बेबसी पर सियासत

साहेब यू हीं कोई नहीं मरता। यू हीं अपनी जिंदगी को खत्म नहीं करता। कुछ वजह होती है..बहुत कुछ खोने का गम होता है..तो कुछ टूटी हुई आस होती है..जो बार बार रूलाती है..वो भी खून के आंसू रोता होगा। जब अन्नदाता काल के गाल में समा जाता है। खुदा ने तो दुनिया बनाई है..लेकिन पालन हारा तो किसान है। यहां ऐसे लोगों की कमी नहीं जो किसानों की बेबसी पर राजनीति करने से पीछे नहीं हटते है। हमारे समाज में आज भी एक ऐसा तबका है। जहां सुबह का चूल्हा तो जल जाता है...लेकिन रात का चूल्हा नहीं जल पाता..कुछ लोगों को 2 वक्त की रोटी भी मुनासिब भी नहीं होती है।  


सवाल फिर भी वही है क्या कोई अपनी जिंदगी को जान बूझकर खत्म करता है....सवाल उठते है..सियासत होती है..लेकिन सरकार का रवैया जस का तस रहता है....बेमौसम बारिश ने किसानों को खून के आंसू रूलाए..और किसानों की कमाई का जरिया भी उनसे छीन लिया..किसानों की महीनों की मेहनत बारिश की भेंट चढ़ गई..मार्च, अप्रैल महीने में हुई बेमौसम बारिश ने बड़े स्तर पर फसलों को बर्बाद कर दिया है..80 फीसदी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई..सरसों,  चना सहित कई अन्य अहम फैसले नष्ट हो गई है..यह सदमा किसानों को बार बार सता रहा है..अब तक किसान इस सदमें से उभर नहीं पाए है..और मौत को गले लगा रहे है..बड़ा दुख होता है..जब सत्ता में बैठे नेता और प्रशासन के लोग..कुछ किसानों की दुर्दशा पर सवालियां निशान खड़े करते है। सब कुछ जानकर भी अंजान बनने की कोशिश करते है।  


अन्नदाता लगातार मौत को गले लगा रहे है..लेकिन भिंड के डीएम का कहना है कि किसान खुद इसके जिम्मेदार है..किसान ज्यादा बच्चे पैदा कर लेते है..और फिर बच्चों को पालने में दिक्कत होती है...तो आत्महत्या कर लेते है..और बदनाम प्रशासन को करते है। अब तक अगर आंकड़ों की बात करें..तो हर दिन एक किसान आत्महत्या कर रहा है। सरकार सर्वे कर रही है..बर्बाद फसलों का जायजा ले रही है..लेकिन कब सर्वे का काम पूरा होगा..और किसानों को मुआवजा मिलेगा। जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी तब भी किसानों का यही हाल था..अब जब एनडीए की सरकार है तो भी यही हाल है।  


राजनेता सियासत करने से भी बाज नहीं आ रहे है..कांग्रेस अध्यक्ष लगातार किसानों से मिल रही है..महाराष्ट्र, हरियाणा और यूपी में किसानों से मुलाकात की..पहले यूपी के सीएम अखिलेश यादव को चिट्ठी लिखी..चिट्ठी में किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा देने की बात कही..फिर केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान को चिट्ठी लिखकर सरकारी खरीद में ढील देने की अपील की..लेकिन ये सब सियासत के लिए हो रहा है..मोदी सरकार भी भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर किसानों को समझाने की कोशिश कर रही है..चलो किसानों की बेबसी पर पीएम मोदी ने कुछ तो बोला..प्रधानमंत्री ने बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसल पर कहा कि उनके मंत्रियों ने उन्हें रिपोर्ट दी..सरकार 33 फीसदी बर्बाद हुई फसल पर मुआवजा देगी..और डेढ़ गुना मुआवजा दिया जाएगा। पहले फसलों के 50 फीसदी नुकसान पर मुआवजा दिया जाता था..मंगलवार को यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने भी 300 करोड़ के राहत पैकेज का एलान किया।
  


मौत को गले लगाने वाले अन्नदाता की खैर खबर लेने के लिए कोई नहीं है। सवाल बहुत है लेकिन जवाब फिर वही घिसापिटा है..काम चल रहा है..जल्द किसानों को मुआवजा दिया जाएगा..लेकिन कब..एक सवाल जो बार बार जहन में उठता है कब तक सरकार और प्रशासन मूकदर्शक बनकर ये सब देखते रहेंगे..और अन्नदाता काल के गाल में समाता रहेगा।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

खौफ़नाक मंज़र

दर्दनाक मौत

भारत माता पर विवाद