विंडबना
दिल के कोने में...
दफन सारे आरमा है।।
चुन-चुनकर तलाशे...
व़क्त ने ज़ख्म।
आँखों से ओझल हो गए,
सारे महकमें।
मेरे जीवन की कैसी विंडबना है?
दिल के कोने में...
दफन सारे आरमा है
कुछ यूं ढहाएं सितम,
मुझ पर...
खुशियों से वास्ता ही
न रहा।
मांगा जिनको दुओं में,
ढूँढ़ा हाथों की लकीरो में
वो ही बेगाना कह
गए।।
मेरे जीवन की कैसी विंडबना है?
दिल के कोने में...
दफन सारे आरमा है।
अपनी बर्बादी का।
जश्न मना रहे थे...
अपनी कामयाबी का।।
ज़मीन पर गिरे आंसू को...
ओस की बूंद समझ बैठें।।
बेगाने को अपना कह बैठे।
दर्द को भी दर्द
होने लगा है।
मुझसे रूकस्त होकर
रोने लगा है।।
मेरे जीवन की कैसी विंडबना है?
दिल के कोने में...
दफन सारे आरमा है।



I like this poem becoz it's true........................
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