बुजुर्गों को नसीहत!
बिहार में मिली करारी
हार को..न तो बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह पचा पा रहे है..और न ही पीएम मोदी। इस हार
के जख्म पर पहले बुजुर्गों ने ऐसा बम फोड़ा कि विरोधियों को शाह और मोदी की जोड़ी पर
हमला करने का मौका मिल गया...और जुबानी तीर भी खूब छोड़े गए। बुजुर्गों के निशाने पर
शाह की कुर्सी थी...तो शाह ने भी इशारों-इशारों में बुजुर्गों को राजनीति छोड़ने की
सलाह देते हुए कहा कि नानाजी देशमुख ने राजनीति में एक मिसाल कायम की थी..जो लोग
60 पार हो गए हैं। उन्हें हर हाल में राजनीति छोड़ देनी चाहिए और समाज सेवा के काम
में लगना चाहिए। हर एक व्यक्ति को इसका अनुकरण करना चाहिए।
अमित शाह ने इशारों-इशारों में बुजुर्गों को सलाह तो दे दी...लेकिन सलाह देने से पहले
शाह ने सोचा भी नहीं होगा कि...ये सलाह तूफान का काम करेगी। शाह के बयान पर जैसे ही
विवाद बढ़ने लगा..तो पार्टी मुख्यालय की ओर बयान जारी करके इस पूरे मामले पर सफाई दी
गई। पार्टी ने कहा कि जाने माने समाजसेवी नानाजी देशमुख के व्यक्तित्व, कृतित्व और सामाजिक दर्शन के बारे में अमित शाह के वक्तव्य में तथ्यों को तोड़-मरोड़
कर पेश किया जा रहा है। शाह ने सिर्फ नानाजी के व्यक्तित्व की चर्चा की थी। नानाजी
ने आजीवन समाज की सेवा की और जीवन के अंतिम समय वह चित्रकूट में रहकर समाज के अलग-अलग
वर्गों से जुड़े रहे। शाह के इस वक्तव्य को गलत संदर्भ में पेश करना अनुचित है।
हालांकि बाद में खुद
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट करके अपने बयान पर सफाई दी...और कहा कि उन्होंने
ऐसी कोई बात कभी नहीं कही। चाहें अब बीजेपी अध्यक्ष अब कितनी भी ना नुकुर क्यों न करें।
शाह का इशारा किस ओर था।
यह तो हर कोई जानता है..कहते है ना कमान से निकला हुआ तीर
और जुबान से निकले बोल कभी वापस नहीं होते...तो शाह जी आपको अब हमारी एक सलाह है। बुजुर्गों
को मनाने का दौर शुरू कर दे। वरना आपकी कुर्सीं कभी भी जा सकती है।
यह तो हर कोई जानता है..कहते है ना कमान से निकला हुआ तीर
और जुबान से निकले बोल कभी वापस नहीं होते...तो शाह जी आपको अब हमारी एक सलाह है। बुजुर्गों
को मनाने का दौर शुरू कर दे। वरना आपकी कुर्सीं कभी भी जा सकती है।
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