तक लोग अपनी जान गांवाते रहेंगे ? क्या सरकार मूकदर्शक बनकर सबकुछ यूंही देखती रहेगी ? और जब इन सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार ने कठोर कदम उठाया है तो सरकार को जमकर कोसा जा रहा है। आखिर इतने भारी भरकम चालान क्यों काटे जा रहे है ? अरे भई कहीं तो आप लोग स्टेंड करो.. कभी तो अपनी बात पर कायम रहो.. यूं हीं कब तक ऐसा करते रहोगे। सच बताओं तो कभी-कभी मुझे यह दोगलापन देखकर हंसीं आती है.. तो कभी-कभी गुस्सा भी.. और सोचने पर मजबूर हो जाती हूं। क्या हमारे देश के लोग सरकार को अपने हाथों की कठपुतली बनाना चाहते है ? शायद मेरी यह बात सुनकर किसी को बहुत गुस्सा आए.. लेकिन गुस्सा मत कीजिए.. थोड़ा पानी पीओ.. और दिमाग ठंडा करो... देखिए मैं यहां सरकार का समर्थन नहीं कर रहीं हूं.. लेकिन मैं सिर्फ यह कहना चाहती हूं...

मोदी है तो मुमकिन है

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मोदी सरकार नहीं होती तो शायद 72 साल का इंतजार खत्म न होता... जम्मू कश्मीर में सहीं मायनों में भारत का अंग न बन पाता... मोदी सरकार का 'एक राष्ट्र, एक विधान और एक निशान' एजेंडा पूरा न हो पाता.. 72 साल अब जम्मू कश्मीर को आजादी मिली है... साथ ही लद्दाख भी आजाद हो गया है.. और यह कारनामा मोदी सरकार ने कर दिखाया है.. इसलिए अब सोशल मीडिया पर बाढ़ आ गई है कि मोदी है तो मुमकिन है .. 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को लेकर जो ऐतिहासिक फैसला लिया... जम्मू कश्मीर में धारा 370 को खत्म करने के लिए राज्यसभा में सिफारिश की। देखा जाए तो रविवार की रात से ही कयास तेज हो गए थे कि जम्मू कश्मीर में कुछ बड़ा होने जा रहा है.. जब जम्मू कश्मीर में धारा 144 लगा दी गई... इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई... जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियो को नजरबंद कर दिया गया... तो सारी अटकलों पर लोगों का ज्यादा ध्यान खिंचने लगा.. और सुबह-सुबह होते पूरे देश की जिज्ञासा इस बात पर जा टिकी कि आखिर मोदी सरकार क्या कदम उठाने जा रही है। पहले पीएम आवास पर बैठक हुई और बैठक खत्म होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे साफ ह...

यादों के सफर में ‘हमसफर’

तेरी यादों का भंवर न तो जीने देता है, और न मरने... अगर गलती से खामोशी छा भी जाए, तो कानों में तेरी यादें चुपके से कहती है। तू उदास क्यों है ? मैं तो तेरे आस-पास हूं, फिर क्यों खामोश है ? फिर क्या, ये हसीं यादें.. ‘ खामोशी को खुशियों ’  में बदल देती है और यादों के गहरें सागर में, फिर डूब जाते है।। तेरी यादों का भंवर न तो जीने देता है, और न मरने... तुम्हारा पास न होकर भी पास होना खुद में एक अलग अहसास है। वो अहसास जिसकी खुशबू,  मेरे रोम-रोम में समा चुकी है। जिसकी कैद अब मुझे अच्छी लगती है जानती हूं,  यह दिवानगी... या तो हमें ‘ आबाद करेगी या फिर बर्बाद ’ । लेकिन तुम हर डगर पर साथ हो, यह किसी अनमोल लम्हें से कम नहीं। तेरी यादों का भंवर न तो जीने देता है, और न मरने... जब कभी किस्से तुम्हारे होते है। तो दिल हंसता भी है और रोता भी फिर सोचती हूं, यादें मुझे कैद से आज़ाद करें !! फिर खामोशी घेरती है तो... यह यादें चुपके आती है, और कहती है, मेरे होते हुए तू उदास क्यों है, तेरा और मेरा साथ तो जन्मों का है...

क्या “अली और बजरंगबली” ने किसी मौलाना और पुजारी से सड़क पर इबादत करने को कहा है!!!!!!!!

मैंने जो लिखा है.. शायद कुछ लोगों को अच्छा लगे और कुछ लोगों को अच्छा न लगें... कुछ लोग मुझे नसीहत देंगे... कुछ लोग मुझे बोलेंगे कि मुझे धर्म के मामले में लिखना नहीं चाहिए... लेकिन मैं काफी समय से देश में देख रही हूं कि अली Vs बजरंगबली हो गया है... लेकिन मन में एक सवाल है कि क्या भगवान हनुमान जी ने यह कहा है कि.. अगर उनके भक्त सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे तो वो खुश हो जाएंगे... या फिर अली ने कहा कि अगर सड़क पर नमाज़ अदा करों तो मैं बहुत खुश हो जाउंगा... मेरे इष्ट भी हनुमान जी है.. इतना तो मैं भी जानती हूं कि हनुमान जी सिर्फ राम-राम का नाम सुनकर ही खुश हो जाते है... अगर उनका कोई भक्त सच्चे दिल से उन्हें पुकारे तो वो पल में अपने भक्त की मदद करते है... लेकिन सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करना कुछ हज़म नहीं होता... मैं यहां उन लोगों की आलोचना कर रही हूं... जो बजरंगबली के नाम पर सियासत कर रहे है... सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करके जाम जैसी स्थिति को पैदा कर देते है... जिससे हम सभी को दिक्कत होती है। अगर कोई आवाज़ उठाए तो यह कहा जाता है कि भगवान का नाम ही तो ले रहे है.....

