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Showing posts from February, 2015

बदले-बदले मोदी

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बदला मिजाज.. बदले अंदाज.. बदली रणनीति... और मौसम भी बदल गया..वैसे सर्दियों का मौसम करवट ले चुका है..और हल्का हल्का खुशनुमा मौसम आ गया है..और इसी मौसम के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बदले बदले से नजर आ रहे है..जिन मुद्दों पर कुछ नहीं बोलते थे..उन मुद्दों पर चुप्पी तोड़ रहे हैं..जिन पर हमला करते नहीं थकते थे..अब उनसे दोस्ती निभा रहे हैं। दिल्ली में हार के बाद प्रधानमंत्री मोदी का अंदाज बदल गया है। एक हार इंसान को इतना बदल देती है..लेकिन विश्वास नहीं होता..विश्वास करना बेहद जरूरी है..क्योंकि पीएम मोदी बदल चुके है। प्रधानमंत्री मोदी जिस केजरीवाल पर तीखे हमले किया करते थे..अब खांसी पर उनकी खैरियत पूछ रहे हैं..मोदी के सुर शरद पवार से लेकर अरविंद केजरीवाल तक बदल गए हैं। मोदी का अंदाज अब बदला हुआ है..   और रणनीति भी बदल गई है।   लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में पहली बार बीजेपी का विजय रथ रुका..वो भी करारी हार के साथ...और अब नौ महीने तक काम करने के बाद मोदी सरकार अपना पहला बजट पेश करने वाली है..मोदी की बदली हुई रणनीति बजट से पहले की तैयारी का ही हिस्सा है। मोदी बजट पर बैटिंग...

नीलामी पर विवाद

विवादित गोल्डन सूट पहले भी विवादों में था..और अब जब नीलाम हो चुका है तो भी विवादों में घिरा है..सूरत की प्रदर्शनी में इस सूट की नीलामी हुई। हीरों के कारोबारी लालजी पटेल ने मोदी के इस सूट को करीब 4 करोड़ 31 लाख में खरीदा..इतना ही नहीं हीरा कारोबारी ने जलूस निकालकर अपने शहर के लोगों को मोदी के इस सूट से रू-ब-रू कराया।           लोगो के अंदर मोदी के लिए कितना प्रेम है..इसका अंदाजा मोदी के बंद गले के सूट को देखने के लिए सड़कों पर उतरे लोगों को देखकर लगता है..सड़क के दोनों किनारों पर भीड़ जमा थी..जैसै कि किसी महाराजा की सवारी निकल रही हो..लेकिन महाराजा की सवारी तो नहीं ये तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोल्डन सूट की प्रदर्शनी हो रही थी। जुलूस के बाद सूट को लालजी पटेल के कार्यालय के स्वागत कक्ष में रख दिया गया। पटेल ने कहा कि “ हम देश के लिए कुछ करना चाहते हैं..और इस नीलामी से हमे ये मौका मिल गया ” ।         लालजी पटेल को तो देश की सेवा करने का मौका मिल गया..मोदी के सूट की नीलामी से मिलने वाली राशि को स...

हम तो डूबे..सनम तुम्हे भी संग ले डूबे

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बिहार की राजनीति में जीतनराम मांझी का नाम गुमनाम था..अब ये नाम बच्चा बच्चा जनता है। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की वजह से कई सूबो में पार्टियों का सूपड़ा  साफ गया..तो कुछ राज्यों में पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ा..ऐसा ही नजारा बिहार का था..बिहार में मोदी लहर ने जेडीयू को परास्त कर दिया..और हार की जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया..और बिहार की कमान जीतनराम मांझी के हाथों में सौंप दी। मांझी बिहार के नए मुख्यमंत्री चुने गए..नीतीश कुमार के इस फैसले की खूब तारीफ हुई..लेकिन विवादित बयानों के चलते मांझी हमेशा सुर्खियों में बने रहते थे। इन्हीं विवादित बयानों के चलते मांझी की कुर्सी खतरे में पड़ने लगी। इसके बाद शुरू हुआ बिहार का हाई वोल्टेज ड्रामा। बिहार का सियासी ड्रामे का क्लाइमेक्स देखा गया ..जीतनराम मांझी का सीएम पद से इस्तीफा देना..पहले से ही तय था..लेकिन जिस तरह से जीतन राम मांझी ने इस्तीफा दिया..उससे राजनीतिक पंडितों को गहरा झटका लगा है..पार्टी के खिलाफ बगावत करने वाले मांझी परीस्थितियों के साथ समझौता कर लेंगे..बाकय में चौकाने वाली बात थ...

