बीजेपी की बड़ी गलतियां

दिल्ली चुनाव का घमासान चरम पर है..पूरे देश की निगाहें दिल्ली चुनाव पर लगी हैं..हर कोई जानने को बेताब है कि दिल्ली की बाजी किसके हाथ लगती है..जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है..आम आदमी पार्टी बीजेपी की गर्दन पर सवार होती दिख रही है..एक वक्त बीजेपी आप से काफी आगे दिखाई दे रही थी..लेकिन मौजूदा तस्वीर को देखें तो आप बीजेपी को कांटे की टक्कर दे रही है..तो वहीं जानकारों की मानें तो बीजेपी ने बना बनाया खेल बिगाड़ दिया है..जो बाजी कभी उसकी मुट्ठी में थी, अब फिसलती जा रही है..इस हालात के पीछे बीजेपी की अपनी गलतियां ही हैं..बीजेपी की रणनीतिक चूक ने ही आप को बढ़त दिला दी है..बीजेपी ने पांच ऐसी बड़ी गलतियां की है..जिनसे बीजेपी को नुकसान हो रहा है...

किरण बेदी का आगमन

जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह किरण बेदी को पार्टी में लाए तो इसे बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा था। लग रहा था कि अब बाजी आसानी से बीजेपी के हाथ लगेगी। खुद आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य शांति भूषण ने माना कि किरण बेहद ईमानदार हैं और केजरीवाल को कड़ी चुनौती देंगी। लेकिन किरण के आगमन से बना जश्न का माहौल जल्द अविश्वास और दरार में तब्दील होने लगा। किरण को सीएम उम्मीदवार घोषित करते ही कई नेताओं के माथे पर शिकन आ गई। सांसद मनोज तिवारी ने तो खुलेआम किरण को नेता मानने से इनकार कर दिया। हालांकि आलाकमान के डंडे के डर से वो अपने बयान से पलट गए। रही सही कसर किरण के चुनाव प्रचार प्रभारी नरेंद्र टंडन के इस्तीफा ने पूरी कर दी। हालांकि इस्तीफा भी वापस करा दिया गया। लेकिन इन दोनों घटनाओं ने साफ कर दिया कि किरण को लेकर पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है।

पीएम मोदी का हटना

बीजेपी ने एक रणनीतिक भूल पीएम नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार से हटाकर की। किरण बेदी के भरोसे मोदी की रैलियों को स्थगित कर दिया गया। मोदी ने जो माहौल बनाया था, वो सिलसिला टूट गया जिसका फायदा आप को मिला। किरण बेदी का अंदाज भले ही सोफगोई भरा हो, उनमें कुछ करने का जज्बा दिखता हो, लेकिन भीड़ को एकजुट रखने और उनमें जान फूंकने की कला तो मोदी ही जानते हैं। शायद बीजेपी आलाकमान को भूल का अहसास हुआ और मोदी की रैलिय़ों का सिलसिला फिर शुरू कर दिया गया। डर है कि कहीं बीजेपी ने देर तो नहीं कर दी।

पूरी फौज उतारना

बीजेपी की तीसरी भूल ये रही कि उसने अरविंद केजरीवाल से मुकाबले के लिए पूरी केंद्र सरकार को ही उतार दिया। बीजेपी संगठन के धुरंधर तो पहले ही मैदान में खम ठोक रहे थे, केजरीवाल को चुनौती दे रहे थे, सभी 7 सांसद भी मैदान में जुटे हुए थे। बावजूद इसके आलाकमान को जीत का भरोसा नहीं हुआ और मैदान में केंद्रीय मंत्री उतार दिए गए।

नेगेटिव कैंपनिंग

बीजेपी की कैंपेनिंग कहीं ना कहीं नेगेटिव कैंपेनिंग का शिकार भी हो गई लगती है। लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने विकास को एजेंडे को शीर्ष पर रखा था। चुनाव जीतने के बाद भी उनका मुख्य एजेंडा विकास ही रहा। आप ने भी इसे बखूबी समझा और अपने विकास के एजेंडे को सबसे ऊपर रखा। इस बार पार्टी आरोप प्रत्यारोप में कम फंसी दिखी। खासतौर पर उसने मोदी के खिलाफ चुप्पी साधे रखी। क्योंकि उसे बखूबी मालूम है कि मोदी की भ्रष्टाचार विरोधी छवि और विकास केंद्रित एजेंडे पर हमला बोलना उसे भारी पड़ सकता था। आप ने लोकसभा चुनाव में नेगेटिव कैंपेनिंग का खामियाजा भी भुगता है। लेकिन बीजेपी यहीं पर भूल कर बैठी, वो आप को लेकर नकारात्मक प्रचार में लग गई। चाहे मामला केजरीवाल के खिलाफ विज्ञापनों का हो या फिर हर रोज सवाल पूछने के सिलसिले का। बीजेपी अपना विजन पेश करने की बजाय केजरीवाल की पुरानी गलतियां याद दिलाने में व्यस्त रही। इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है।


जितना हमला, उतना प्रचार

बीजेपी की पांचवी और सबसे बड़ी गलती ये ही रही..बीजेपी ने चौतरफा आप पर हमला बोल दिया है। ना सिर्फ संगठन के नेता बल्कि सांसद से लेकर मंत्री तक आप और केजरीवाल पर रोजाना बयानबाजी कर रहे हैं, लगातार सवाल पूछ रहे हैं। कहने का मतलब ये कि बीजेपी ने आप को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दे डाली..बीजेपी आप और केजरीवाल को नजरअंदाज कर अपना पॉजिटिव कैंपेन कर सकती थी..अपना विजन और मोदी का मिशन जनता के सामने रखकर आगे बढ़ सकती थी। आप को उतनी ही तवज्जो दी जाती जितनी पिछले चुनाव में दी गई थी..लेकिन बीजेपी लोकसभा चुनाव का सबक भुला बैठी जिसमें सभी पार्टियों और विपक्षी नेताओं ने आए दिन नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया। जनता ने सभी को नकारकर मोदी को सिर आंखों पर बिठाया।
                  अब तो इंतजार है चुनाव की तारीख का...जिस दिन मतदाता उम्मीदवारों के नाम पर बटन दबाकर उनकी किस्मत ईवीएम में कैद करेंगे..बीजेपी के हाथ से फिसलती बाजी आप के हाथ लगती है या फिर बीजेपी मोदी लहर के भरोसे दिल्ली चुनाव पर विजयी होती है।

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