क्या “अली और बजरंगबली” ने किसी मौलाना और पुजारी से सड़क पर इबादत करने को कहा है!!!!!!!!
मैंने जो लिखा है.. शायद कुछ लोगों को अच्छा लगे और कुछ लोगों को अच्छा
न लगें... कुछ लोग मुझे नसीहत देंगे... कुछ लोग मुझे बोलेंगे कि मुझे धर्म के
मामले में लिखना नहीं चाहिए... लेकिन मैं काफी समय से देश में देख रही हूं कि अली Vs बजरंगबली हो गया
है... लेकिन मन में एक सवाल है कि क्या भगवान हनुमान जी ने यह कहा है कि.. अगर
उनके भक्त सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे तो वो खुश हो जाएंगे... या फिर अली
ने कहा कि अगर सड़क पर नमाज़ अदा करों तो मैं बहुत खुश हो जाउंगा... मेरे इष्ट भी
हनुमान जी है.. इतना तो मैं भी जानती हूं कि हनुमान जी सिर्फ राम-राम का नाम सुनकर
ही खुश हो जाते है... अगर उनका कोई भक्त सच्चे दिल से उन्हें पुकारे तो वो पल में
अपने भक्त की मदद करते है... लेकिन सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करना कुछ हज़म
नहीं होता... मैं यहां उन लोगों की आलोचना कर रही हूं... जो बजरंगबली के नाम पर
सियासत कर रहे है... सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करके जाम जैसी स्थिति को पैदा
कर देते है... जिससे हम सभी को दिक्कत होती है।
अगर कोई आवाज़ उठाए तो यह कहा जाता है कि भगवान का नाम ही तो ले रहे
है.. तुम्हें क्या अपत्ति है... सड़कों पर जब नमाज़ पढ़ते है.. क्या तब दिक्कत
नहीं होती? देखिए दिक्कत तो हर जगह होती है.. दिक्कत उस दिन भी होती है जब
शुक्रवार के दिन सड़कों पर नमाज़ अदा की जाती है... और दिक्कत मंगलवार को भी होने
लगी है जब सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाने लगा है.. हर किसी को परेशानी
होती है... लेकिन क्या भगवान ने कहा है कि उनके भक्त सड़कों पर खड़े होकर उनकी
इबादत करे.. और जाम जैसी स्थिति को पैदा करें.. जिससे सभी को दिक्कत हो... भगवान तो
यह कभी नहीं कह सकते है... मेरा मानना है कि अगर हनुमान जी को खुश करना है तो हर
मंगलवार और शनिवार को घर पर, मंदिर में, खुले ग्राउंड में सुंदरकांड का पाठ करें, हनुमान चालीसा का विधि-विधान
के साथ पाठ करें.. उनके नाम का भंडारा कराए.. गरीबों की मदद करें... उन्हें दिल
में बसा कर रखें.. लेकिन सड़कों पर दिखावा करने की क्या जरूरत है? क्या दिखावा करने से
हनुमान और अली खुश हो जाते है?
सड़कों पर नमाज़ अदा किया जाना और सड़कों पर सड़कों पर हनुमान चालिसा का पाठ किया जाना मुझे ठीक नहीं लगता। पश्चिम बंगाल में सड़कों पर हनुमान चालीसा
पढ़ने की जो सियासत शुरू हुई.. वह अब देश के कई शहरों में पहुंच चुकी है.. उत्तर
प्रदेश के शामली, बागपत, अलीगढ़ के अलावा
मध्य प्रदेश के भोपाल और छतरपुर में हनुमान चालीसा पर राजनीति गरमा गई है.. इसके
साथ ही झारखंड के जमशेदपुर में भी सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ने का मामला सामने आ
चुका है.. हिन्दू संगठन मुसलमानों के द्वारा सड़कों पर नमाज पढ़ने के विरोध में
हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं.. पश्चिम बंगाल में हर मंगलवार को विभिन्न शहरों
में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है... हनुमान चालीसा पाठ से जुड़ा ताजा मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर से
सामने आया है.. यहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बस स्टैंड पर हनुमान चालीसा का
पाठ किया है।
इस मामले पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि “हमें हनुमान चालीसा पाठ करने की आजादी मिलनी चाहिए”.. कार्यकर्ताओं का कहना है, ''जब विशेष समुदाय के लोग सार्वजनिक स्थानों- रेल, बस ,ट्रक जैसी जगहों पर अपना धार्मिक कार्यक्रम कर सकते है तो हम क्यों नहीं'' चलिए ठीक है उनके पास आजादी है तो आप भी आजादी की मांग कर रहे है.. लेकिन मुझे सड़कों पर न तो नमाज़ पढ़ना सहीं लगता है और न सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करना सहीं लग रहा है... अगर मेरे इस लेख से किसी को खेद पहुंचे तो क्षमा करना... मुझे जो सहीं लगा मैंने सिर्फ वहीं लिखने की कोशिश की है।
इस मामले पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि “हमें हनुमान चालीसा पाठ करने की आजादी मिलनी चाहिए”.. कार्यकर्ताओं का कहना है, ''जब विशेष समुदाय के लोग सार्वजनिक स्थानों- रेल, बस ,ट्रक जैसी जगहों पर अपना धार्मिक कार्यक्रम कर सकते है तो हम क्यों नहीं'' चलिए ठीक है उनके पास आजादी है तो आप भी आजादी की मांग कर रहे है.. लेकिन मुझे सड़कों पर न तो नमाज़ पढ़ना सहीं लगता है और न सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करना सहीं लग रहा है... अगर मेरे इस लेख से किसी को खेद पहुंचे तो क्षमा करना... मुझे जो सहीं लगा मैंने सिर्फ वहीं लिखने की कोशिश की है।
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