राजन पर राजनीति
मोदी सरकार के
सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई है। यह मुश्किल रघुराम के राम राम पर शुरू हुई है।
रघुराम राजन से साफ इनकार कर दिया है कि..वो केंद्रीय बैंक के प्रमुख के तौर पर
दूसरा कार्यकाल नहीं चाहते हैं। “मुद्रास्फीति
नियंत्रण, बैंकों बही-खातों की सफाई का काम पूरा नहीं हुआ है,
सरकार के साथ विचार-विमर्श और परामर्श के बाद कार्यकाल पूरा होने पर जाने का फैसला
किया है, वह देश की सेवा के लिए हमेशा उपलब्ध होंगे। मेरे उत्तराधिकारी रिजर्व
बैंक को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे”।
हालांकि अरुण
जेटली ने राजन के फैसले का स्वागत किया है। “रघुराम राजन अपने फैसले के लिए स्वतंत्र हैं..और सरकार के
साथ उनका बेहतरीन तालमेल रहा..नए आरबीआई गवर्नर के नाम का जल्द ऐलान किया जाएगा”।
रघुराम राजन को
पिछली यूपीए सरकार ने सितंबर 2013 में
रिजर्व बैंक का गवर्नर नियुक्त किया था। अब राजन का कार्यकाल 4 सितंबर को समाप्त
हो रहा है..हालांकि राजन ने रिजर्व बैंक के कर्मचारियों को एक संदेश भी जारी किया
है..जिसमें लिखा था कि.. “उचित सोच-विचार और सरकार के साथ
परामर्श के बाद मैं आपके साथ यह साझा करना चाहता हूं कि मैं चार सिंतबर 2016
को गवर्नर के तौर पर कार्यकाल समाप्त होने पर शैक्षिक क्षेत्र में वापस
लौट जाऊंगा”।
दोबारा कार्यकाल
संभालने से मना करने के बाद से राजन को लेकर विपक्ष बिफर गया है..और मोदी सरकार पर
एक के बाद एक तंज कस रहा है..कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके
कहा..“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को
सब कुछ आता है, उन्हें रघुराम राजन जैसे विशेषज्ञों की कोई जरूरत नहीं है”। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा..“रघुराम राजन पिछले एक साल से बीजेपी नेताओं के निशाने पर रहे हैं”। उधर, सीनियर कांग्रेस लीडर पी. चिदंबरम ने एक बार फिर कहा है कि.. “यह सरकार,
डॉ. राजन के लायक नहीं है। सरकार ने एक मशहूर एकेडमिक और इकोनॉमिस्ट के खिलाफ बेसलेस आरोपों
और तुच्छ हमलों का एक सुनियोजित कैम्पेन चलाया”।
पीएम मोदी पर तंज कसने के साथ राहुल गांधी और कांग्रेस ने
राजन के योगदान की सराहना भी की है। “राघुराम राजन जैसे लोग देश का
गौरव बढ़ाते हैं, डॉ. राजन, कठिन समय में अर्थव्यवस्था को
संभालने के लिए आपको धन्यवाद, आप जैसे लोग भारत को महान बनाते हैं”।
महीनों से जारी अटकलबाजियों पर रघुराम राजन ने विराम लगा
दिया है। वो दोबारा गवर्नर के कार्यकाल को संभालने के इच्छुक नहीं है। इसकी बड़ी
वजह बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी हो सकते है..जो लगातार राजन को गवर्नर पद से
हटाने की मांग कर रहे थे। सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में उनपर उनकी नीतियों को लेकर लगातार हमले करते हुए कहा था कि “ब्याज दर के मामले में राजन की सख्त नीतियों की वजह से
अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है..राजन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के जाने माने
अर्थशास्त्री रहे हैं और उन्होंने 2008 के वैश्विक वित्तीय
संकट के बारे में काफी पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी”।
जाहिर है कि रघुराम राजन के बाद जिस राजनीति ने
जन्म ले लिया है..वो बीजेपी पर भारी पड़ने वाली है..क्योंकि उद्योग जगत की कई नामचीन हस्तियों ने आरबीआई गवर्नर के तौर पर राजन के काम
की जमकर तारीफ़ की..लेकिन उनका जाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए झटका हो सकता
है...ऐसे में विपक्ष के हमले भी लगातार बढ़ते जा रहे है..जिनसे पार पाना केंद्र
सरकार के लिए मुश्किल हो गया है..
मेरा नाम राजन है..
- ‘मेरा नाम राजन है और मैं जो करता हूं वो करता हूं’
- मजबूत सरकारें हमेशा सही दिशा में नहीं बढ़ेंगी- रघुराम राजन
- भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत ‘अंधों में काने राजा’ जैसी- रघुराम राजन
- मुझे हटा दो, पर आरबीआई ही तय करेगा ब्याज दरें- रघुराम राजन
- ‘निजी हमलों’ का जवाब नहीं देंगे और ‘इस तरह के बुनियादी तौर पर गलत और निराधार’ आरोपों को वैधता नहीं प्रदान करेंगे- रघुराम राजन
- ‘भारतीयता, अपने देश के प्रति प्रेम एक जटिल विषय है। अपने देश के प्रति सम्मान दिखाने का हर व्यक्ति का अपना-अपना अलग तरीका है। मेरी सास कहती हैं कि कर्मयोगी अभी सफर बाकी है- अपना काम करो- रघुराम राजन
- सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान विचारों के वातावरण में सुधार के लिए जरूरी हैं और शारीरिक नुकसान या किसी खास समुदाय के लिए वाचनिक तिरस्कार की अनुमति नहीं होनी चाहिए- रघुराम राजन
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