हिंदुस्तान में रहने वाले कौन?

हिंदुस्तान किसका है ? और इसमें रहने वाले कौन है ? काफी सारे सवाल जहन में उठने लगते है..जब समाज के चंद ठेकेदार हिंदुस्तान की व्याख्या करने लगते है..जमियत उलेमा के मुफ्ती मोहम्मद इलियास ने एक विचलित करने वाला बयान दे दिया..मुफ्ती मोहम्मद ने भगवान शंकर का मुस्लिमों का पहला पैगंबर बताया..साथ ही उन्होंने तो शंकर-पर्वती को माता पिता तक कह डाला..जिसका हिंदू धर्म गुरूओं ने सम्मान किया लेकिन मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया..साथ ही जमीयत उलेमा की सोच पर एक प्रश्न चिन्ह लगा दिया..   ये सोचने वाली बात है..कि क्या हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। हमेशा से ही चर्चा का विषय बना रहा है। एक बड़ा सवाल और बड़ा मुद्दा भी..समाज के कुछ ठेकेदार में ये धर्म पर कुछ भी बोलने कभी परहेज नहीं करते है। इसका अंजाम क्या होगा लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। जहां सभी धर्मों के लोग रहते है। सभी धर्मों का आदर , सम्मान किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ये बात कह चुके है कि..किसी भी धार्मिक हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा...लेकिन उसके बाद भी विवादित बयान देने...

मोदी का सूट नीलाम

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च र्चित गोल्डन सूट अब नीलाम होने के लिए तैयार है..अगले 2 दिन में नीलाम भी हो जाएगा..ये सूट पीएम नरेंद्र मोदी का है..गुजरात के हीरा कारोबारी ने पीएम मोदी को तोहफे में दिया था..मोदी ने इस सूट को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के दौरान..और गणतंत्र दिवस के मौके पर पहना था..मोदी का इतना महंगा सूट पहनना..विरोधियों की आँखों में खटक गया..क्योंकि इस सूट पर सोने के तार से प्रधानमंत्री का नाम लिखा था..कोई कहता हैं कि इस सूट की कीमत 10 लाख है..तो कोई कहता है 15 लाख..लेकिन असली किमत इसके मालिक को पता है..जिसने ये सूट मोदी को गिफ्ट किया था। चुनावी मौसम में सूट को लेकर पीएम मोदी पर जुबानी हमला हुआ..विरोधी पार्टियों ने सुर में सुर मिलाकर मोदी पर जुबानी तीर छोड़े..सबसे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि ‘विकास की बात करने वाले प्रधानमंत्री 10 लाख का सूट पहनते है..उन्हें गरीबों की चिंता नहीं है..वो तो नाम के लिए विकास की बात करते है’ .. राहुल के बाद सभी विरोधी पार्टियों ने मोदी के सूट को चुनावी मुद्दा बनाया..और जनता के सामने मोदी की नकारत्मक छवि पहुंचाने ...

राजनीति का बदलता रंग ढंग

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भारतीय राजनीति का रंग ढंग बदलता जा रहा है। देश को आजाद कराने के लिए वीरों ने खुद को कुर्बान कर दिया था। अब उसी देश में आरोप-प्रत्यारोंप की राजनीति अपने पैर पसार चुकी है। राजनीति की लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति पर लड़ी जा रही है। मुद्दों की राजनीति अब आरोप-प्रत्यारोप का रंग ले चुकी है। जहां कभी महंगाई, भ्रष्टाचार की दलीले दी जाती है। वहां अब जमकर एक-दूसरे पर जमकर किचड़ उछाली जा रही है। सब कुछ बदल चुका है..और राजनीति का दौर भी..दौर के साथ जनता का मिजाज भी बदल चुका है। जनता के पास वो चाबी..जिससे वो जिसकी चाहे उसकी किस्मत खोल दे.. लेकिन अगर राजनीति की बात करें तो..इस बार की राजनीति में एक व्यक्ति का दबदबा देखा गया। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बलबूते बीजेपी एतिहासिक जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने सभी विरोधी पार्टियों का सूपड़ा साफ किया तो..दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की झाड़ू मोदी लहर पर भारी पड़ी..लेकिन आज हमारा विषय जीत..हार से नहीं है..बल्कि आज हम राजनीति के बदलते स्वरुप पर गहन मंथन कर रहे है...   चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीति पार्टियों ने जनता को रिझाने के लिए ...

