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NEWS SPECIAL ON MODI SARKAR COMPLETE 3 YEARS

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क्या केजरीवाल सरकार EVM के खिलाफ धरना देगी ?

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दिल्ली एमसीडी में बीजेपी ने तीसरी बार अपना कब्जा बरकार रखा है ... बीजेपी ने 185 सीट जीतकर एमसीडी में नंबर का स्थान हासिल किया है ... वहीं आम आदमी पार्टी को 46 सीटें मिली है .. कांग्रेस को 28 और अन्य को 11 सीटें मिली है .. जहां एक तरफ बीजेपी जीत से गदगद है .. तो दूसरी तरफ AAP हार के लिए EVM को जिम्मेदार ठहरा रही है .. जब AAP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में 67 सीटें जीती थी .. तब तो केजरीवाल और उनके नेताओं को EVM में खराबी नज़र नहीं आई .. अब सिर्फ 46 सीटें मिली है तो ईवीएम में गड़बड़ी हो गई .. वाह केजरीवाल तेरी राजनीति .. दोस्तों अब सवाल है कि क्या केजरीवाल सरकार EVM के खिलाफ धरना देगी ? लगता है कि केजरीवाल की नौटंकी वक्त बेहद करीब आ गया है। दिल्ली एमसीडी चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है। बीजेपी को 185 सीटे मिली है। AAP को 46, कांग्रेस को 28 और अन्य को 11 सीटे। केजरीवाल ने एमसीडी चुनाव के नतीजे आने के बाद से पहले ही कहा था कि " जीत या हार लगी रहेगी। 26 अप्रैल के इस तरह के नतीजे आए , जो पंजाब , धौलपुर , भिंड जैसी बेईमानी साबित करते हैं तो हम आंदोलन से आये थे , सत्ता का सु...

क्या ऐसा विरोध प्रर्दशन जायज़ है ?

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क्या ऐसा विरोध प्रर्दशन जायज़ है ? सवाल इसलिए क्योंकि तमिलनाडु के किसान दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्र र्दशन कर रहे है। सूखे और कर्ज के तले दबे किसानों ने केंद्र सरकार से 40 हजार करोड़ रुपये की मांग की है। जबकि केंद्र की तरफ से 1 अप्रैल को तमिलनाडु के किसानों के लिए 1712 करोड़ जबकि सूखे से निपटने के लिए कर्नाटक को 1235.52 करोड़ रुपये दिये गये हैं। उसके बाद भी विरोध प्रर्दशन जारी है। विरोध जताने का एक नया ट्रेंड सामने आया है .. जो अपने साथ सवाल भी लाया है। क्या अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए ये नया तरीका जायज़ है। अगर जायज़ है तो फिर कोई भी सरकार से अपनी मांगे मनवाने के लिए जंतर - मंतर पर बैठ जाएगा। और ऐसे ही प्रर्दशन करेगा। आगे इस विषय पर कुछ लिखे उससे पहले इस मामले में अब क्या है। वो भी लिखना बेहद जरूरी है। दिल्ली का जंतर - मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का गढ़ बन चुका है। इस बात को कोई नकार नहीं सकता है। हर कोई यहां पर आकर अपना विरोध जताता है। पहले की सरकारों के समय में भी देखने को मिला था। अब की सरकार के समय भी ऐसा ही देखने को मिला है। तमिलनाडु के किसान भी पिछले 41 ...

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

मतदाताओं के अधिकार का दिवस । लोकतंत्र में हर किसी को अधिकार होता है कि वो अपने मत का प्रयोग करके एक अच्छी सरकार को चुने है । लोगों को उनके अपने अधिकारों का अहसास कराया जाए , इसलिए 25 जनवरी 2011 से राष्ट्रीय मतदाता दिवस बनाने की परंपरा शुरू की गई ।              हर व्यक्ति को अधिकार है कि सोच समझकर कर अपने मत का प्रयोग करें और ऐसी सरकार का चुनाव करें जो पांच साल तक सूबे का विकास करें । मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति करें , लोगों को हितों का ख्याल रखें , उसे ऐसा न बिल्कुल न लगे कि उसने इस सरकार को चुनकर गलती की है। मतदान करना, हर मतदाता का अधिकार होता है। और भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए अहम है। इस दिन भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र के प्रत्येक चुनाव में भागीदारी की शपथ लेनी चाहिए , क्योंकि भारत के प्रत्येक व्यक्ति का वोट ही देश के भावी भविष्य की नींव रखता है। इसलिए हर एक व्यक्ति का वोट राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनता है। भारत में जितने भी चुनाव होते हैं , उन...