कैराना पर सियासत

कैराना को लेकर राजनीति तेज़ हो गई है। कैराना से हिंदुओं के कथित पलायन मामले की जांच को लेकर गठित बीजेपी का 9 सदस्यीय जांच दल कैराना पहुंच कर इस मामले की जांच कर रहा है। बीजेपी का जांच दल पार्टी के नेता विधानमण्डल दल सुरेश खन्ना है। जांच दल में खन्ना के अलावा डा. राधामोहन दास अग्रवाल, सांसद बागपत डा. सतपाल सिंह, सांसद सहारनपुर राघव लखन पाल शर्मा, सांसद बुलन्दशहर डा. भोला सिंह, सांसद अलीगढ सतीश गौतम, सांसद आंवला धर्मेन्द्र कश्यप, यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल हैं।

अब सवाल बीजेपी भी उठने लगा है क्या बीजेपी का जांच दल कैराना कांधला को लेकर ठीक जांच करेगा या नहीं? कैराना को लेकर बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने पहले 346 परिवारों की सूची जारी कर कहा था कि..इन्हें इस कस्बे को छोड़ने पर मजबूर किया गया जहां 85 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है। 2013 में सांप्रदायिक दंगे देखने वाले शामली जिले में कैराना कस्बा पड़ता है। हुकुम सिंह ने मंगलवार को 63 हिंदू परिवारों की एक और सूची जारी की और दावा किया कि..उन्हें शामली जिले के कांधला कस्बे को छोड़कर जाना पड़ा। वहीं बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने मंगलवार को कैराना मामले में यू-टर्न लेते हुए कहा कि..कैराना से हिंदुओं का पलायन सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है बल्कि कानून व्यवस्था को लेकर परेशान हैं।


शामली के जिला मजिस्ट्रेट सुजीत कुमार ने इलाके से कुछ लोगों के घर छोड़ने के पीछे किसी तरह के सांप्रदायिक और कानून व्यवस्था के कारण की संभावना को खारिज कर दिया है। सुजीत ने कहा कि अब तक हमने 119 परिवारों के सूची की जांच की है। इस सूची में शामिल 10-15 परिवार अब भी कैराना में रहते हैं..और 68 परिवार 10-15 साल पहले इलाके से चले गए थे। वे लोग आर्थिक कारणों के चलते कस्बे से गए। अब तक कानून-व्यवस्था का कोई मामला नहीं पाया है।


कैराना पर राजनीति करने के मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीधे सीधे बीजेपी पर हमल बोलते हुए कहा कि..बीजेपी कैराना को लेकर समाजवादी पार्टी के खिलाफ झूठी राजनीति कर रही है। 2017 में बीजेपी में विधानसभा चुनाव होने है। उससे पहले राजनीतिक पार्टियों को अपनी राजनीति चमकाने के लिए कैराना का मुद्दा मिल गया है। हालांकि विरोधी राजनीतिक पार्टियों की तरह ही कैराना को लेकर खबरें अलग– अलग है। सच्चाई क्या है? तो जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा।

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