100 सवालों से अच्छी है ये खमोशी..


ऐसा भी वक्त जीवन में आता है। अच्छा-खासा दोस्त भी दुश्मन बन जाता है। यह गाना इस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिल्कुल सूट कर रहा है। जो हम कहना चाहते है। शायद वो गाना बयां कर रहा है। जिस नमो नमो ने सबके पसीने छुड़ा दिए थे। विपक्षियों का लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ कर दिया था। जिस नमो नमो का नाम बच्चे-बच्चे की जुबान पर रटा हुआ था।
आज उसी नमो नमो की राह में अपने ही रोड़ा बन गए है। मोदी के अपनों की करतूत दुश्मनों से ज्यादा जख्म दे गए है..और विरोधी पार्टियों को बैठे-बिठाए हमला करने का मौका मिल गया है।




इस कड़ी में सबसे पहले नाम आया मोदी कैबिनेट में विदेश मंत्री का दर्जा प्राप्त मंत्री..यानि कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज..जिनका नाम आईपीएल के पूर्व कमिश्नर की मदद को लेकर ऐसा उछला की अब तक विरोधी सुषमा के इस्तीफे की मांग कर रहे है। इसके बाद जो नाम सामने आया वो शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। वो नाम था राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का..राजे के ललित मोदी के संबंधों का खुलासा होने के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। इस मौके को विपक्ष किसी हाल में भी नहीं छोड़ना चाहेगा।

अब क्या था विपक्ष के निशाने पर मोदी सरकार के मंत्री और पीएम मोदी की जुबान खमोश..बेचारे मोदी क्या कहे..और किससे कहे...अपनों ने जो दर्द दिया है। शायद उनकी खमोशी से बयां हो रहा है..इस सब से निपटने के लिए बीजेपी और मोदी सरकार ने एक सेना बनाई..लेकिन जब विपक्ष के तेवर कड़े हो..और हाथ में सबूत हो तो विपक्ष कहां झुकने वाला है..और ऊपर से ललित मोदी के खुलासे। ललित मोदी ने बीजेपी के ही नहीं कांग्रेस को भी अपने लपेटे में ले लिया। कांग्रेस की बारी आई तो ललित मोदी ने सबसे पहले प्रियंका गांधी, रॉर्बट वाड्रा, राहुल गांधी, और वरुण गांधी से मुलाकात के बहाने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी घसीट डाला।




ललित मोदी विवाद जहां बीजेपी के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ था..वहीं अब महाराष्ट्र सरकार में बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे का नाम चिक्की घोटाले में आ गया..उसके बाद विनोद तवाड़े के नाम ने बीजेपी के मुश्किले खड़ी कर दी..और दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऑडियों टेप जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गाया था..जिसमें शिवराज अपनी पार्टी के नेता को प्रलोभन देते हुए सुनाई दे रहें है..एक के बाद एक बीजेपी नेताओं का नाम जिस तरह से सामने आ रहा है..उससे मोदी के न खाऊंगा और न खाने दूंगा वाले बयान पर सवाल उठने लगे है..चाहे मोदी कितनी भी नेताओं के मामले में चुप्पी क्यों न बनाए रखें...लेकिन विरोधियों को तो मोदी जी आपकी छवि पर किचड़ उछालने का मौका मिल गया..खैर ये बात अलग है कि आप अपनी जुबान से इस पूरे मामले पर कब सफाई देंगे..लेकिन विरोधी तो चीख चीखकर आपसे इस पूरे मामले में आपसे सवाल पूछेंगे..और नसीहत भी देंगे। 

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