इंसाफ के लिए इंतजार
इंतजार अभी बाकी है...इंसाफ अभी बाकी...इंसाफ मिलेगा या नहीं यह सवाल अब बाकी है। आंखे थक गई है इंतजार करते करते..बूढ़े माता-पिता की आंखों से आंसू सूख गए। उम्मीद भी
टूटी-टूटी सी नजर आने लगी है। घर का आंगन भी सूना है। दिल के तमाम कोने खाली है...मां की गुड़िया..पिता का गर्व..भाई का प्यार। सब जुदा हो गया..सिर्फ दिल में रह गई है
तो बस यादें है। कुछ अच्छी..कुछ बुरी..और कुछ ऐसी यादें..जिन्हें चाहकर भी भुलाया
नहीं जा सकता है। तीन साल पहले चलती बस में हैवानियत का ऐसा घिनौना खेल खेला गया पूरे देश को शर्मसार कर दिया। और इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई बुरी याद बन कर ये तारीख..16 दिसंबर
2012...
तीन साल पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि..लाइम लाइट में रहने वाली दिल्ली भी
महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है..लेकिन 16 दिसंबर की आधी रात को जो हुआ उसने बुरे
देश को झकझोर कर रख दिया। निर्भया के साथ इस हैवानियत के विरोध में दिल्ली सहित देश भर में लोग सड़कों पर उतर आए। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी के साथ जमकर तोड़फोड़ हुई। पुलिस ने निर्भया के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया..लेकिन इस घटना से बहुत सवाल खड़े हुए। क्या निर्भया कांड के बाद दिल्ली में महिलाओं के साथ दरिंदगी रुकी है, क्या महिलाएं आज भी सुरक्षित हैं?
आधी रात को चलती बस में दरिंदगी का ऐसा नंगा नाच किया गया..और इस नंगे नाच में 6 आरोपी थे। जिनमें से
एक आरोपी ने खुद को फांसी लगा ली। 4 आरोपी जेल में अपने जुर्म की सजा काट रहे
है..लेकिन जनता ने इन आरोपियों के लिए फांसी की सज़ा मांगी थी। निर्भया के
माता-पिता ने फांसी मांगी थी..लेकिन इन आरोपियों को फांसी नहीं उम्रकैद की सजा
मिली है। हैवानियत का घिनौना खेल खलने वाला सब क्रूर छठा आरोपी था। नाबालिग था..और अब नाबालिग आरोपी को शायद 20 दिसंबर को रिहा भी कर दिया जाए।
नाबालिग जरूर है..लेकिन अपराध सबसे क्रूर है। क्या नाबालिग होने के आधार पर आरोपी
का अपराध कम हो जाएगा..बिल्कुल नहीं..अपराध..अपराध होता है..और सबसे क्रूर अपराध
पर करने वाले को कभी माफ नहीं किया जा सकता है। निर्भया के माता पिता ने भी सरकार
से अपील की है..और निर्भया के पिता ने कहना है कि नाबालिग आरोपी को न छोड़ा
जाए..हमारी मांग है उसे आजादी के साथ घूमने
की इजाज़त नही दी जाए। अगर ऐसा नही किया गया तो वह समाज के लिए खतरा साबित हो सकता
है। उसकी रिहाई हो इससे पहले आरोपी की मानसिक स्थिति की जाँच की जाए जिससे की वह
किसी दूसरी लड़की की जिंदगी तबाह नही करे जैसे उसने हमारी बेटी की जिंदगी तबाह की
है।
नाबालिग आरोपी की रिहाई पर केंद्र सरकार का कहना है कि नाबालिग आरोपी की रिहाई के बाद उसके पुनर्वास की योजना
में कई महत्वपूर्ण बातें नदारद हैं। जिन पर उसे रिहा करने से पहले विचार करने कि
ज़रूरत है। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा जमा की गई रिहाई के बाद की योजना को
मद्देनज़र रखते हुए और दलीलों की संक्षिप्त सुनवाई के बाद बीजेपी नेता सुब्रमण्यम
