गले पड़ी 'मुफ्ती मुसीबत'

मुफ्ती आए और मुसीबत लाए..प्रधानमंत्री मन ही मन सोच रहे होंगे..ये क्या हो रहा है..ऐसा क्यों हो रहा है..जिसे दोस्त समझा था..अब वहीं दुश्मनी निभाने पर अड़ा हुआ है। काफी मशक्कत के बाद जम्मू कश्मीर की आवाम को सरकार मिली। घाटी में पीडीपी-बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शपथग्रहण समारोह में पहुंचे..और गले लगाकर जम्मू कश्मीर के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद को बधाई दी..लेकिन पीएम मोदी अब उस दिन कोस रहे होंगे..जिस दिन उन्होंने जम्मू कश्मीर में साझा सरकार बनाने की बात पर सहमति दी थी।


प्रधानमंत्री जी शायद आप भूल गए कि एक म्यान में कभी 2 तलवारें नहीं रहा करती। जम्मू कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी दोनों एक जैसी है। एक-दूसरे को खुद से ज्यादा प्रबल दिखाने की होड़ में रहती है। दोनों में घाटी में मिलकर सरकार तो बना ली..लेकिन दोनों के कामकाज के तौर तरीके, मुद्दे, सोच बिल्कुल अलग है। अब ऐसे में आपका विकास का एजेंडा पर ग्रहण लगने लगा है। जो सपना घाटी की आवाम को दिखाया था..अब वो पूरा होगा या फिर उस पर विवादित बयानों, विवादित फैसलों का पलिंदा लग जाएगा। 


मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1 मार्च को जम्मू कश्मीर के सीएम के तौर पर शपथ ली। सीएम मुफ्ती साहब घाटी के सीएम बनने की खुशी में ये भी भूल गए कि..वो पाकिस्तान में नहीं हिंदुस्तान में है। शपथ लेने के तुंरत बाद मुफ्ती साहब ने विवादित बयान दे दिया। मुफ्ती ने कहा कि पाकिस्तान, हुर्रियत और आतंकियों ने चुनाव के लिए उचित महौल बनाया, जिससे चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सका”..हालांकि मुफ्ती सरकार के इस बयान ने जम्मू कश्मीर की सियासी राजनीति में तूफान लाकर खड़ा कर दिया था। सड़क से लेकर संसद तक मुफ्ती के बयान पर हंगामा हुआ..ये तो कुछ नहीं था जो उन्होंने शपथ लेने के 7 वें दिन जो फैसला लिया..उससे हर हिंदुस्तानी का दिल सहम गया होगा।


क्या ऐसा बयान राज्य के सीएम को शोभा देता है। क्या ऐसे फैसले देश के हित में हो सकते है। चलो दिन गया बात गई..लेकिन हंगामा अभी तक जारी है। 8 मार्च को सीएम मुफ्ती ने मुस्लिम लीग के नेता मसरत आलम को रिहा कर दिया..जिस पर दर्जनों मुकदमें दर्ज है। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई के बाद सियासी तूफान आ गया। हर तरह इस फैसले की आलोचना होने लगी। बीजेपी ने भी इसका जमकर विरोध किया। कांग्रेस ने भी इस मसले पर पीएम मोदी से जवाब मांगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस भेजा दिया। केंद्र ने कट्टरपंथी नेता मसरत आलम को रिहा किए जाने पर रिपोर्ट मांगी..और मुफ्ती सरकार ने भी रिपोर्ट सौंपी।



संसद में मसरत आलम की रिहाई का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। कांग्रेस ने कड़े तेवर दिखाते हुए मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया। इस मसले पर गृहमंत्री और प्रधानमंत्री के जवाब की मांग की। गृहमंत्री के जवाब देने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ..फिर पीएम मोदी ने इस मसले पर जवाब दिया..लेकिन विपक्ष फिर भी इससे संतुष्ट नहीं हुआ..और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने पीएम के जवाब को घड़याली आंसू करार दिया..



मसरत आलम की रिहाई को लेकर बीजेपी और पीडीपी में तल्खी बढ़ती गई है..वहीं बीजेपी के कड़े लहजे में मुफ्ती सरकार को चेतावनी दी। बीजेपी ने कहा कि अगर मुफ्ती सरकार बिना सहमति के कोई भी फैसला लेती है..या किसी की भी रिहाई करती है.. तो बीजेपी पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लेगी..लेकिन एक वक्त था जब पीडीपी ने इस फैसले को सामूहिक बताया था..वहीं ये भी कहा जा रहा है कि मसरत की रिहाई का फैसला तो राज्यपाल शासन के दौरान हो गया था। मुफ्ती सरकार ने तो इसे औपचारिक रूप दिया है। 


जहां एक और भारत में मसरत की रिहाई को लेकर घमासना मचा हुआ..वहीं दूसरी ओर मसरत आलम भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है। मुफ्ती सरकार के सरकार के इस फैसले से हम भी खुश नहीं है। शायद आप भी नहीं..क्योंकि ऐसे फैसले देश की नींव को कमजोर करते है..कहते है कमजोर नींव होगी..तो मकान को ढहने में वक्त नहीं लगता है। 


Comments

Popular posts from this blog

खौफ़नाक मंज़र

दर्दनाक मौत

भारत माता पर विवाद