दर्द की दस्तक
कांटे ही कांटे राह में मेरे साथ है।
न मंज़िल, न कोई अपना साथी है।
कुछ सवाल है
जो आधी रात को...
नींद से जगा देते है।
क्यों?
दिल ऐसे सवालों के...
भंवर में फंस गया।
दिल का हाल आज बेहाल है
कांटे ही कांटे...
राह में मेरे साथ है।
कभी यहां...
तो कभी वहां भटकते रहे।
कुछ पाने के लिए ज़िंदगी भर तरसते रहे।।
पैरों में कांटे...
चुभते रहे तो मन ही मन,
अपनी बदकिस्मती पर रोते रहे।।
दिल को अब किसी से...
कोई शिकायत नही
और न खुशियों की आस,
मौत के पैगाम से डर नही।।
दिल का हाल आज बेहाल है
कांटे ही कांटे...
राह में मेरे साथ है।
कहने के लिए...
दुनिया में अपना कोई नही है।।
शायद...
कोई उम्मीद अभी बाकि हैजो मुझसे सवाल करती है
सवालों के भंवर में
फंसा मन...
कुछ पल के ले डूब जाता है।
जो दर्द की
दस्तक से...
अंजान है।।
दिल का हाल आज बेहाल है
कांटे ही कांटे...
राह में मेरे साथ है।



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