कब तक दोहरा चरित्र?
बड़ी-बड़ी बातें, ढेरी सारी नसीहत, ऐसा लगता है कि
हमारे देश में लोगों की मानसिकता ऐसी बन गई है। अगर कोई सड़का हादसा हो जाए तो
जमकर सरकार को कोसना है.. सरकार की नाकामियों पर चर्चा करना है.. सवाल पूछने है..
आखिर इन हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जाता है? आखिर कब तक लोग
अपनी जान गांवाते रहेंगे? क्या सरकार मूकदर्शक बनकर सबकुछ यूंही देखती
रहेगी? और जब इन सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार ने कठोर कदम उठाया है तो
सरकार को जमकर कोसा जा रहा है। आखिर इतने भारी भरकम चालान क्यों
काटे जा रहे है? अरे भई कहीं तो आप लोग स्टेंड करो.. कभी तो अपनी
बात पर कायम रहो.. यूं हीं कब तक ऐसा करते रहोगे।
सच बताओं तो कभी-कभी मुझे यह दोगलापन देखकर हंसीं
आती है.. तो कभी-कभी गुस्सा भी.. और सोचने पर मजबूर हो जाती हूं। क्या हमारे देश
के लोग सरकार को अपने हाथों की कठपुतली बनाना चाहते है? शायद मेरी यह बात
सुनकर किसी को बहुत गुस्सा आए.. लेकिन गुस्सा मत कीजिए.. थोड़ा पानी पीओ.. और दिमाग
ठंडा करो... देखिए मैं यहां सरकार का समर्थन नहीं कर रहीं हूं.. लेकिन मैं सिर्फ
यह कहना चाहती हूं... आखिर यह दोहरा चरित्र कब तक हमारे देश में कायम रहेगा? मैं खुद एक एंकर
हूं सड़क हादसों को लेकर मैंने बहुत डिबेट किये है.. सड़क हादसों में होती मौतों
को लेकर सरकार से भी सवाल पूछे है... लेकिन मेरा अब उन लोगों से सवाल है.. जो लोग
सरकार के कठोर फैसलों की कड़ी निंदा कर रहे है.. सरकार को जमकर कोस रहे है।
मेरा सीधा सा एक सवाल है उन लोगों से जो सरकार
चालान की राशि बढ़ाने पर सरकार को कोस रहे है। क्या सरकार को हर बात के लिए कोसना
सहीं है? हम सड़क हादसों को रोकने के लिए विदेशों जैसे नियम चाहते है.. सड़क हादसों में कमी आए ये तो चाहते है.. लेकिन जब
अपने देश की सरकार सड़क हादसों को रोकने के लिए कठोर कदम उठाती है.. चालान की राशि
में बदलाव करती है.. तो न आब देखों न ताब बस सरकार पर टूट पड़ो.. क्योंकि सरकार ने
बहुत बड़ा अपराध किया है.. खैर छोड़िए.. ये तो बस यूं ही चलता रहेगा.. कोई ट्रैफिक
पुलिस वालों को नसीहत देगा कि आप रिश्वत लीजिए ताकि किसी के घर का गुजरा चल सके...
लेकिन वो लोग यह भूल जाते है कि.. सरकार को जब चुना जा रहा था तो भ्रष्टाचार का
मुद्दा.. पुलिस वाले रिश्वत न खाए.. पारदर्शिता हो.. करप्ट अफसरों को निलंबित किया
जाए.. यह सारे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए थे। और सरकार का नारा भी यहीं था ‘न खाउंगा और न खाने
दूंगा’
चार लोगों के बीच सरकार के फैसलों पर पंचायत करना..
सरकार की नीतियों को कठघरें में खड़ा करना आसान है.. चलिए छोड़िए यह सिलसिला तो
यूं ही चलता रहेगा.. नोकझोक चलती रहेगी.. यह इतनी जल्दी थमना वाला नहीं है.. वैसे 1
सितंबर
से नए ट्रैफिक नियम लागू हो गए हैं। इनके उल्लंघन करने वालों पर दोहरी मार पड़ेगी..
पहले के मुकाबले अगर देखा जाए तो अब अधिक जुर्माना देना पड़ेगा.. साथ ही चालान का
भुगतान करने के लिए अदालत के चक्कर भी लगाने पड़ जाएंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने भले ही
यातायात के नियमों का पालन कराने के लिए एक सितंबर से बढ़ी दरों का जुर्माना लागू
कर दिया है, लेकिन अभी यूपी में यह पुरानी दरों से ही
वसूला जा रहा है.. अधिसूचना न जारी होने के कारण अभी तक ट्रैफिक और आरटीओ दोनों को
पुरानी दरों से ही जुर्माना की पर्ची काटनी पड़ रही है... हालांकि विभागीय लोग नई
दरों को लागू करने के लिए नियम तोड़ने वालों से अभी से ही दबाव बना रहे हैं. पर
उनके सर्वर में नए चार्ज न होने के कारण उनके हाथ खाली हैं.
बदले हुए नियम
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नशे में वाहन चलाने पर पहले 2000 रुपये जुर्माना था, अब 10 हजार रुपये देना होगा।
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रेड लाइट जंप से लेकर बगैर इंडिकेटर दिए
मुड़ने जैसे कई कानून तोड़ने पर पर 100 रुपये का
जुर्माना लिया जाता था, अब 500 रुपये वसूला
जाएगा।
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बगैर लाइसेंस वाहन चलाने पर पहले 500 का चालान था, अब 5000 रुपये देने पड़ेंगे।
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अयोग्यता के बाद ड्राइविंग करने पर पहले 500 रुपये जुर्माना था और अब 10 हजार देना होगा।
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सड़क पर बेवजह दौड़ लगाकर वाहन चलाने पर
पहले 500 रुपये और अब 5000 रुपये जुर्माना देना होगा।
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ओवर स्पीडिंग पर पहले 400 और अब 1000 से 2000 रुपये जुर्माना कर दिया गया है।
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मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाने पर 1000 के बजाय 5000 और सीट बेल्ट
नहीं लगाने पर 100 के बजाय 1000 जुर्माना देना
होगा।
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दुपहिया पर तीन लोग चलने पर पहले 100 और अब 2000 रुपये
जुर्माना कर दिया गया है। वहीं, तीन माह के
लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा।
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बिना हेल्मेट पहले 100 रुपये और अब 1000 रुपये और तीन
माह के लिए लाइसेंस सस्पेंड।
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बिना इंश्योरेंस के ड्राइविंग पहले 1000 रुपये अब 2000 जुर्माना कर
दिया गया है।
देश में यातायात सुरक्षा के लिए मोटर व्हीकल संशोधन एक्ट 2019 लागू हो गया है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम के 63 नए नियम लागू हो गए हैं। इस बीच मध्य प्रदेश, राजस्थान और बंगाल में सरकारों ने बागी रुख अपना लिया है। तीनों राज्यो में नए ट्रैफिक नियम लागू करने से इनकार कर दिया है... चलिए देखते है अब इन तीन राज्यों में भी और राज्यों की तरह ट्रैफिक नियम लागू होंगे या नहीं।

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