पहले जुबानी तीर..अब फूलों से स्वागत..
कभी आरोप लगना..तो कभी हाथ मिलना। कभी कठघरें खड़ा करना..तो
कभी फूलों से स्वागत करना। यह ही राजनीति की परिभाषा है। कहते राजनीति में रणनीति
जरूरी है..और रणनीति के बिना कुछ पोसिबल नहीं है। नीतीश और मोदी की मुलाकात भी
यहीं कहती है..
कभी
एक-दूसरे पर जुबानी तीर छोड़ने वाले आज गले मिल रहे है। एक-दूसरे को कटघरें में
खड़े करने वाले आज फूलों से स्वागत कर रहे है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान
बीजेपी के कद्दावर नेता और पीएम नरेंद्र मोदी ने जमकर नीतीश कुमार पर आरोप लगाए। नीतीश
के डीएनए पर भी सवाल खड़े किए..तो वहीं नीतीश कुमार ने भी मोदी के डीएनए वाले बयान
को खूब उछाला..और इसी का नतीजा था कि बिहार में एनडीए को करारा झटका लगा।
बिहार में
नीतीश कुमार की सरकार है...और नीतीश के नेतृत्व को जनता ने खूब पसंद भी किया। सूबे
की कमान संभालने के बाद नीतीश कुमार संसद पहुंचे। जहां नीतीश कुमार ने संसद की
कार्यवाही में हिस्सा लिया..फिर मौका मिलते ही पीएम मोदी से मुलाकात की। इसके बाद
सीएम साहब ने राहुल गांधी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की।
एक तरफ नीतीश की पीएम मोदी से मुलाकात..दूसरी तरफ संसद में अटका मोदी सरकार जीएसटी बिल..जिसे मोदी सरकार हर हाल में पास कराना चाहती है...हालांकि नीतीश कुमार जीएसटी के पक्ष में नजर आ रहे है। नीतीश कुमार ने कहा कि हम जीएसटी बिल के पक्ष में है..जेडीयू हमेशा से ही इसके साथ खड़ी है..इससे राज्यों को फायदा मिलेगा।
जीएसटी बिल पर जेडीयू की तरफ से मिली हां से मोदी सरकार काफी खुश होगी..लेकिन विपक्ष का हंगामा मोदी सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात होगी कि पीएम मोदी से नीतीश कुमार की मुलाकात क्या रंग लाती है...और जीएसटी बिल को पास कराने में कितनी कारगर साबित होती है।
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