राजनीति में उथल-पुथल

जिंदगी में उथल-पुथल होता है..लेकिन जब राजनीति में उथल-पुथल देखने को मिलता है तो सोचने पर मजबूर कर देता है..ऐसी ही कुछ बातें 2015 की है...वैसे तो 2015 खत्म हो रहा है और 2016 का आगाज होने वाला है..2015 में देश की राजनीति में भी काफी उथल-पुथल हुई। कई राज्यों में चुनाव हुए...और जो नतीजे सामने आए वो बेहद चौकाने वाले थे। 2014 में बीजेपी का विजय रथ आगे बढ़ रहा था..लेकिन 2015 में दिल्ली में बीजेपी का विजय रथ अरविंद केजरीवाल ने रोक दिया..तो वहीं दूसरी तरफ बिहार में लालू-नीतीश की जोड़ी ने बिहार का संग्राम जीत लिया।


दिल्ली में केजरीवाल की सरकार- 2015 की शुरुआत में ही मोदी सरकार और बीजेपी को बड़ा झटका लगा, जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की ऐतिहासिक जीत हुई। कई राज्यों में लगातार जीत का परचम लहरा रही बीजेपी को दिल्ली में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। पार्टी को यहां 60 में से महज 3 सीटें मिलीं।


जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी का गठबंधन- जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन देश की बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक था। दो अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टी का ये मिलन आसान नहीं था। जिस पार्टी को पूरे चुनाव के दौरान पीएम मोदी और बीजेपी कोसती रही आखिर उसी पार्टी के साथ उन्होंने सरकार बनाने का फैसला किया, जिसके लिए उनकी खूब आलोचना हुई।


जनता परिवार का मिलन- जनता परिवार का मिलन भी साल की बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक था। दिल्ली में मुलायम सिंह यादव के घर पर शरद यादव, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, एचडी देवगौड़ा औऱ दूसरे नेताओं की मौजूदगी में जनता परिवार के विलय का ऐलान किया गया। ये अलग बात है कि जनता परिवार बनने से पहले ही दोबारा बिखर गया।


बिहार में लालू-नीतीश का गठबंधन- लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार कभी साथ होंगे, एक साल पहले कभी कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था, लेकिन कहते हैं ना राजनीति में ना कोई स्थायी दोस्त होता है और ना ही कोई स्थायी दुश्मन। जिस लालू के खिलाफ राजनीति करते हुए नीतीश सत्ता के शिखर पर पहुंचे थे, अपनी जमीन खिसकती देख उसी लालू के साथ हाथ मिला बैठे और एक बार फिर बिहार की सत्ता पर काबिज हुए।


विपक्ष का हंगामा- 2015 में संसद का मॉनसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। कभी लैंड बिल मुद्दा बना तो कभी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा ललित मोदी की मदद का मामला उछला। ललित मोदी से राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कारोबारी संबंधों को लेकर भी कांग्रेस ने खूब हंगामा किया और इस्तीफे की मांग की। वहीं व्यापमं घोटाले को लेकर भी संसद सत्र को बाधित किया गया।


महागठबंधन की जीत- बिहार में महागठबंधन की जीत बीजेपी के लिए बड़ी हार थी। खुद पीएम मोदी बिहार के चुनावी अखाड़े में उतरे कई रैलियां भी कीं। केंद्रीय मंत्रियों की पूरी फौज बिहार जीतने पहुंच गई, लेकिन यहां मोदी का जादू नहीं चला और जनता ने एक बार फिर नीतीश पर भरोसा जताया और उनकी दोबारा ताजपोशी हुई।


नेशनल हेराल्ड केस- नेशनल हेराल्ड मामला साल की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में इसलिए शुमार है क्योंकि इस मामले में खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए। ये मामला बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सबसे पहले उठाया था और तब किसी ने नहीं सोचा था कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को ये मामला कटघरे में लाकर खड़ा कर देगा।


हेट स्पीच- 2015 नेताओं के विवादास्पद बयानों के लिए भी याद किया जाएगा। कभी विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह का दलित बच्चों की हत्या पर कुत्तों वाला बयान तो कभी हरियाणा के सीएम मनोहर खट्टर का भारत में रहना है तो बीफ खाना छोड़ना पड़ेगा जैसा बयान, ये केंद्र सरकार और बीजेपी की फजीहत के सबब बने। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ, साध्वी प्राची, साक्षी महाराज, आजम खान, असदउद्दीन ओवैसी के बयान साल भर मीडिया में सुर्खियां बने रहे।


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