हम तो डूबे..सनम तुम्हे भी संग ले डूबे

बिहार की राजनीति में जीतनराम मांझी का नाम गुमनाम था..अब ये नाम बच्चा बच्चा जनता है। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की वजह से कई सूबो में पार्टियों का सूपड़ा  साफ गया..तो कुछ राज्यों में पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ा..ऐसा ही नजारा बिहार का था..बिहार में मोदी लहर ने जेडीयू को परास्त कर दिया..और हार की जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया..और बिहार की कमान जीतनराम मांझी के हाथों में सौंप दी। मांझी बिहार के नए मुख्यमंत्री चुने गए..नीतीश कुमार के इस फैसले की खूब तारीफ हुई..लेकिन विवादित बयानों के चलते मांझी हमेशा सुर्खियों में बने रहते थे। इन्हीं विवादित बयानों के चलते मांझी की कुर्सी खतरे में पड़ने लगी। इसके बाद शुरू हुआ बिहार का हाई वोल्टेज ड्रामा।



बिहार का सियासी ड्रामे का क्लाइमेक्स देखा गया ..जीतनराम मांझी का सीएम पद से इस्तीफा देना..पहले से ही तय था..लेकिन जिस तरह से जीतन राम मांझी ने इस्तीफा दिया..उससे राजनीतिक पंडितों को गहरा झटका लगा है..पार्टी के खिलाफ बगावत करने वाले मांझी परीस्थितियों के साथ समझौता कर लेंगे..बाकय में चौकाने वाली बात थी..फिलहाल मांझी ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है..और राज्यपाल ने मांझी के इस्तीफा को स्वीकार कर लिया है..अब गेंद राज्यपाल के पाले में है..राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी  नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए बुलाएं या नहीं..उधर, स्पीकर ने अनिश्चितकाल के लिए विधानसभा स्थगित कर और सियासी गर्मी पैदा कर दी।

मांझी के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया..सियासी ड्रामा शुरू होने से पहले मांझी ने कहा कि 'मांझी की नाव कोई नहीं डूबा सकता'..और ये बात सही भी साबित होने लगी है..मांझी खुद तो डूबे ही लेकिन नीतीश की मुश्किले बढ़ा दी है..वैसे मांझी का इस्तीफा देना नीतीश के लिए ये खुशी की खबर थी..आनन-फानन में नीतीश कुमार ने अपने समर्थक विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में जेडीयू के साथ साथ आरजेडी और कांग्रेस के भी विधायक शामिल हुए। बैठक में जेडीयू ने फैसला लिया कि वो राज्यपाल के न्योते का करेगी। शनिवार सुबह 11 बजे तक इंतजार करेंगे..वहीं अगर न्योता नहीं मिलता है तो राज्यपाल से सरकार बनाने को लेकर समय मांगेंगे..अब जेडीयू बिहार में सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गई। हालांकि राज्यपाल की तरफ से जेडीयू को सरकार बनाने को लेकर कोई न्योता नहीं दिया गया है..लेकिन नीतीश के लिए ये चिंता की बात है कि राज्यपाल का क्या फैसला होगा।राज्यपाल जेडीयू को सरकार बनाने का न्योता देते हैं या फिर बिहार में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हैं।

14 दिनों तक चले सियासी ड्रामे ने बिहार के पूर्व नीतीश कुमार को पूरी तरह से हिला कर रख दिया..मांझी ने सीएम कुर्सी पर बने रहने के लिए सारे दांव पेंच आजमाए..कभी दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मुलाकात की.तो कभी  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से बिहार में गहराए संकट पर चर्चा की..मांझी और नीतीश का आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हुआ..साथ ही नीतीश कुमार ने विधायकों को अपने पाले में करने डिनर पार्टी हुई..जेडीयू ने मांझी के बहाने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष पर जुबानी तीर छोड़े..इस दौरान जेडीयू ने बीजेपी और मांझी पर आरोप लगाए कि..जेडीयू के विधायकों को खरीदने की कोशिश की..और ये खबर मीडीया में सामने आई तो बीजेपी में खलबली मच गई..यहां तक बीजेपी ने इन आरोपों का खंडन किया।

20 फरवरी को बिहार के क्लाइमेक्स पर राजनीतिक पार्टियों कि निगाहें थी..जनता इसी उधेड़बुन में लग गई कि बिहार में मांझी की सरकार रहेगी या फिर नीतीश की..लेकिन मांझी ने इस्तीफा देकर जनता को भी ये सोचने पर मजबूर कर दिया..आखिर बहुमत साबित करने से पहले मांझी के साथ ऐसा क्या हुआ..जो उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया.. जबिक बीजेपी ने मांझी का पतवार बनने के लिए एलान भी कर दिया था। ये बेहद हैरान करने वाली बात थी..कल तक बगावत करने वाले मांझी ने आज घुटने कैसे टेक दिए..दिन शुक्रवार और घड़ी में साढ़े 11 बजे थे..मांझी मीडीया के सामने आए..और खुद के साथ हुए घटनाक्रम का वर्णन किया।

मांझी ने कई ऐसे खुलासे किए जिन्हे सुनकर एक दलित की आँखे में बिना झलके नहीं रह पाएंगी। दलित ही जनता भी मांझी के साथ हुए अन्याय को देखकर सहम गई होगी..मांझी ने कहा कि “पार्टी में मेरा लगातार अपमान होता रहा। विधानसभा अध्यक्ष ने गुप्त मतदान की इजाजत नहीं दी इसलिए मैंने इस्तीफा दिया। अगर गुप्त मतदान हो तो आज भी मुझे बहुमत है। जेडीयू के 40-50 विधायक मेरे साथ थे। स्पीकर ने नियमों की अनदेखी की। विधानसभा में गड़बड़ी की आशंका थी। विधायकों को मारने पीटने की धमकी मिली थी। विधायकों की करोड़ों में खरीद फरोख्त हुई। इसे देखते हुए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया”।

मांझी इतने में ही चुप नहीं हुए और बोलते चले गए..मांझी ने नीतीश और लालू यादव पर जुबानी हमला बोलते हुए.. “नीतीश कुमार ही मेरी सरकार को कंट्रोल कर रहे हैं। जब मैंने नीतीश के कहे पर चलने से इनकार किया तो ये सब किया गया। मेरा लगातार अपमान होता रहा और नीतीश भीष्म पितामह की तरह चीरहरण देखते रहे। अगर वो कहते तो मैं इस्तीफा दे देता। लालू भी कहते थे कि सत्ता सबसे निचले तबके के लोगों को मिलनी चाहिए, पर ऐसा होने नहीं दिया गया”...लेकिन ये तो राजनीति है..और यहां सब कुछ जायज है..जिस पर जितना किचड़ उछलेगा वो उनती ही पब्लिसिटी होती है।

मांझी ने सीएम पद से इस्तीफा देकर महादलित कार्ड खेल दिया  है..लेकिन इस पूरे मामले में बीजेपी की फजीहत हो गई। इसी साल बिहार में 185 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने है..और जीतनराम मांझी दलितों का वोट बैंक है..और इस मौके को बीजेपी भी गंवाना नहीं चाहती है क्योकि बिहार में बीजेपी के पैर इतने मजबूत नहीं है..इसी के चलते बीजेपी ने मांझी का साथ देने का फैसला किया..लेकिन अब देखने वाली बात होगी कि मांझी बीजेपी में शामिल कब होते है..और इसकी कब औपचारिक घोषणा होती है।


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