दिग्गजों पर भारी पड़ी 'आप'

साल के दूसरे महीने की 10 तारीख को जो हुआ..उससे बीजेपी खेमे में तूफान लाकर खड़ा कर दिया। साल 2014 में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया..जिस ओर देखा..उस ओर जीत मिली। कामयाबी बुलंदी छू रही थी। लोकसभा में मिली एतिहसिक जीत से बीजेपी का सीना चौड़ा होगा था..क्योंकि मैदान में सभी विरोधियों को जो परास्त किया। मोदी लहर ऐसी चली कि सब मोदीमय मोदीमय हो गए..लेकिन साल 2015 में वो हुआ..जिसकी कल्पना बीजेपी ने कभी नहीं की होगी। समय था दिल्ली विधानसभा चुनाव का..सभी पार्टियां ने जोर शोर से चुनाव प्रचार किया..लेकिन बीजेपी भूल गई..उसने वहीं गलती की। जो गलती साल 2014 में कांग्रेस ने की थी। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति। एक-दूसरे पर जमकर किचड़ उछालना। बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर ऐसी किचड़ उछाली कि..अपने हिस्से की भी सारी किचड़ आप को दे दी। शायद आपको याद नहीं मोदी जी..आप ने ही तो कहा..जितना किचड़ उछालोगे...कमल उतना ही खिलेगा..फिर ये गलती कैसे हो गई।

कौन हैं इस गलती के कसूरवार...आप या आपके सबसे करीबी दोस्त अमित शाह..क्योंकि आमित शाह के निर्देश पर ही तो..पार्टी ने ‘आप’ को मात देने के लिए मैदान में पूरी फौज उतार दी..अब पछताने से क्या फायदा..आपकी हिस्से की किचड़ तो आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के पास चली गई..और प्रचंड बहुमत से दिल्ली में आ गए..दिल्ली की 70 सीटों में से 67 सीटों पर आप ने अपनी मुहर लगा दी..32 सीटों पर से महज 3 सीटों पर आकर सिमट गई..आपने जिसे दिल्ली चुनाव में हथियार बनाया उसी ने कह दिया..ये मेरी (किरण बेदी) नहीं ये तो बीजेपी की हार है..बीजेपी को आत्ममंथन करना चाहिए।




कांग्रेस का हाल बीजेपी से जुदा नहीं है..जिस हार से बीजेपी में मातम पसरा है..वहीं हार रह रहकर कांग्रेस का मजाक उड़ा रही है..बीजेपी ये कहकर अपने नकामी को ना छिपाए की कांग्रेस का तो दिल्ली में सूपडा साफ हो गया है..सूपड़ा तो ‘आप’ ने आपका भी कर दिया है..कांग्रेस ने दिल्ली में खोई हुई साख को वापस लाने के लिए अजय माकन पर दांव खेला। अजय माकन को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया..लेकिन कांग्रेस की हार को अजय माकन भी नहीं बचा पाए...और ‘आप’ के हल्के से नुमाइंदे के आगे घुटने टेक बैठे..वैसे ये हार अजय माकन की नहीं है..ये तो कांग्रेस की हार है..जनता कांग्रेस को सबक सीखा रही है..जो गलतियां उसने दिल्ली में 15 साल के शासन के दौरान की थी..उन्ही गलतियों की सजा आज कांग्रेस भुगत रही है..
बीजेपी के पास अभी भी वक्त है..जो कमान ढीली हो गई है उसे कसने का..अगर इस बार चुक हुई तो फिर कैसे जनता का विश्वास जीतोगे..अब तो बीजेपी के अपने निशाना साध रहे है तो विरोधी भी मोदी लहर पर चुटकी ले रहे है..संभल जाओ..वारना ऐसा न हो फिर मात खानी पड़े..इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले है..बिहार की 184 सीटों पर अभी से पकड़ बनानी शुरू कर दो...क्योंकि बिहार में जनता दल बन चुका है..वहां तुम्हारी राह में रोड़ा बनने के लिए महागठबंधन मौजूद है..
दिल्ली में मिली हार बीजेपी के लिए सबक है..तो कांग्रेस के लिए भी वक्त आ चुका है..वो पार्टी में मची खींचतान को खत्म करें..और पार्टी के खोए हुए जनाधार को वापस लाने पर फिर से गहन गहन मंथन करें..क्योंकि सालों की कमाई को पल में कोई उड़ा ले गया है..तो दुख तो होता ही है..


 


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