कुर्बान-ए-ज़िंदगी

ए ज़िंदगी ज़रा तू बता..
तेरा इरादा क्या है ?
तेरी हसरत, तेरी चाहत..
सबसे जुदा है।
तुझे पाने की चाहत में..
हर कोई कुर्बान हो जाता है।
लेकिन तेरी महोब्बत किसी-किसी पर ही
मेहरबान होती है।
कहते है, ज़िंदगी का दस्तूर भी बड़ा अजीब है।
किसी कोने में खुशी तो,
किसी में गम का भंडार।
ए ज़िंदगी ज़रा तू बता..
तेरा इरादा क्या है ?
तेरी हसरत, तेरी चाहत..
सबसे जुदा है।

वैसे तो हर राह पर..
मुसाफिर मिल जाते है।
कुछ याद रहते है..
तो कुछ ज़िंदगी भर चुभते है।
चुभना और चुभाने का भी चलन है,
कोई प्यार में..
तो कोई नफरत में करता है।
ए ज़िंदगी ज़रा तू बता..
तेरा इरादा क्या है ?
तेरी हसरत, तेरी चाहत..
सबसे जुदा है।

ज़िंदगी का तिलिस्म..
और भी अजीब है।
तूफान भी, खमोशी भी और बंवडर भी।
चाहे कोई भी हो..
लेकिन ज़िंदगी को,
नर्क से बदत्तर बना देता है।
वैसे तो हर मौसम फूल खिलते है,
फूल के साथ ऐसे मोड़ भी।
ए ज़िंदगी ज़रा तू बता..
तेरा इरादा क्या है ?
तेरी हसरत, तेरी चाहत..
सबसे जुदा है।












Comments

Popular posts from this blog

खौफ़नाक मंज़र

दर्दनाक मौत

भारत माता पर विवाद