पीछे छूटी दलीलें..

हर वक्त ईमानदारी की दुहाई..महंगाई पर लगाम लगाने की कसमें..भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का वादा..आप आदमी पार्टी ने इन्हीं मुद्दों के जरिये दिल्ली की राजनीति में कदम रखा..लेकिन इस बात को भी कभी भुलाया नहीं जा सकता कि..आप ने जिस पार्टी के खिलाफ बगावत शुरू की..राजनीति में बदलाव का सपना जनता को दिखाया था..उसी पार्टी के साथ सांठगांठ करके..आप दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई..लेकिन अब बहुत वक्त बीत चुका है..इस दौरान काफी बदलाव हुआ है..अगर दिल्ली की बात करें तो..दिल्ली की जनता ने इस बुरे वक्त में काफी कुछ सीखा है...कौन अपना हैं..और कौन धोखेबाज..दिल्ली की जनता इस बात को अच्छी तरह परख चुकी है।

दिल्ली में राजनीति में एक ऐसा बदलाव आया जिसे देखकर राजनीतिक पंडितों ने भी आम आदमी पार्टी का लोहा माना..लेकिन राजनीति की हवा..रंग..ढंग सब बदल रहे है..बीजेपी ने मोदी लहर के सहारे लोकसभा चुनाव जीता तो..आम आदमी पार्टी केजरीवाल के दम पर दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत का दावा कर रही है..
सच्चाई को कितना भी झुठलाया क्यों ना जाए..लेकिन हकीकत ज्यादा समय तक नकाब का चोला नहीं पहन सकती है..आजकल दिल्ली में चंदा विवाद खूब गरमाया हुआ है..और आम आदमी पार्टी के लिए परेशानी का सबब भी बना हुआ है..आम आदमी पार्टी की ये परेशानी कब हल होगी..इसका ज्ञान तो राजनीतिज्ञ पंडितों को भी नहीं है।

Comments

Popular posts from this blog

खौफ़नाक मंज़र

दर्दनाक मौत

भारत माता पर विवाद