जीत से ज्यादा हार पर चर्चा

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इस जीत को क्या कहें..जिससे भारत के प्रधानमंत्री की पड़ोसी देशों में खिल्ली उड़ाई जा रही है..जिसे भारत की करारी हार के रूप में  देखा जा रहा हो। भारत में आप समर्थक जीत का जश्न मना रहे है..तो मोदी समर्थक सदमे में है कि ये क्या हो गया है..बेहरहाल जीत मिली या हार..लेकिन पड़ोसी देशों में इसे बीजेपी की हार नहीं इसे भारत की हार से जोड़ा जा रहा है..जिस एतिहासिक जीत के साथ नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे..जिस अंदाज से मोदी ने विदेशों में भारत को नई पहचान दिलाई थी..मोदी ने भारत को मजबूती के साथ पेश किया था..अब वहीं मजबूत छवि कमजोर पड़ने लगी है... भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में बीजेपी के कद्दावर नेता और भारत के प्रधानमंत्री के बारें में चर्चा हो रही है..मोदी के खिलाफ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है..जिससे हर हिंदुस्तानी का सिर शर्म से झुक जाएगा..लेकिन अब कहना या इस बात पर सोचने की ओर मंथन करने की जरूरत है..बीजेपी इस हार से उबरने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है..लेकिन ये हार ऐसी हार है..जो मोदी को रात को सोने देगी..और न चैंन से रहने देगी..अब वक्त आ गया है इस हार को मोदी जीत में...

दिग्गजों पर भारी पड़ी 'आप'

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साल के दूसरे महीने की 10 तारीख को जो हुआ..उससे बीजेपी खेमे में तूफान लाकर खड़ा कर दिया। साल 2014 में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया..जिस ओर देखा..उस ओर जीत मिली। कामयाबी बुलंदी छू रही थी। लोकसभा में मिली एतिहसिक जीत से बीजेपी का सीना चौड़ा होगा था..क्योंकि मैदान में सभी विरोधियों को जो परास्त किया। मोदी लहर ऐसी चली कि सब मोदीमय मोदीमय हो गए..लेकिन साल 2015 में वो हुआ..जिसकी कल्पना बीजेपी ने कभी नहीं की होगी। समय था दिल्ली विधानसभा चुनाव का..सभी पार्टियां ने जोर शोर से चुनाव प्रचार किया..लेकिन बीजेपी भूल गई..उसने वहीं गलती की। जो गलती साल 2014 में कांग्रेस ने की थी। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति। एक-दूसरे पर जमकर किचड़ उछालना। बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर ऐसी किचड़ उछाली कि..अपने हिस्से की भी सारी किचड़ आप को दे दी। शायद आपको याद नहीं मोदी जी..आप ने ही तो कहा..जितना किचड़ उछालोगे...कमल उतना ही खिलेगा..फिर ये गलती कैसे हो गई। कौन हैं इस गलती के कसूरवार...आप या आपके सबसे करीबी दोस्त अमित शाह..क्योंकि आमित शाह के निर्देश पर ही तो..पार्टी ने ‘आप’ को मात देने के लिए मैदान में पूरी फौज उतार दी..अ...

