दर्दनाक मौत

इन तस्वीरों को देखिये...जरा गौर से..आपको भी हैरानी होगी..सत्ता में बैठा कदरदान किस तरह से शक्तिमान पर लाठियां बरसा रहा है। अब इन तस्वीरों को देखिये जिनमें शक्तिमान के लिए अपार प्रेम उमड़ रहा है। शक्तिमान के तेज़ से अपराधियों के छक्के छूट जाते थे। हौसले की गथाएं गायी जाती है..लेकिन अब ये गथाएं इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गई है..क्योंकि अब शक्तिमान हमारे बीच नहीं रहा है।

शक्तिमान वो जबाज़ सिपाही था जिसने कभी झुकना नहीं सिखा..लेकिन जिनके लिए उसने काम किया। वहीं उसकी मौत के जिम्मेदार बन गए। उत्तराखंड पुलिस के घोड़े 'शक्तिमान' ने 37 दिनों के बाद बुधवार को आखिरकार दम तोड़ दिया। 14 मार्च को बीजेपी के प्रदर्शन में जख्मी होने के बाद उसका बायां पैर काटा गया था। तब से वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाया था।

उत्तराखंड पुलिस के घोड़े 'शक्तिमान' ने 37 दिनों के बाद बुधवार को आखिरकार दम तोड़ दिया। 14 मार्च को बीजेपी के प्रदर्शन में जख्मी होने के बाद उसका बायां पैर काटा गया था। तब से वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाया था। इस मामले के आरोपी बीजेपी एमएलए गणेश जोशी ने सफाई दी 'इस मामले में मेरी कोई गलती नहीं है। अगर दोषी साबित हुआ तो मेरी टांग काट देना।

शक्तिमान की मौत पर एक तरफ जहां सब सक्ते में हैं। वहीं राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी हो गया है। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शक्तिमान की मौत पर खेद जताया। दूसरी तरफ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह मोदी ने लोकतंत्र की हत्या की वैसे ही बीजेपी विधायक ने शक्तिमान पर जानलेवा हमला दुर्भाग्यपूर्ण है।

जहां कांग्रेस नेता शक्तिमान की मौत के लिए बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खेल चुके हैं वहीं बीजेपी नेता अजय भट्ट ने शक्तिमान की मौत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल उत्तराखंड में बीजेपी के विधायक ने एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान लाठियां बरसाकर पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग तोड़ दी थी। इस मामले ने खूब तूल पकड़ा था जिसके बाद बीजेपी विधायक को सफाई देनी पड़ी थी।


शक्तिमान पर हमले के बाद पहली बार लगाई गई आर्टिफिशियल टांग सर्जरी के जरिये हटा दी गई थी। डॉक्टरों ने अमेरिका से एक नया पैर मंगवाया जिसकी कीमत लगभग तीन हजार डॉलर थी। पिछले 10 साल से उत्तराखंड पुलिस के लिए काम कर रहे शक्तिमान की टांग काटे जाने के बाद लोग तो सदमे में थे ही पुलिस महकमा भी सदमे में था। देश और दुनिया में शक्तिमान के ठीक हो जाने की दुआएं की गई थी। लोग ये दुआएं कर रहे थे कि‍ शक्तिमान अपनी कृत्रिम टांगों के सहारे फिर से खड़ा हो सके..लेकिन जब वो हमारे बीच नहीं रहा है तो शक्तिमान पर सियासत हो रही है। आखिर सवाल उठता है कि शक्तिमान की अखिरी सलामी पर भी सियासत चमकाने पर क्यों लगे है सियासतदान?

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