मोदीजी..ज़िद छोड़िए


9 महीन बीत गए..लेकिन दिल्ली के हालात जैसे पहले थे। अब भी वैसे ही है। जनता उन तमाम वादों के भंवर में फंसी हुई है..जो राजनीति पार्टियों ने सत्ता में आने के लिए किए थे। दिल्ली सरकार हो या फिर केंद्र सरकार दोनों को ही जनता ने पूर्ण बहुमत देकर सत्ता का स्वाद चखाया है..लेकिन राजनीतिक के सौदागरों को..शायद जनता की परवाह अब नहीं रही है। दिल्ली में जबसे सरकार बनी है। तबसे लेकर अब तक दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच मतभेद खत्म नहीं हुए है। अब एक बार फिर केंद्र और दिल्ली सरकार आमने सामने है।


मामला ताज़ा है..जनता को भी याद है..लेकिन ये राजनीति पुरानी है। वैसे तो अक्सर सीएम केजरीवाल अपने ऊपर उठने वाले सवालों का मुख केंद्र सरकार की ओर मोड़ देते है। दिल्ली में 2 जगहों पर मासूम बच्ची के साथ हैवानियत का खेल खेला जाता है..लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता..न दिल्ली सरकार और न केंद्र सरकार। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने एक बार फिर प्रधानमंत्री को अपने निशाने पर लिया...और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठा दिए।


केजरीवाल ने सीएमएस सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि सीएमएस सर्वे में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पहला ये कि दिल्ली पुलिस (मोदीजी और उनके एलजी के अधीन) सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। दूसरा ये कि दिल्ली में करप्शन कम हुआ है। यह आप सरकार की नीयत और प्रशासनिक काबिलियत को बयां करती है। मोदीजी, अब ज़िद छोड़िये, हमारे साथ मिलकर काम कीजिये..ACB और पुलिस दिल्ली सरकार को दीजिये। हम आपको एक साल में ठीक करके दिखाएंगे


मोदी जी ज़िद छोड़िए..केजरीवाल का ये तंज अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है..और केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार हो जाती है। अगर दिल्ली में बढ़ते अपराध के लिए सीएम साहब मोदी सरकार और दिल्ली को जिम्मेदार मनाने है तो..इससे सीएम केजरीवाल की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती है..क्योंकि दिल्ली की सत्ता में आने से पहले दिल्ली की जनता से केजरीवाल ने करीब 70 वादें किए थे। 70 वादों में महिला सुरक्षा का भी एक वादा था..जिसका अब कोई आधार नहीं दिखता।



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