व्यापमं या मौत का घोटाला
व्यापमं घोटाला या फिर मौत का
घोटाला...जिस घोटाले की भेंट लगातार जिंदगिया चढ़ रही है..उस घोटाले में देश के
पीएम मोदी क्यों मौन बन कर बैठ गए..विपक्ष लगातार उन्हें चुप्पी तोड़ने की सलाह दे
रहा है..पीएम मोदी विदेश दौरे पर है..जब देश में और मध्यप्रदेश की जनता को उनकी
सबसे ज्यादा जरुरत है...उस वक्त पीएम को विदेश दौरा याद आ रहा है..खैर पीएम मोदी
की बात बाद में करेंगे लेकिन उससे पहले शिवराज सरकार की बात करते है। शिवराज जी
आपके राज्य में क्या हो रहा है। बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में एक के बाद एक जिंदगी पर
मौत का साया मंडरा रहा है..जिसमें 47 लोगों मौते हो चुकी है...ये मौते उन लोगों की
है..जो किसी न किसी वजह से व्यापमं से जुड़े हुए थे...अगर ये आकड़ां बढ़ जाए तो
हैरानी की बात नहीं होगी..क्योंकि व्यापमं घोटाला अब मौत का घोटाला बन चुका है..इस
खौफनाक मंज़र में कई जिंदगी सांसे तो ले रही है..लेकिन उनकी सांसे कब छिन जाए ये
किसी को नहीं पता।
व्यापमं घोटाले में जिस तरह से
विपक्ष अक्रमक हो गया है..उसके लगातार व्यापमं की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
में CBI से कराने की मांग कर रहा है। हालांकि 9 जुलाई 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को व्यापमं की जांच सौंप दी है..साथी ही मौतों की जांच करने
का फरमान सुना दिया है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं मामले में सुनवाई
करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट को फटकार लगाई है कि..अब हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच CBI को क्यों नहीं सौंपी..लेकिन CBI व्यापमं की जांच सुप्रीम कोर्ट
की निगरानी में करेगी। इस बात का फैसला 24 जुलाई को तय हो पाएगा।
व्यापमं घोटाले में जिस तरह से
मौत का आकंड़ा बढ़ रहा है..उससे शिवराज सरकार की छवि को भी गहरा झटका लगा। विवादों
में घिरे मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही 7 जुलाई 2015 को CBI जांच की सिफारिश का ऐलान कर दिया। एक प्रेस कांफ्रेंस
बुलाकर शिवराज ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित करते हुए कहा कि वह
घोटाले की सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं।
शिवराज ने कहा कि “व्यापमं की जांच एसटीएफ कर रही है। मैंने राज्य में एक
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की थी। जब मुझे लगा कि इसमें कुछ
गड़बड़ियां हो रही हैं तो तुरंत एसटीएफ से जांच के आदेश दे दिए।
मेरा हाई
कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास है। मैं हाई कोर्ट का आदर
करता हूं। मुझे जांच पर भी कोई संदेह नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जिस तरह मौतें
हुई हैं, इसके बाद से लगातार ऐसा वातावरण बना हुआ था कि जांच सीबीआई
से क्यों नहीं। मेरा पहले उत्तर ये था कि सीबीआई को जांच
मैं नहीं दे सकता, हाई कोर्ट मॉनिटरिग कर रहा है। लोकतंत्र लोकलाज से चलता है।
पिछले दिनों जो सवाल खड़े हुए उसका उतर निष्पक्षता से जरूरी है। इसलिए सवाल जो उठाए
गए है उनका समाधान जरूरी है। हम पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। मैं ये मानता हूं कि
जनता के मन में भी सवाल खड़े हुए हैं। मैं हाई कोर्ट को अनुरोध पत्र भेज रहा हूं
