इंतजार
किया
तो तुझे...
अपने
दिल में पनाह
दी।
भीगी
पलको पर,
हसीन
ख्याब संजोए।।
और
अपनी सांसो पर,
तेरा
नाम लिखा।।
लेकिन...
तुझे
ख़बर नही।।
क्या
गुज़रती है?
मेरे
इस दिल पर...
तुझे
इसका अंदाजा
नही।
जब
संदेशा तेरा...
नही
मिलता।।
तो
धड़कने बेचैन
हो जाती है
और
ज़िंदगी, हर
पहलु में...
वीरान-सी,
लगने
लगती है।।
शायद...
तुझे
मेरी महोब्बत की
कीमत
मालूम नही।।
जब-जब
अपने...
शावाब
पर होती है।
तो
समदंर में...
हजारों
लहरे उठती है।।
और
जब-जब तुझे छुकर...
मेरे
समीप आती है
तो मन
में...
ढ़ेरों
उम्मीद जागा देती है।।
बस! एक
लम्हें में,
मुझको
मुझी से चुरा
लेती है।
लेकिन....
तुझे
मेरी हालत की परख नही।
के
टीले पर,
बैठी-बैठी...
तेरी
यादों में,
ख्यालों
के महल बनाती।
रात-रातभर जागकर,
तेरे
ख्याब बुनती।।
लेकिन...
पत्थर! दिल-ए-मेहमान...
तुझे
मेरी कदर नही।
लम्हा-लम्हा...
तेरा
दीदार करती।
आँखों
को न करार
देती।।
टकटकी
लगाएं...
चौखट
को निहारती।।
लेकिन....
तुझे
मेरी परवाह नही।।
तेरे
एक दरस की खातिर,
न जाने
कितनी रैना...
आँखियों
से बौछार बहती।
तुझे
दूर से ही...
देखकर
मन को बहलाती।
तेरे
हाथों में...
अपनी
तकदीर तलाशती।
तो कभी
तेरे प्यार को...
अपने
आंचल में समेटे,
बहरूपी
दुनिया से लड़ने
खुद ही...
निकल
पड़ती।।
लेकिन...
तुझे
अहसास नही।।





super all
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