तुच्छ सोच, तुच्छ राजनीति

देश की राजनीति में क्या चल रहा है ? यह तो सब दिखाई दे रहा है... और सोशल मीडिया पर यह भी दिखाई दे रहा है कि.. कैसे दो धड़े सक्रिय है... और इन धड़ों की हरकतें किसी से छुपी नहीं है.. एक धड़ा मोदी सरकार के विरोध में सक्रिय रहता है... तो दूसरा धड़ा मोदी सरकार के पक्ष में तारीफों के पुल बांधता रहता है। इन सबके बीच वो धड़ा भी यहां देखा जा सकता है.. जो खमोश रहकर सब देखता है लेकिन अगर वो सहीं को सहीं.. और गलत को गलत कह दें तो मानों उस पर आफत टूट पड़ी हो... धरती फट गई हो... भूचाल आ गया हो... जैसे इस धड़े ने (इसमें कोई भी शामिल हो सकता है) कोई पाप कर दिया हो... फिर तो न जाने कैसे-कैसे अपशब्दों का बखान किया जाता है... उसे ट्रॉल किया जाता है.. जो सबकुछ होता है वो कल्पना से भी परे है... आजकल भारत की राजनीति में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुद्दा छाया हुआ है... डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर मोदी सरकार को जमकर घेरा जा रहा है.. मैं कुछ आगे लिखना शुरू करूं उससे पहले आपको यह बताना भी जरूरी है कि... आखिर डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान किन मुद्द...

PM Modi attack on congress in Jaipur- न अटकती है, न लटकती और न भटकती है।

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Nisha Gautam_ Showreel

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बीजेपी-पीडीपी का गठबंधन टूटा

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2015 में जम्मू कश्मीर में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहूमत नहीं मिला था... जम्मू में बीजेपी ने परचम लहराया तो घाटी में पीडीपी की चमक देखने को मिली था...दोनों पार्टियों ने मार्च 2015 में गठबंधन की सरकार बनाई ताकि जम्मू कश्मीर में विकास हो... लेकिन सेना , पत्थरबाजों, आतंकियों, नीतियों के मोर्चे पर दोनों पार्टियों के मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे....जिसका नतीजा ये रहा है कि ये गठबंधन 40 महीनों में ही टूट गया... जम्मू कश्मीर में बीजेपी भाजपा ने पीडीपी का साथ छोड़ दिया है। हालांकि इस बेमेल गठबंधन के 40 महीनों पर विपक्ष अब जहर उगल रहा है। पीडीपी का तो यह कहना है कि   " उसे बीजेपी के इस फैसले का पहले पता ही नहीं था। कोई भी संकेत दिए बिना बीजेपमी ने एकदम से महबूबा को चौंका दिया" ।  सरकार गिरने के बाद पीडीपी क्या नया फॉर्मूला निकालेगी इसके लिए पीडीपी के सभी नेता बैठेंगे। फिलहाल इस्तीफे के बाद महबूबा ने कहा है कि  " उन्होंने बीजेपी से बड़े विजन के लिए गठबंधन किया था। घाटी में शांति की कोशिशें होती रहेंगी" ।  लेकिन इस दौरान महबूबा ने अपने पाक प्रेम का भी इज़हार करते हुए मा...

धरने में कैद दिल्ली की सियासत

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धूल के शिकंजे में दिल्ली है... और दिल्ली की सियासत धरने में कैद हो चुकी है... AAP और BJP का पॉलिटिक्ल ड्रामा है वो देखने को मिलता रहा है... कुल मिलाकर यहां नज़र आ रहा है कि जनता त्रस्त है और नेता मस्त है....   क्योंकि दिल्ली में ' धरना ' पॉलिटिक्स   चल रही है.... दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल , डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया , मंत्री गोपाल राय और सत्येंद्र जैन के धरने चल रहा है... जहां एक तरफ एलजी दफ्तर में दिल्ली सरकार का धरना चल रहा है तो दूसरी तरफ एलजी ने गृह मंत्री से मुलाक़ात की और इस धरने को बेतुका बताया। धरने का जवाब धरने से देने के लिए बीजेपी भी मैदान में उतरी... सीएम केजरीवाल के दफ़्तर के वेटिंग रूम में बीजेपी विधायकों का धरना देखने को मिला। खास बात ये है कि उन्हें आम आदमी पार्टी के बाग़ी विधायक कपिल मिश्रा का भी समर्थन मिला। सीएम कार्यालय पर धरना दे रहे बीजेपी विधायक विजेंदर गुप्ता ने आरोप लगाया है कि “ केजरीवाल ने ऑफ़िस के टॉयलेट पर भी ताला लगवा दिया है। CM अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में पानी की मांग को लेकर 20 घंटे से हैं , रात भर मच्छरों से परेशान रहे , CM सा...