कि सीबीआई से जांच कराई जाए” प्रेस कांफ्रेंस करने के तुरंत
बाद शिवराज चले वहां चले गए।
वहीं कांग्रेस नेता दिग्विजय
सिंह ने कहा कि “ये अच्छी बात है। भगवान ने
शिवराज को सद्बुद्धि दी है, लेकिन मुझे CBI पर भी भरोसा नहीं है। हमारी
मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच करे और 2G केस की तरह हर हफ्ते प्रोग्रेस
रिपोर्ट दे। शिवराज सिंह चौहान से इस्तीफे की उम्मीद नहीं है इसलिए क्योंकि राजनाथ
सिंह पहले ही कह चुके हैं कि एनडीए में UPA का तरह मंत्रियों के इस्तीफे
नहीं होते”।
मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले
को लेकर कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल लगातार बीजेपी पर हमलावर है और इस मामले में
पीएम नरेंद्र मोदी से जवाब मांग रहे हैं। लेकिन केंद्रीय कानून मंत्री सदानंद गौड़ा
ने व्यापम घोटाले को छोटा मुद्दा बताते हुए कहा है कि “पीएम को ऐसे छोटे मसलों पर जवाब देने की जरूरत नहीं है। केंद्र
कैसे राज्य के अधिकार क्षेत्र में दखल दे सकता है।
पीएम
छोटी बातों का जवाब नहीं देंगे। कुछ मुद्दे इतने बेतुके होते हैं कि प्रधानमंत्री
को उनका जवाब देने की जरूरत नहीं है। हमारे गृहमंत्री, संबंधित मंत्रियों और पार्टी
अध्यक्ष अमित शाह ने सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं। हर छोटे बड़े बेतुके मुद्दों पर पीएम जवाब दें, ये सही नहीं है। अगर कोई बहुत गंभीर मुद्दा
हो और अगर मुद्दा देश हित में हो तभी पीएम को बोलना चाहिए। क्या हम राज्य सरकार के
अधिकारों का अतिक्रमण करें, अगर कल राज्य
कहे कि केंद्र ने कैसे अतिक्रमण किया तब कौन जवाब देगा”
सदानंद गौड़ा पर चुटकी लेते हुए
दिग्विजय सिंह ने कहा कि “हां, हां सदानंद गौड़ा सही तो कह रहे
हैं। जो आदमी हर छोटी बात पर बोला करता था आज प्रधानमंत्री केवल अल्जीरिया, ट्यूनिशिया, योगा पर बोल रहे हैं, सेल्फी खिंचवा रहे हैं। स्मृति
के, वसुंधरा के, सुषमा के, पंकजा मुंडे पर नहीं बोलना
चाहिए। सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना है कि पुरे मामले को CBI को सौंपे”।
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला
ने कहा कि “देश के कानून मंत्री पर सत्ता
का अहंकर चढ़ कर बोल रहा है। अगर 46 लोग की मौत को आप सिली इश्यू
लगता है तो हैरानी है। कानून मंत्री सदानंद गौड़ा माफी मांगें और अगर नहीं मांगते
हैं तो पीएम को इस पर जवाब दें। पहले कैलाश विजयवर्गीय ने मजाक उड़ाया। मोदी के
कानून मंत्री बताएं कि गंभीर मुद्दा क्या है”।
विपक्ष जिस तरह से बीजेपी को लगातार घेर रहा
है...मोदी के मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों को लेकर संघ भी
परेशान हो गया है..संघ ने भी साफ संकेत दे दिए है कि जिस तरीके पार्टी की किरकिरी
हो रही है..वो बिल्कुल ठीक नहीं है...और पार्टी इमेज सुधारने के लिए किसी को बलि
देनी पड़ेगी..क्योंकि पीएम मोदी और संघ मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव और
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से नाराज है...अब देखना ये होगा कि पार्टी की छवि
को सुधारने के लिए दोनों में किसकी बलि चढ़ती है।
इतना जो बवाल खड़ा हुआ है..आखिर ये मांझरा है
क्या क्यूं व्यापमं घोटाले में सरकार की साख का गहरा झटका लगा है..भ्रष्टाचार
