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Showing posts from November, 2015

महाकाली की महिमा

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शक्ति की देवी.. आदिशक्ति.. और नवरात्रों में आदिशक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है.. सातवां रूप है महाकाली का। जिनका नाम सुनते है दुष्ट अपना रास्ता बदल लेते है  आ दिशक्ति..दुर्गा..भवानी..चंडिका..महाकाली..और कालरात्रि..वैसे तो मां दुर्गा के अनेक रूप है..लेकिन कालरात्रि सबसे भयानक रूप है। दुर्गा के नौ रुपों में सातवां रुप देवी कालरात्रि का है। इस दिन मां महाकाली की पूजा-अर्चना की जाती है।  महाकाली का विकारल रूप के आगे राक्षस भी थर थर कांपते है। काली का स्वरुप अत्यंत भयानक है..लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी वजह से मां का नाम ' शुभंकारी ' भी है। मां ममता की देवी है। वो अपने भक्तो का हर हाल मे साथ देती है। कोई भी परिस्थिति हो..लेकिन अपने भक्तों को हमेशा दुष्टों से रक्षा करती है। कहते है जब धरती पर असुरों का हाहाकार मचा हुआ था। उस वक्त मां ने आदिशक्ति का रूप धारण करके दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज का विनाश करके देवताओं के प्राणों की रक्षा की थी।  इसके पीछे कहानी मां की शक्ति का प्रमाण देती है। तीनों लोकों में जब हाहाकार मचा था। तब चिंतित होकर सभी ...

मोदीजी..ज़िद छोड़िए

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9 महीन बीत गए..लेकिन दिल्ली के हालात जैसे पहले थे। अब भी वैसे ही है। जनता उन तमाम वादों के भंवर में फंसी हुई है..जो राजनीति पार्टियों ने सत्ता में आने के लिए किए थे। दिल्ली सरकार हो या फिर केंद्र सरकार दोनों को ही जनता ने पूर्ण बहुमत देकर सत्ता का स्वाद चखाया है..लेकिन राजनीतिक के सौदागरों को..शायद जनता की परवाह अब नहीं रही है। दिल्ली में जबसे सरकार बनी है। तबसे लेकर अब तक दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच मतभेद खत्म नहीं हुए है। अब एक बार फिर केंद्र और दिल्ली सरकार आमने सामने है। मामला ताज़ा है..जनता को भी याद है..लेकिन ये राजनीति पुरानी है। वैसे तो अक्सर सीएम केजरीवाल अपने ऊपर उठने वाले सवालों का मुख केंद्र सरकार की ओर मोड़ देते है। दिल्ली में 2 जगहों पर मासूम बच्ची के साथ हैवानियत का खेल खेला जाता है..लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता..न दिल्ली सरकार और न केंद्र सरकार। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने एक बार फिर प्रधानमंत्री को अपने निशाने पर लिया...और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठा दिए। केजरीवाल ने सीएमएस सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि  सीएमएस सर्वे  में चौंक...

सीमांचल का इतिहास

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बिहार का सीमांचल..और इसकी कहानी भी काफी दिलचस्प है। इस कहानी के किस्से भी पुराने है। कहते है कि सीमांचल के वोटर का मन..हवा के रुख की तरह बदलता है..कितनी पार्टीयां आई..कितनी चली गई..लेकिन सीमांचल के वोटरों के मन को नहीं पढ़ पाई। बिहार की जनता का जनादेश सबके सामने है।  बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल का काफी महत्व रहा है...और यहां सभी पार्टीओं ने चुनाव प्रचार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी...लेकिन अगर देखा जाए तो बिहार में सीमांचल अधिक मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र माना जाता है। यहां जनाधिकार पार्टी का काफी दबदाबा माना जाता है..लेकिन पप्पू यादव की पार्टी भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई..तो वहीं AIMIM  के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी तमाम दावे किए..और सीमांचल की 24 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। महज 6 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे..लेकिन लालू-नीतीश की जोड़ी के आगे सुस्त हो गए। सीमांचल की इन 24 सीटों का इतिहास काफी पुराना है...और दिलचस्प भी। कहते है यह सीटें जिस भी पार्टी के पाले में जाती है..तो उसे बिहार विधानसभा चुनाव में काफी फायदा मिलता है..लेकिन यहां द...

