धोखा

तन्हा-तन्हा, कल था मेरा।
तन्हा-तन्हा, आज है मेरा।।
बीते हुए कल से
जुड़ा है...
हर राज मेरा।।
तन्हाई से रिश्ता जोड़ा,
खुशियों से नाता टूटा।
न जाने...
किस मोड़ पर ले जाए...
खुशियां मातम में,
न बदल जाए।
यह सोचकर,
रूंह कांप जाती है।
लेकिन...
दिल को बड़ा सकून
मिलता है...
जब फरेबियों के,
चहरे से शाराफत का
नकाब उतरता है।
तो ज़िंदगी महरून लगने लगती है।
तन्हा-तन्हा, कल था मेरा।
तन्हा-तन्हा, आज है मेरा।।
बीते हुए कल से
जुड़ा है...
हर राज मेरा।।


जिंदगी...
जब मतलबियों से रूबरू होती है।
तो चोट...
दिल को ही लगती है।।
यह आग की लपटे,
धहकते शोले,
और काले-काले धुंए की गिरफ्त में...
यह नीला अंबर।
किसी बदकिस्मत की
बर्बादी की...
जुबानी कह रहा है।
इस धुंए में...
न जाने कितनी ज़िंदगियां
रम गई।
तन्हा-तन्हा, कल था मेरा।
तन्हा-तन्हा, आज है मेरा।।
बीते हुए कल से
जुड़ा है...
हर राज मेरा।।


मंजिल को भुलाकर,
सारे रिश्ते-नाते तोड़कर,
खुशियों से मुंह मोड़कर,
और दुखों को गले लगाकर
चल दिया।
एक और मुसाफिर चल दिया।
उस पथ पर...
कभी मेरे निशां मौजूद थे।
आने वाले तेरा स्वागत है।
इस महफिल में
दिल को सकून तो ज़ख्मों को मरहम
लागेगा।
हर दिन एक नयी उम्मीद होगी।
तन्हा-तन्हा, कल था मेरा।
तन्हा-तन्हा, आज है मेरा।।
बीते हुए कल से
जुड़ा है...
हर राज मेरा।।


तेरी आंखें नम
क्यों है?
तुझे बर्बाद करने वाले,
और रंग-रलियों में डूबे कांतिल
तेरे अपने है।
जिन्होने
तेरा घर जला दिया।।
कल कि सुबह...
कुछ ख़ास होगी।
नयी उम्मीद की रोशनी साथ होगी।।
जिस राह पर तू चलेगा
उस राह पर
न अपना
और
न कोई पराया होगा
बस! यह रोना...
फिर से न रोना,
मंजिल की तलाश कर।।
तन्हा-तन्हा, कल था मेरा।
तन्हा-तन्हा, आज है मेरा।।
बीते हुए कल से
जुड़ा है...
हर राज न रहेगा।।

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