के गलियारे में बिछे शतरंज में हर एक प्यादे से लेकर 2 हजार करोड़ रुपए के वारे-न्यारे करने वाले वजीर और राजा तक के
लिये यह घोटाला मौत का साया बन चुका है। 7 जुलाई तक 42 मौतों का कारण बन चुका है। व्यापमं एक प्रोफेशनल एजुकेशन का
संक्षिप्त रूप है, जिसके तहत
राज्य में प्री मेडिकल टेस्ट, प्री
इंजीनियरिंग टेस्ट और कई सरकारी नौकरियों के एग्जाम होते हैं। यह एक मंडल के रूप
में काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में व्यापमं परीक्षा घोटाले में तब्दील तब हो
गया। घोटाले की शुरुआत हुई कॉन्ट्रैक्ट टीचर वर्ग-1 और वर्ग-2 और मेडिकल एग्जाम से। इसमें ऐसे लोगों को पास किया गया, जिनमें एग्जाम में बैठने तक की योग्यता नहीं थी। और तो और तमाम
सरकारी नौकरियों से लेकर पुलिस भर्ती तक हजारों लोगों की भर्तियां नियमों को ताक
पर रखकर की गईं। खासकर वो नौकरियां और प्रवेश जो 2011 के बाद
परीक्षाओं के तहत दिये गये।
व्यापमं
घोटाले से जुड़े लेटेस्ट अपडेट इस घोटाले में बड़े-बड़े मंत्रियों, आईएएस अधिकारियों और व्यापारियों से लेकर क्लर्क ग्रेड तक के
लोगों के नाम आ रहे हैं। ऐसे लोगों के नाम आ रहे हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर घूस लेकर लोगों को नौकरियां व प्रवेश
परीक्षाओं में हाई रैंक दिलायी है।
व्यापमं से
जुड़ी मुख्य बातें व्यापमं के तहत प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों की शुरुआत 1990 के दशक से ही शुरू हो चुकी थीं।
पहली
एफआईआर साल 2000 में छतरपुर जिले में दर्ज हुई। 2004 में खंडवा में 7 केस दर्ज
हुए।
वर्ष 2009 तक एक भी बड़ा मामला सतह पर नहीं आया, सारी मछलियां तालाब के अंदर बैठक कमाई करती रहीं। 2009 में पीएमटी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे, जो वाकई में गंभीर थे।
कमेटी
बनायी गई और 100 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। 2012 में एसटीएफ का गठन किया गया।
जिसने 2013 में बड़े नामों के होने का जिक्र किया लेकिन, खुलासा नहीं किया। पहला नाम पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत
शर्मा का आया। उनके साथ 100 से ज्यादा
नाम दर्ज हुए। व्यापमं में तैयार की जा रही चार्जशीट में सिर्फ नेताओं के नहीं, बल्कि बिचौलियों, छात्रों, पुलिसकर्मियों, अभिभावकों
के भी नाम दर्ज हैं।
व्यापमं
में एक-एक परीक्षा पर सरकारी अफसर, बिचौलिये
और छात्रों व आवेदकों के बीच बड़े तार पाये गये हैं। व्यापमं के अंतर्गत पास हुए 1020 अभ्यर्थियों के फॉर्म गायब हैं। नितिन महेंद्र नाम का
कर्मचारी है, जो बंद कमरे में कंप्यूटर ऑन कर रिकॉर्ड
बदलने का काम करता था। एसटीएफ के मुताबिक 92,175 अभ्यर्थियों
के डॉक्यूमेंट्स में बदलाव किये गये, ताकि घूस
देने वालों को हाई रैंक दिलायी जा सके।
परीक्षा के
बाद जला दिये जाते थे फॉर्म व्यापमं के अंतर्गत आवेदन करने वालों को प्रवेश पत्र
जारी किये जाते हैं। लेकिन अधिकारियों-कर्मचारियों-बिचौलियों की सांठ-गांठ के चलते
प्रवेश पत्र जारी करते वक्त सारी डीटेल छात्र की होती थी..लेकिन फोटो
परीक्षा देने वाले पढ़े-लिखे परीक्षार्थी का। परीक्षा पूरी होने के बाद कंप्यूटर
के डाटाबेस में जाकर बाकायदा फोटो बदली जाती थी। इस परीक्षा को देने के लिये
मेधावी छात्रों को 2 से 5 लाख रुपए तक दिये जाते थे। इसके अलावा ओएमआर शीट में
फर्जीफिकेशन करके और मेधावी छात्र को पैसा देने वाले छात्र के बगल में बिठा कर नकल
