तीसरी बार नीतीश सरकार

सुशासन बाबू..यानि की नीतीश कुमार..नीतीश कुमार ने अपने काम से बिहार की जनता का विश्वास जीता..और बिहार को विकास की राह पर लेकर गए। अगर नीतीश कुमार का इतिहास देखे तो..इस बात के संकेत मिलते है कि बिहार में नीतीश कुमार ने सुशासन बाबू की पहचान बनाई है..और उस पहचान को कायम भी रखा है।


नीतीश कुमार का जन्म बिहार के बख्तियारपुर में 1 मार्च 1951 को हुआ था..लेकिन बिहार को विकास की राह पर लेकर जाने वाले नीतीश कुमार ने 10 सालों तक बिहार की कमान संभाली है। साल 2005 से लेकर 2015 तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे..हालांकि बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा था..और हार की जिम्मेदारी लेते हुए 17 मई 2014 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जीतन राम मांझी को बिहार की कमान सौंपी गई..लेकिन मांझी के बयान और बगावती रुख की वजह से उन्हे पद से हटाकर..नीतीश कुमार को फरवरी में 2015 में एक फिर सूबे की कमान दी गई..लेकिन इस बार सबकुछ बदल चुका था।



साल 2015 में बिहार में जेडीयू और बीजेपी नहीं..बल्कि जेडीयू और आरजेडी की सरकार बनी थी। नीतीश कुमार पहली बार बिहार विधानसभा के लिए 1985 में चुने गए थे..और 1987 में वो युवा लोकदल के अध्यक्ष बने। साल 1989 में उन्हें बिहार में जनता दल का सचिव चुना गया..और उसी वर्ष वे नौंवी लोकसभा के सदस्य भी चुने गए थे। साल 2001 से मई 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नीतीश कुमार केंद्रीय कैबिनेट में रेल मंत्री रहे..साल 2010 में जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार बनी। 26 नवंबर 2010 को पहली बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रूप में शपथ ली..और अब 2015 में महागठबंधन ने एनडीए को हरा दिया है..लेकिन इस बार नीतीश के साथी बदले हुए है..क्योंकि नरेंद्र मोदी को जब पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तो..करीब 17 सालों के रिश्ते में खटास आ गई।



इस खटास की वजह से 17 सालों का ये गठबंधन टूट गया। जिसमें करीब ढाई साल का ऐसा समय था। जब  नीतीश कुमार ने अपने दम पर बिहार की कमान संभाली। बिहार का विकास किया। बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद 2014 में दुश्मन दोस्त बन गए। और दोस्त दुश्मन बन गए..लेकिन इस बार नीतीश कुमार तीसरी बार सूबे की कमान संभालने जा रहे है। इस जीत की भागीदार है। लालू-नीतीश की जोड़ी..और इस जोड़ी ने साबित कर दिया है। बिहार में लालू-नीतीश की जोड़ी के आगे मोदी लहर कुछ नहीं है।





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