मोदी है तो मुमकिन है


मोदी सरकार नहीं होती तो शायद 72 साल का इंतजार खत्म न होता... जम्मू कश्मीर में सहीं मायनों में भारत का अंग न बन पाता... मोदी सरकार का 'एक राष्ट्र, एक विधान और एक निशान' एजेंडा पूरा न हो पाता.. 72 साल अब जम्मू कश्मीर को आजादी मिली है... साथ ही लद्दाख भी आजाद हो गया है.. और यह कारनामा मोदी सरकार ने कर दिखाया है.. इसलिए अब सोशल मीडिया पर बाढ़ आ गई है कि मोदी है तो मुमकिन है.. 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को लेकर जो ऐतिहासिक फैसला लिया... जम्मू कश्मीर में धारा 370 को खत्म करने के लिए राज्यसभा में सिफारिश की। देखा जाए तो रविवार की रात से ही कयास तेज हो गए थे कि जम्मू कश्मीर में कुछ बड़ा होने जा रहा है.. जब जम्मू कश्मीर में धारा 144 लगा दी गई... इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई... जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियो को नजरबंद कर दिया गया... तो सारी अटकलों पर लोगों का ज्यादा ध्यान खिंचने लगा.. और सुबह-सुबह होते पूरे देश की जिज्ञासा इस बात पर जा टिकी कि आखिर मोदी सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।


पहले पीएम आवास पर बैठक हुई और बैठक खत्म होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे साफ होने लगी... जब राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर को लेकर संकल्प बिल पेश किया तो बिल्कुल साफ हो चुका था कि अब मोदी सरकार का सीधा वार अनुच्छेद 370 और 35 ए पर है। वहीं हुआ जिसका अंदेशा था.. राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह के बयान से पहले गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में तीन तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद हैं, वहां युद्ध जैसे हालात हैं पहले उस पर चर्चा होनी चाहिए इस पर गृहमंत्री ने कहा- हर मुद्दे पर जवाब देने को तैयार हूं बिल पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ''जिस दिन से राष्ट्रपति द्वारा इस गैजेट नोटिफिकेशन को स्वीकार किया जाएगा, उस दिन से संविधान के अनुच्छेद 370 (1) के अलावा और कोई भी खंड लागू नहीं होंगे.. हम जो चारों संकल्प और बिल लेकर आए हैं, वह कश्मीर मुद्दे पर ही है.. संकल्प प्रस्तुत करता हूं.. अनुच्छेद 370 (1) के अलावा सभी खंड राष्ट्रपति के अनुमोदन के अलावा खत्म होंगे।'' शाह ने कहा कि राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे यानी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की सिफारिश कर दी है।


गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में नेता विपक्ष गुलामनबी आज़ाद को चुनौती देते हुए कहा कि... संविधान की जिस धारा के तहत चाहें बहस कर लें... लेकिन अनुच्छेद 370 को एक सेकंड भी रहने का हक नहीं.. 370 अस्थाई है और इसने हमेशा जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बनने से रोका है। गृहमंत्री सिराफिश के साथ ही धारा 370 का खत्म होना तय हो गया.. अब जम्मू कश्मीर को मिलने वाला विशेष राज्य दर्ज खत्म हो गया.. जम्मू कश्मीर को लेकर मोदी सरकार ने 3 बड़े फैसले लिए... पहला फैसला- जम्मू कश्मीर अब राज्य नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश बन गया है.. दूसरा बड़ा फैसला लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करना और तीसरा बड़ा फैसला लद्दाख को नया राज्य बनाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाना.. कुल मिलाकर कहा जाए तो अब जम्मू कश्मीर पर सीधा-सीधा केंद्र का कंट्रोल रहेगा। धारा 370 पर सरकार के प्रस्ताव के बाद पीडीपी के राज्यसभा सांसद नजीर अहमद और एमएम फैयाज ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया.. दोनों के ओर से संविधान फाड़ने की कोशिश करने के बाद चेयरमैन ने दोनों सांसदों को सदन से बाहर जाने के लिए कहा.. एमएम फैयाज ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए अपना कुर्ता फाड़ लिया... मोदी सरकार के फैसले के बाद जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती का बयान सामने आया है... महबूबा मुफ्ती ने इसे भारतयी लोकतंत्र का काला दिन करार दिया है..


जहां एक तरफ मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर पीडीपी विरोध कर रही है तो वहीं आरएसएस प्रमुख सर संघचालक मोहन भागवत ने धारा 370 पर मोदी सरकार के फैसले पर खुशी जाहिर की.. और खुशी जाहिर करते हुए कहा कि संघ सरकार के इस कदम का स्वागत करता हूं.. इस बीच मोदी सरकार को जम्मू कश्मीर पर अपने सहयोगी पार्टी जेडीयू से झटका लगा है.. जेडीयू की तरफ से कहा गया कि हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नान्डिस की परंपरा को आगे ले जा रहे रहे हैं... इसलिए हमारी पार्टी राज्यसभा में पेश किए गए बिल का समर्थन नहीं कर रही है.. हमारी सोच अलग है.. हम चाहते हैं कि आर्टिकल 370 ना हटाया जाए चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी ने केंद्र सरकार का समर्थन किया है... आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ''अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले का तेलगू देशम पार्टी समर्थन करती है.. मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों की शांति और सदभाव की कामना करता हूं।''


मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का बीएसपी, टीडीपी ने समर्थन किया है.. वहीं एआईएडीएमके ने सरकार के इस कदम की सराहना की है.. और इसके समर्थन में अपने विचार व्‍यक्‍त किए हैं... उधर  बीजेडी सांसद प्रसन्‍ना आचार्य ने कहा कि.. सही मायनों जम्‍मू-कश्‍मीर आज भारत को अंग हो गया.. मेरी पार्टी सरकार के इस कदम का समर्थन करती है.. वहीं विरोध में जेडीयू, कांग्रेस और पीडीपी लगातार अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे है... सूत्रों के मुताबिक सरकार के फैसले के बाद केंद्रीय गृह सचिव कश्मीर जाएंगे.. वहां पर केंद्र शासित प्रदेश का स्वरूप कैसा हो इस पर अधिकारियों के साथ बैठक करेगा.. पुलिस और प्रशासन का खाका नए सिरे से तय किया जाएगा, सुरक्षा की भी समीक्षा की जाएगी.. पीडीपी चाहें कितनी भी बार इस ऐतिहासिक फैसले को लोकतंत्र की हत्या क्यों न कहें लेकिन विपक्ष चाहें कितना भी विरोध क्यों न प्रकट करें.. लेकिन सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के इस फैसले की जमकर तारीफ की जा रही है.. मोदी सरकार को बधाई दी जा रही है.. सड़कों पर जश्न मनाया जा रहा है.. मिठाईया बांटी जा रही है.. क्योंकि अब सहीं मायनों में कश्मीर भार का अंग बन गया है... कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तिरंगा ही लहराएगा।


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