सफाई पर ‘कचरा’ राजनीति छाई

दिल्ली के दिल में कूड़ा फैलाने के लिए कौन जिम्मेदार...एमसीडी या फिर केजरीवाल सरकार। एमसीडी की कर्मचारियों को तीन महीने से सैलरी न मिलने की बात कह रही है..तो वहीं आप अपनी बेबसी का राग अलाप रही है..एमसीडी की परेशानी और आप की बेबसी जगजाहिर है..लेकिन बीजेपी और आप की खींचतान की कीमत चुका रही है जनता...अगर देखा जाए तो दिल्ली में यूं तो कई सरकारें हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, एमसीडी की अलग प्रशासनिक व्यवस्था, एनडीएमसी, डीडीए और तमाम देशों के दूतावास। एक-दूसरे से पूरा टकराव। हर किसी का किसी के काम में थोड़ा बहुत दखल। स्वतंत्र कोई भी नहीं। दिल्ली सरकार भी केंद्र सरकार के अधीन है..लेकिन अधिकार क्षेत्र को लेकर टकराहट। बजट को लेकर निर्भरता तो पैसों की मांग को लेकर बवाल। राज्य सरकार केंद्र सरकार से पैसों की मांग कर रही है..तो एमसीडी राज्य सरकार से।



एमसीडी के बजट को लेकर राज्य सरकार से खींचतान चल रही है। एमसीडी का कहना है कि उसके पास अस्थाई कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए धन नहीं है। इसकी वजह से 3 महीने से एमसीडी के अस्थाई कर्मियों को तनख्वाह नहीं मिली है। वहीं राज्य सरकार भी पीछे नहीं है..वो अपनी बेबसी की दुहाई देते हुए कह रही है कि उसे केंद्र से कम पैसे मिले हैं, वो एमसीडी की मांगों को पूरा नहीं कर सकती एमसीडी-राज्य सरकार के इस खींचतान के बाद एमसीडी कर्मी सड़कों पर उतर आए, और जमकर प्रदर्शन किया। सफाई व्यवस्था चरमरा चुकी है, तमाम अन्य काम रुक गए हैं। सफाई कर्मचारियों ने दिल्ली की सड़कों पर कूड़ा कचरा बिखेर दिया है। हर तरफ गंदगी का आलम है।



इस समय उत्तरी और पूरी दिल्ली एमसीडी धन की कमी से बुरी तरह जूझ रही हैं। यहां तक कि उनके पास अपने कर्मचारियों को भी तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं है। पूरी दिल्ली एमसीडी 600 करोड़ रुपए की मदद राज्य सरकार से मांग रही है, जो कर्ज के रूप में भी हो सकता है। ताकि वो अपनी वित्तीय स्थिति सही कर सके। वहीं उत्तरी दिल्ली एमसीडी की हालत भी खराब है।
                      


उत्तरी दिल्ली एमसीडी के मेयर योगेंदर चंदोलिया ने बताया कि दोनों मेयरों के साथ हमने सीएम अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी..जिसमें उन्होंने केंद्रीय करों में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की सिफारिशों के मुताबिक धन की मांग की। हमने जब लोन के बारे में सीएम अरविंद केजरीवाल से बात की, तो उन्होंने हमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय जाने की सलाह दे दी वहीं दक्षिणी दिल्ली एमसीडी के मेयर खुशी राम ने बताया कि दक्षिणी दिल्ली एमसीडी के पास खुद की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी धन है। लेकिन अगर वो सभी अस्थाई कर्माचारियों को स्थाई करते हैं, तो इसके लिए काफी धन की जरुरत होगी। उन्होंने सरकार से ज्यादा कुछ नहीं मांगा, वे तो बस केंद्रीय करों से मिले एमसीडी के हिस्से के धन की मांग के लिए गए थे, लेकिन सीएम ने दिल्ली सरकार के पास संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए मदद से मना कर दिया पूर्वी दिल्ली की मेयर मीनाक्षी कहती है कि एमसीडी को कम से कम 1000 करोड़ रुपए की जरुरत है। उन्होंने 28 मार्च को इमरजेंसी फंड से पैसे निकालकर कर्मचारियों को तनख्वाह दी है। अभी का तो काम चल गया, लेकिन आगे का क्या होगा?”



जहां एक ओर पीएम मोदी स्वच्छ भारत अभियान की बात करते है..वहीं एमसीडी कर्मचारियों को 3 महीने से वेतन न मिलने से दिल्ली के दिल कूड़े का अंबार लग गया है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सच तो यह है कि दिल्ली सरकार इस पूरे मसले से अपना पीछा छुड़ाने में लगी है और यह राजनीतिक खींचतान भर है। आखिरकार, शहर में प्रशासन की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनकी सरकार की होती है।' उन्होंने कहा, 'आप के नेतृत्व वाली सरकार की जवाबदेही केवल पानी और बिजली मुफ्त करना ही नहीं है, बल्कि सड़क और सफाई जैसे नागरिक मसले की जिम्मेदारी भी उनकी ही बनती है। अगर नगर निगम सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं तो यह सरकार का दायित्व है कि वह उनके साथ बात कर संकट का समाधान निकाले



मौजूदा समय में राज्य सरकार को 4,350 करोड़ का घाटा। दिल्ली सरकार ने लेखानुदान पेश करते हुए वित्तीय स्थिति को सामने रखा है। जिसमें 4,350 करोड़ का घाटा दिखाया गया है। दिल्ली सरकार का कहना है कि रेवेन्यू कलेक्शन के मुद्दे पर वो 4,350 करोड़ रुपए पीछे है। जबकि सरकार को बिजली-पानी जैसी जरूरतों पर सब्सिडी के लिए उसे 1,800 करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। ऐसे में एमसीडी की जरुरतों को सरकार किस तरह पूरा करती है, ये देखने वाली बात होगी। राज्य सरकार पूरा करती है या फिर केंद्र आगे बढ़कर मदद करती है..एमसीडी को तो मदद का इंतजार है..और कर्मचारियों को वेतन का जिससे उनके घर का गुजारा चल सके।


Comments

Popular posts from this blog

खौफ़नाक मंज़र

दर्दनाक मौत

भारत माता पर विवाद