10 महीनों पर सवाल

एक वक्त था जब नमो नमो की लहर में सभी विरोधी पार्टी परास्त हो गई थी..और एक वक्त है अब जब विरोधियो के निशाने पर सिर्फ मोदी है। चाहें मामला कोई भी हो..लेकिन उंगुली तो मोदी सरकार के कामकाज पर ही उठेगी..और उठे भी क्यों विरोधियों को ऐसी हार बर्दाश्त नहीं हो रही। जो नमो से मिली थी। यूपी में मोदी की लहर ऐसी रंग लाई की बड़ी बड़ी पार्टीयां धराशाही हो गई। ऐसा ही हाल था बीएसपी का..


बीएसपी सुप्रीमों मायावती अब तक इस हार को पचा नहीं पाई है। और इस हार की कसक अब तक मायावती की जुबां पर झलक ही पड़ता है..लेकिन इस बार बीएसपी सुप्रीमों ने मोदी सरकार के 10 महीनें के कामकाज पर उंगुली उठाई है..और मोदी सरकार के 10 महीनों के राज को नकामयाबी का ताज पहनाया है। मायावती ने कहा कि "10 महीने बीत गए है लेकिन केंद्र सरकार कानून बदलने और कानून बनाने के लिए अलावा कुछ नहीं किया" वहीं मायावती  ने कहा कि भूमि बिल से देश की जनता गुस्‍से में है..नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के साथ धोख कर रही है..मोदी चुनाव के दौरान प्रचार में जनता के साथ जो वादे किये थे उसे अब पूरा करने में वह विफल रहे हैं…भूमि बिल किसान विरोधी है इसलिए इसे जितना जल्‍द हो सके वापस ले लेना चाहिए..इतना ही नहीं मायावती ने मोदी सरकार पर पूंजिपतियों के हित में कार्य करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीति है, पूंजिपतियों का विकास देश का विकास


मोदी सरकार को घेरने के बाद मायावती ने अखिलेश सरकार के कामकाज पर जुबानी तीर छोड़े..मायावती ने यूपी में बदहाल कानून व्यवस्था के लिए सिर्फ और सिर्फ अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया..जाहिर है कि जिस तरह मायावती के निशाने पर एक तरह केंद्र सरकार और दूसरी तरफ अखिलेश सरकार है..उससे ये बात साबित होती है कि मायावती को हार दर्द सहन नहीं हो रहा है..और इसका सबूत है केंद्र और यूपी सरकार..दोनों ने ही मायावती को यूपी में करारी हार दी है..लेकिन अब ये देखना और भी दिलचस्प होगा कि मायावती के जुबानी तीरों का बीजेपी और एसपी क्या जवाब देते है।



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