राजनीति का बदलता रंग ढंग

भारतीय राजनीति का रंग ढंग बदलता जा रहा है। देश को आजाद कराने के लिए वीरों ने खुद को कुर्बान कर दिया था। अब उसी देश में आरोप-प्रत्यारोंप की राजनीति अपने पैर पसार चुकी है। राजनीति की लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति पर लड़ी जा रही है। मुद्दों की राजनीति अब आरोप-प्रत्यारोप का रंग ले चुकी है। जहां कभी महंगाई, भ्रष्टाचार की दलीले दी जाती है। वहां अब जमकर एक-दूसरे पर जमकर किचड़ उछाली जा रही है। सब कुछ बदल चुका है..और राजनीति का दौर भी..दौर के साथ जनता का मिजाज भी बदल चुका है। जनता के पास वो चाबी..जिससे वो जिसकी चाहे उसकी किस्मत खोल दे..लेकिन अगर राजनीति की बात करें तो..इस बार की राजनीति में एक व्यक्ति का दबदबा देखा गया। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बलबूते बीजेपी एतिहासिक जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने सभी विरोधी पार्टियों का सूपड़ा साफ किया तो..दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की झाड़ू मोदी लहर पर भारी पड़ी..लेकिन आज हमारा विषय जीत..हार से नहीं है..बल्कि आज हम राजनीति के बदलते स्वरुप पर गहन मंथन कर रहे है... चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीति पार्टियों ने जनता को रिझाने के लिए वादों को झड़ी लगा दी। इतना ही नहीं राजनीतिक पार्टियों ने जनता के सामने खुद की छवि को साफ पेश की..लेकन विरोधी पार्टियों की छवि को जमकर धूमिल किया। चुनावी मौसम में बिन फाल्गुन के एक दूसरे पर जमकर किचड़ लपेटा। जनता होली के रंग भूलकर..इस बार राजनेताओं की किचड़ के संग होली खेलती रही..और जनता ने बिन मौसम की होली में खूब अनांद लिया। अब होली हो या फिर चुनावी मौसम की गंदगी। राजनेताओं के साथ जनता ने इसका का बखूबी लुफ्त उठाया..और जनता ने उस पार्टी को लताड़ भी लगाई..जिसने कुछ ज्यादा ही किचड़ के साथ होली खेली। इस बार चुनावी किचड़ का शिकार बनी मोदी लहर। सत्ता में आने के बाद से मोदी के मंत्री..आरएसएस नेता...और वीएचपी नेताओं ने खुलकर हिंदू धर्म को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। आए दिन विवादित बयान सामने आने लगे से जिनसे मोदी की विकास छवि गहरा झटका लगा। वहीं विरोधी पार्टियों को मोदी पर हमलावर होने का मौका मिल गया। धर्मांतरण के मुद्दें ने मोदी और मुस्लिमों के बीच अलगाव कि स्थिति पैदा कर दी..और दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक मोदी के विजय रथ में रोड़ा बने। धर्मांतरण को लेकर जनता बीजेपी से दूरी बनाने लगी थी..ये तो मोदी के लिए अपनों की बिछाई कांटों पर भरी सेज थी.. जाहिर है कि जिस तरह की राजनीति में भारत में देखने को मिलने लगी है..और ये लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है..ये एक कड़वा सच भी है..जिसे कोई भी राजनीतिक पार्टी झुठलाना नहीं सकती है। लोकतंत्र में जनता का राज है.. जनता का जिसे चाहे पलको पर बैठा दें..जिसे चाहें उसे जमीन पर गिरा दें..ये बात कांग्रेस पर एक दम सही साबित होती है.. 

कांग्रेस ने लगातार 15 साल दिल्ली में राज किया..लेकिन बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और बदहाल कानून व्यवस्था को झेलते हुए जनता ने कांग्रेस को दिल्ली से बेदखल कर दिया। चुनाव का बिगुल बजते ही..बीजेपी और कांग्रेस मैदान में कूद पड़ी..लेकिन आम आदमी पार्टी तो लोकसभा चुनाव से दिल्ली में चुनाव प्रचार कर रही थी...कांग्रेस, बीजेपी, आप ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज के लिए तमाम हथकंडे अपनाए..तीनों पार्टियों ने चुनावी रेस में बने रहने के लिए मैदान पर खिलाड़ियों से भी ज्यादा पसीना बहाया..सभी ने जमकर रैलियां की गई..रैलियों में सिर्फ एक ही एजेंडा..दिल्ली की कमान अपने हाथ में लेना..लेकिन इस बार किचड़ में से कमल की जगह झाड़ू निकली...बहरहाल ये जनता का फैसला है..अब तो ये देखना लाजमी होगा कि केजरीवाल दिल्ली की जनता को खुश कर पाते है या फिर नहीं। 

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