रोक सको तो रोक लो...

आपने आज तक ग्रुप स्टडी सुना होगा। ग्रुप डिस्कशन सुना होगा और ग्रुप पार्टी भी सुना होगा..लेकिन कभी ग्रुप एग्जाम या ग्रुप चीटिंग के बारे में सुना है?
तो ऐसा ही नजारा बिहार में बोर्ड की परीक्षा के दौरान देखने को मिला। अब चाहें सीएम साहब कितना ही टाल मटोल क्यों न करें..लेकिन बिहार में नकल किस हद तक चलती है..वो तो मीडिया के जरिये पूरे देश ने देखा...



बिहार के सुशासन बाबू ने बिहार में चल रही नकल पर प्रतिक्रिया कुछ इस तरह से दी..
ये तो बिहार की अधूरी तस्वीर है..जिला प्रशासन मामले को लेकर गंभीर है..और इस पूरे मामले की जांच चल रही है”..इससे पहले नकल पर राज्य के शिक्षा मंत्री ने हाथ खड़े कर दिए हैं..शिक्षा मंत्री पी के शाही ने कहा कि वो अपने ही लोगों पर गोलियां थोड़े ना चलवा सकते हैं। हमें नहीं पता कि इसे रोकने में कौन सा कारगर कदम उठाया जाए या कौन सी व्यवस्था कराई जाए। मैं मीडिया के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों से अपील करता हूं कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए अभिभावक बच्चों को नकल ना कराएं। ये एक बहुत गंभीर विषय है। नकल रोकने के लिए सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती.. ये सरकार के बूते की बात नहीं है। सरकार अपने ही लोगों पर गोली थोड़े ही चलवा सकती है..या उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई थोड़े करेगी''



कहते है देश का भविष्य युवा पीढ़ी है..
लेकिन बिहार में छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ किस कदर खिलवाड़ हो रहा है। इसकी एक बानगी देखने को मिली बिहार के हाजीपुर और वैशाली में...यहां बिहार बोर्ड की परीक्षा के दौरान धड़ल्ले से नकल कराई जा रही है। छात्र छात्राओं के परिवार वाले परीक्षा केंद्र की दीवार पर चढ़कर नकल करवा रहे हैं। इस पूरे खेल में परीक्षा केंद्र पर तैरान पुलिस और परीक्षा निरीक्षकों की भी मिली भगत होती है। हाजीपुर में परीक्षा माहौल इतना खराब है कि..प्रश्नपत्र बंटा नहीं कि नकल के ठेकेदारों के पास पर्चा पहुंच जाता है..और परीक्षा केंद्र के बाहर से नकल का समान सामग्री अंदर पहुंचनी शुरू हो जाती है।



बिहार में बेरोजगारी की समस्या बहुत बड़ी है।
शायद इस तरह की परीक्षा प्रणाली भी इसके लिए  जिम्मेदार है। सरकार को इन छात्र छात्राओ की चिंता होती तो शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार के बारे में सोचती..न की इस स्तर की छूट परीक्षा केन्द्रों पर दी जाती..लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये सत्ता में आने के लिए राजनीति पार्टियां अच्छी शिक्षा और रोजगार देने का चुनावी उठाती है..और जब इस तरह की लापरवाही सामने आती है..तो सरकार अपना पलड़ा झड़ने से पीछे नहीं हटती है।




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