गरीबी की नई परिभाषा

अगर आप गांव में रहते हैं...और प्रतिदिन 32 रुपए कमाते है..तो आप गरीब नहीं है..अगर आप गांव में नहीं रहते है..और शहर में रहकर 47 रुपए कमाते हैं..तो आप फिर भी गरीब नहीं..ऐसा हम नहीं कह रहे है...ये तो देश में गरीबी का आंकलन के लिए बनी रंगराजन समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है..गरीबी की नई परिभाषा दी है..ये नई परिभाषा पूर्व आरबीआई गवर्नर सी रंगराजन ने दी है..रंगराजन कमिटी ने अपनी रिपोर्ट योजना मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को सौंपी है.. रंगराजन समिति ने यूपीए सरकार की पूर्ववर्ती तेंडुलकर समिति के आंकलन को खारिज करते हुए कहा है कि..देश में हर दस में से तीन व्यक्ति गरीब हैं..
          रंगराजन कमिटी ने गरीबी की नई रेखा परिभाषा जैसे ही बताई..मनो कि भूचाल आ गया..और विरोधी पार्टियों ने इन तथ्यों पर रंगराजन को खूब खरीखोटी भी सुनाई..तो वहीं यूपीए सरकार की तेंडुलकर समिति की बात करें तो..तेंडुलकर समिति ने भी इसी तरह ग्रामीण इलाकों में 27 रुपए..और शहरी इलाकों में 33 रुपए रोजाना खर्च करने वालों को ही गरीबी की रेखा में रखा था...जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मालिकार्जुन खडगे से इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा गया तो.. मालिकार्जुन खडगे ने कुछ यू कहा..अब ये रिपोर्ट आई है तो देखेंगे..इकोनोमिक सर्वे भी आएगा..मौके का फायदा उठाना कोई एसपी से सीखे..

          अब एसपी खुद तो बदहाल कानून व्यवस्था, बेकाबू नौकारशाही और चरम पर पहुंचे भष्ट्राचार जैसे मुद्दों से ग्रस्त हैं..लेकिन जब मोदी सरकार पर हमला करने का मौका भला एसपी क्यों गंवाएगीके..बस मौका मिला और बरस पड़े रंगराजन रिपोर्ट पर...एसपी नेता नरेश अग्रवाल ने कहा..हम रंगराजन को हर रोज 100 रुपए देंगे..और वो गांव में रहकर दिखाएं..जाहिर है कि जब चारों ओर बढ़ती महंगाई से हाहाकार मचा हो..और सरकार को रिपोर्ट दी जाए कि..गांव में 32 और शहर में 47 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नही है..तो हर किसी को गुस्सा आएगा..इस महंगाई में 32 या 47 रूपये से बच्चे का..एक दिन का खर्चा तो पूरा हो नहीं पता..भला किसी व्यक्ति का खर्चा क्या पूरा होगा।

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