करवायी जाती थी।
सबसे अहम
बात यह है कि एडमिट कार्ड का मिलान नहीं हो सके, इसलिये
कंप्यूटर में डाटा फीड करने के बाद फॉर्म जला दिये जाते थे। परीक्षाएं कराने के
नायाब तरीके विस्तार से पढ़ने के लिये click करें।
व्यापमं से जुड़ी गड़बड़ियों 2007-08 में
व्यापमं में भारी वित्तीय अनियमितताएं पायी गईं। 2009 में
पीएमटी की परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे और एक और एफआईआर दर्ज हुई।
2011 में व्यापमं के अंतर्गत पीएमटी परीक्षा के दौरान 145 लोगों पर शक गहरा गया। 2011 में 8 छात्र पीएमटी परीक्षा में रंगे हाथों पकड़े गये। ये वो थे जो 3-4 लाख रुपए लेकर परीक्षा में बैठे थे। उसी के बाद व्यापमं ने
बायोमीट्रिक के जरिये फोटो के साथ-साथ उंगलियों के निशान भी मिलाने शुरू किये।
काउंसिलिंग के दौरान भी उन्हीं उंगलियां के निशान मिलाये जाने लगे, ताकि फर्जी परीक्षार्थी को पकड़ सकें।
कब शुरू
हुई बड़ी जांच?
इंदौर के
आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद राय ने 2008 में
व्यापमं घोटाले में गहन जांच की मांग करते हुए पीआईएल दाखिल की। उसी के तुरंत बाद 2009 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच के लिये एसआईटी
गठित कर दी।
एसआईटी की
कमान राज्य के मेडिकल एजूकेशन के ज्वाइंट डायरेक्टर को सौंपी। क्या निकला कमेटी की
रिपोर्ट 2011 में 114 छात्रों
ने फर्जी परीक्षार्थियों को अपनी जगह बिठाकर पीएमटी की परीक्षा पास की।
फर्जी
परीक्षा देने आये अधिकांश छात्र मध्य प्रदेश, बिहार और
उत्तर प्रदेश के धनाड्य परिवारों से थे। बिचौलियों ने एक-एक छात्र से 10 से 14 लाख रुपए
लिये, यानी फॉर्म भरने वाले छात्र भी अमीर घरों के थे। फर्जी डॉक्टर
तैयार करने वाले व्यापमं के अधिकारी भी इस धंधे में शामिल थे।
2011 में सरकार ने उन सभी प्रवेशों को खारिज कर दिया, जिन पर जांच कमेटी ने सवाल उठाये थे। 7 जुलाई 2015 में को
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने व्यापमं घोटाले की सीबीआई जांच के लिये हाईकोर्ट से
अपील की।
क्या हुआ
जब पुलिस हुई सक्रिय
2013 में पुलिस
सक्रिय हुई और इंदौर के तमाम होटलों से एक ही रात में 20 लोगों को धर दबोचा। इनमें 17 लोग तो
यूपी के थे। जो 50 हजार से
लेकर 1 लाख रुपये लेकर दूसरों की जगह परीक्षा देने आये थे। तब पता
चला कि यह एक बड़ा रैकेट है, जिसकी कमान
जगदीश सागर के हाथ में है, जिसे मुंबई
में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने
गहन पूछताछ की तो उसने 317 नाम उगले।
ये सभी मेडिकल के छात्र थे, जिनका
करियर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया।
अगर पुलिस
की फाइलें खंगालें तो अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है, जो कहीं न
कहीं व्यापमं से सरोकार रखते थे। इसमें 19 वे
बिचौलिये थे। यानी जितनी भी बड़ी मछलियों को खुद के जाल में फंसने का डर सता रहा
है। वे छोटी मछलियों यानी बिचौलियों को
निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा डा. अरुण शर्मा, जो कि
व्यापमं घोटाले की जांच कर रहे थे, उनकी मौत
भी कई सवाल खड़े करती है। जिस तरह एक के बाद एक मौत हो रही है, उसे देखते हुए साफ है कि घोटालों में लिप्त लोगों को मौत का
खौफ जरूर सता रहा होगा।
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