बीजेपी की बड़ी गलतियां

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दिल्ली चुनाव का घमासान चरम पर है..पूरे देश की निगाहें दिल्ली चुनाव पर लगी हैं..हर कोई जानने को बेताब है कि दिल्ली की बाजी किसके हाथ लगती है..जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है..आम आदमी पार्टी बीजेपी की गर्दन पर सवार होती दिख रही है..एक वक्त बीजेपी आप से काफी आगे दिखाई दे रही थी..लेकिन मौजूदा तस्वीर को देखें तो आप बीजेपी को कांटे की टक्कर दे रही है..तो वहीं जानकारों की मानें तो बीजेपी ने बना बनाया खेल बिगाड़ दिया है..जो बाजी कभी उसकी मुट्ठी में थी, अब फिसलती जा रही है..इस हालात के पीछे बीजेपी की अपनी गलतियां ही हैं..बीजेपी की रणनीतिक चूक ने ही आप को बढ़त दिला दी है..बीजेपी ने पांच ऐसी बड़ी गलतियां की है..जिनसे बीजेपी को नुकसान हो रहा है... किरण बेदी का आगमन जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह किरण बेदी को पार्टी में लाए तो इसे बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा था। लग रहा था कि अब बाजी आसानी से बीजेपी के हाथ लगेगी। खुद आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य शांति भूषण ने माना कि किरण बेहद ईमानदार हैं और केजरीवाल को कड़ी चुनौती देंगी। लेकिन किरण के आगमन से बना जश्न का माहौल जल्द अविश...

कौन सच्चा..कौन झूठा !

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चुनाव...चंदा..और चाल...दिल्ली विधानसभा चुनाव से आम आदमी की पार्टी की पोल खोली..आवाम एनजीओ ने आम आदमी पार्टी की पोल खोली..एनजीओ ने आरोप लगाया है कि आप ने बोगस कंपनियों से 2 करोड़ का चंदा लिया..आप पर आरोपों की बौछार होने लगी तो..आप ने मोर्चा संभाला और मैदान में अपनी सफाई देने लगी है..जहां एक तरफ आप ने आवाम के आरोपों को सिरे से नकारा तो वहीं दूसरी तरफ आप ने बीजेपी पर जुबानी हमला बोला। फर्जी फंडिंग मामले में आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की..और इस हरकत के लिए बीजेपी को कसूरवार ठहराया..लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है...ये तो बीजेपी या फिर आम आदमी पार्टी ही जानती है...वहीं इस मामले जांच के लिए आप ने सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात कही..और जांच के लिए एसआईटी की मांग की..इतना ही नहीं आप ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से फर्जी फंडिंग की जांच में सहयोग की अपील भी करेगी। एनजीओ आवाम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आप पर आरोप लगाया कि पिछले साल 5 अप्रैल की रात बारह बजे चार कंपनियों से 50 -50 लाख रुपये लिये गए..यानी दो करोड़ की रकम चंदे के तौर पर ली गई..आरोप ये है कि ...

पीछे छूटी दलीलें..

हर वक्त ईमानदारी की दुहाई..महंगाई पर लगाम लगाने की कसमें..भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का वादा..आप आदमी पार्टी ने इन्हीं मुद्दों के जरिये दिल्ली की राजनीति में कदम रखा..लेकिन इस बात को भी कभी भुलाया नहीं जा सकता कि..आप ने जिस पार्टी के खिलाफ बगावत शुरू की..राजनीति में बदलाव का सपना जनता को दिखाया था..उसी पार्टी के साथ सांठगांठ करके..आप दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई..लेकिन अब बहुत वक्त बीत चुका है..इस दौरान काफी बदलाव हुआ है..अगर दिल्ली की बात करें तो..दिल्ली की जनता ने इस बुरे वक्त में काफी कुछ सीखा है...कौन अपना हैं..और कौन धोखेबाज..दिल्ली की जनता इस बात को अच्छी तरह परख चुकी है। दिल्ली में राजनीति में एक ऐसा बदलाव आया जिसे देखकर राजनीतिक पंडितों ने भी आम आदमी पार्टी का लोहा माना..लेकिन राजनीति की हवा..रंग..ढंग सब बदल रहे है..बीजेपी ने मोदी लहर के सहारे लोकसभा चुनाव जीता तो..आम आदमी पार्टी केजरीवाल के दम पर दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत का दावा कर रही है.. सच्चाई को कितना भी झुठलाया क्यों ना जाए..लेकिन हकीकत ज्यादा समय तक नकाब का चोला नहीं पहन सकती है..आजकल दिल्ली में चंदा विवाद खू...