स्वामी की नाबालिग की रिहाई पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर अपना
आदेश सुरक्षित रख लिया। नाबालिग आरोपी को सुधार गृह में रखे जाने की अवधि उस समय
तक बढाने की अपील की गई..जब तक रिहाई के बाद की योजना में नदारद सभी बातों पर
विचार नहीं कर लिया जाता।
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत
नाथ की पीठ से कहा कि भले ही नाबालिग आरोपी को सुधार गृह में रखे जाने की समय
सीमा पूर्ण हो गई हो..लेकिन अदालत उसकी गतिविधियों पर ‘प्रतिबंध लगा’ सकती है। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार आरोपी को रिहा होने पर आर्थिक मदद करेगी..10 हजार
रुपये और 1 सिलाई देगी ताकि नाबालिग आरोपी किराए पर दुकान लेकर टेलरिंग का काम
शुरू कर सके।
दिल्ली पुलिस ने इस घटना के बाद महिलाओं को तीन साल पहले भरोसा दिलाया था कि अब महिलाएं सुरक्षित रहेंगी। रात को बिना किसी डर के घरों से बाहर निकल सकती है..लेकिन आज भी महिलाएं दिल्ली में घरों से निकलने पर डरती हैं। मुनीरका के जिस बस स्टैंड पर निर्भया बस में बैठी थी...उसी बस स्टैंड पर खड़ी एक लड़की ने बताया कि उसे आज डर लगता है। हाल ही में महिलाओं के साथ-साथ मासूम बच्चियों के साथ भी दरिंदगी के मामले सामने आए। कहीं दो साल की बच्ची को हैवानों ने अपनी बुरी नीयत का शिकार बनाया..तो कहीं पांच साल की बच्ची का बचपन रौंदा गया। दिल्ली में महिलाओं के साथ ज्यादती कम होने की बजाए लगातार बढ़ी है..इस बात के गवाह खुद रेप से संबंधित दिल्ली पुलिस के आंकड़े हैं।
साल 2012 में रेप की घटनाएं जहां 756 थी...वहीं
2013 में यह आकड़े बढ़कर 1636 हो गए..उसके बाद भी यह आकड़ा रूका नहीं लगातार बढ़ता
चला गया साल 2014 में रेप की घटनाएं 2166 हो गई...वहीं अक्टूबर 2015 तक 1856 रेप
की घटनाएं सामने आई। इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी में महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस ने तमाम नियम कानून बनाएं। नए मोबाइल एप्स लांच किए ताकि महिला किसी मुसीबत में हो तो फौरन उसके जरिए उसकी मदद की जा सके। हर थाने में महिलाओं की सुनवाई के लिए महिला हेल्प डेस्क बनवाई गई, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है।
दिल्ली निर्भया गैंगरेप को आज 3 साल पुरे हो चुके लेकिन इन तीन सालो में
अपराध कम होने की बजाय बढे है। आज भी दिल्ली की सड़को पर हैवानियत रात 9 बजे के बाद महिलाओ पर हावी हो जाती है।
इस घटना के बाद देश भर में महिलाओ पर हो रहे यौन अपराधो का जमकर विरोध हुआ। लगने
लगा था की कानून में बदलाव होगा और महिलाओ को सुरक्षा मिलेगी..लेकिन अफ़सोस ऐसा कुछ
नही हो पाया। आज भी दिल्ली में प्रशासन की नाक के तले हर रात किसी न किसी युवती की
आबरू को नीलाम किया जाता है..लेकिन न तो केंद्र सरकार ने कोई कदम उठाए है और न ही
दिल्ली सरकार ने..हाल ही में दिल्ली में एक मासूम बच्ची को स्कूल जाते समय अगवाह किया गया..जबरन गाड़ी में ठूसकर उसे कुछ
वहशी दरिंदो ने हवस का शिकार बनाया। आखिर कब तक निर्भया कांड दोहराए जाएंगे कब तक पुलिस प्रशासन हाथ
पर हाथ धरे बैठे रहेगा?

Comments
Post a Comment