पहले मोदी महंगाई के पीछे, अब महंगाई के पीछे।।


मोदी और महंगाई दोनों का अब एक अटूट नाता बन चुका है..चुनाव से पहले जहां मोदी महंगाई को लेकर कांग्रेस पर सवालों के तीखे बाणों की बौछार किया करते थे..

...तो वहीं सत्ता के सिंहासन पर बैठने के बाद मोदी पर महंगाई को लेकर विरोधी पार्टियां हमले कर रही है..पहले महंगाई के पीछे मोदी थे..अब मोदी के पीछे महंगाई है।

मोदी ने पीएम की कुर्सी क्या संभाली.. महंगाई 7वें असमान पर पहुंच गई..जहां एक ओर मोदी महंगाई से निपटने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे है..तो वही विरोधी पार्टियां मोदी सरकार के खिलाफ सड़को पर उतरकर अपना विरोध जता रही है..पहले बिजली-पानी की कटौती को लेकर दिल्ली में कांगेस ने अपना विरोध जताया..इसके बाद ये प्रदर्शन देशभर में देखा गया..खासकर यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र..जैसे बड़े शहरों में इसका ज्यादा असर देखा गया।

जैसे ही मोदी सरकार ने रेल किराये में बढ़ोतरी का फैसला किया...
...तो मानो मोदी सरकार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो..हर तरफ विरोध की बयार बहने लगी..रेलों को रोक रोककर प्रदर्शन किया गया..मोदी जहां जहां अपने कदम बढ़ाते चले गए..महंगाई उनसे पहले वहां-वहां पहुंचती चली गई..इसके बाद जब चीनी, गैस सिलेंडर, डीजिल और पेट्रोल के दाम में इजाफा हुआ..तो विरोधी पार्टियां मोदी सरकार के अच्छे दिनों पर चुटकी लेना नही भूली।


महंगाई को लेकर मोदी सरकार चौतरफा आफत झेल रहे है..जहां एक ओर जनता को खुश भी करने की कवायद में जुटी है..तो वहीं दूसरी ओर महंगाई मोदी का पीछा छोड़ने का नाम ही नही ले रही है। अब बेचारे मोदी ही क्या करें..जब सिर महंगाई बैठी हो तो भला विरोधी कहां पीछे रहने वाली है..ऐसे में हमलें भी होंगे..और सियासत भी गरमाती जाएगी।   





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