तीसरी बार नीतीश सरकार

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सुशासन बाबू..यानि की नीतीश कुमार..नीतीश कुमार ने अपने काम से बिहार की जनता का विश्वास जीता..और बिहार को विकास की राह पर लेकर गए। अगर नीतीश कुमार का इतिहास देखे तो..इस बात के संकेत मिलते है कि बिहार में नीतीश कुमार ने सुशासन बाबू की पहचान बनाई है..और उस पहचान को कायम भी रखा है। नीतीश कुमार का जन्म बिहार के बख्तियारपुर में 1 मार्च 1951 को हुआ था..लेकिन बिहार को विकास की राह पर लेकर जाने वाले नीतीश कुमार ने 10 सालों तक बिहार की कमान संभाली है। साल 2005 से लेकर 2015 तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे..हालांकि बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा था..और हार की जिम्मेदारी लेते हुए 17 मई 2014 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जीतन राम मांझी को बिहार की कमान सौंपी गई..लेकिन मांझी के बयान और बगावती रुख की वजह से उन्हे पद से हटाकर..नीतीश कुमार को फरवरी में 2015 में एक फिर सूबे की कमान दी गई..लेकिन इस बार सबकुछ बदल चुका था। साल 2015 में बिहार में जेडीयू और बीजेपी नहीं..बल्कि जेडीयू और आरजेडी की सरकार ...

सवालों के घेरे में मोदी

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सवा लाख करोड़ का पेकैज। मोदी ने बिहार को विशेष पैकेज देने का एलान किया। यह बात हर बिहार के शख्स को पता होगा...लेकिन बिहार में अब पूरा महौल बदल चुका है।  लोकसभा चुनाव में बिहार में मोदी लहर ने जबरदस्त जीत दर्ज की...लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में नतीजे उलट रहे...लोकसभा का हीरो बिहार विधानसभा चुनाव मे फेल हो गया। मोदी लहर महागठबंधन के आगे परास्त हो गई..और इसी हार की वजह से पीएम मोदी सवालों से घिर गए है...और सवाल उठने लगे है कि क्या पीएम मोदी ने बिहार के लिए जिस पेकैज का एलान किया था। क्या वो पैकेज बिहार को मिलेगा..क्योंकि बिहार की जनता ने मोदी लहर को नकार कर के महागठबंधन पर भरोसा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिहार का चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। वो खुद भी यह जानते थे और इसीलिए बिहार चुनाव का पूरा जिम्मा वो अपने कंधों पर उठाए हुए थे...लेकिन बिहार में बीजेपी की इस करारी हार से सबसे बड़ा नुकसान मोदी को ही हुआ है...और एक बार फिर वो सवालों में घिर गए है। सवाल विरोधियों के साथ अपनों ने भी उठाए है। शिवसेना ने बीजेपी की हार पर जहां चुटकी ली है। वहीं बीजेपी के वर...

बुजुर्गों को नसीहत!

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बिहार में मिली करारी हार को..न तो बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह पचा पा रहे है..और न ही पीएम मोदी। इस हार के जख्म पर पहले बुजुर्गों ने ऐसा बम फोड़ा कि विरोधियों को शाह और मोदी की जोड़ी पर हमला करने का मौका मिल गया...और जुबानी तीर भी खूब छोड़े गए। बुजुर्गों के निशाने पर शाह की कुर्सी थी...तो शाह ने भी इशारों-इशारों में बुजुर्गों को राजनीति छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि नानाजी देशमुख ने राजनीति में एक मिसाल कायम की थी..जो लोग 60 पार हो गए हैं। उन्हें हर हाल में राजनीति छोड़ देनी चाहिए और समाज सेवा के काम में लगना चाहिए। हर एक व्यक्ति को इसका अनुकरण करना चाहिए। अमित शाह ने इशारों-इशारों में बुजुर्गों को सलाह तो दे दी...लेकिन सलाह देने से पहले शाह ने सोचा भी नहीं होगा कि...ये सलाह तूफान का काम करेगी। शाह के बयान पर जैसे ही विवाद बढ़ने लगा..तो पार्टी मुख्यालय की ओर बयान जारी करके इस पूरे मामले पर सफाई दी गई। पार्टी ने कहा कि जाने माने समाजसेवी नानाजी देशमुख के व्यक्तित्व‍ , कृतित्व और सामाजिक दर्शन के बारे में अमित शाह के वक्तव्य में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। शाह...