तुच्छ सोच, तुच्छ राजनीति
देश की राजनीति में क्या चल रहा है? यह तो सब दिखाई दे
रहा है... और सोशल मीडिया पर यह भी दिखाई दे रहा है कि.. कैसे दो धड़े सक्रिय है...
और इन धड़ों की हरकतें किसी से छुपी नहीं है.. एक धड़ा मोदी सरकार के विरोध में
सक्रिय रहता है... तो दूसरा धड़ा मोदी सरकार के पक्ष में तारीफों के पुल बांधता
रहता है। इन सबके बीच वो धड़ा भी यहां देखा जा सकता है.. जो खमोश रहकर सब देखता है
लेकिन अगर वो सहीं को सहीं.. और गलत को गलत कह दें तो मानों उस पर आफत टूट पड़ी हो...
धरती फट गई हो... भूचाल आ गया हो... जैसे इस धड़े ने (इसमें कोई भी शामिल हो सकता
है) कोई पाप कर दिया हो... फिर तो न जाने कैसे-कैसे अपशब्दों का बखान किया जाता
है... उसे ट्रॉल किया जाता है.. जो सबकुछ होता है वो कल्पना से भी परे है...
आजकल भारत की राजनीति में अमेरिकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुद्दा छाया हुआ है... डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर
मोदी सरकार को जमकर घेरा जा रहा है.. मैं कुछ आगे लिखना शुरू करूं उससे पहले आपको
यह बताना भी जरूरी है कि... आखिर डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान
खान से मुलाकात के दौरान किन मुद्दों पर बात हुई... और इस मुलाकात में कश्मीर के मुद्दे
पर कैसे सियासत शुरू हो गई... मुलाकात के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड
ट्रंप ने कश्मीर पर एक बहुत ही विवादित बयान दिया.. और इमरान ख़ान से कहा, कि Osaka में G20
Summit के
दौरान जब उनकी मुलाकात भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई थी... तब भारत के
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप को मध्यस्थता
करने की बात कही थी... डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक भूचाल आ गया.. और विपक्षी
पार्टियां देश के प्रधानमंत्री से सफाई मांगने लगीं..
हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने डोनाल्ड
ट्रंप के बयान पर सफाई दी... विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में
साफ शब्दों में कह दिया है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से ना तो ऐसी
कोई बात कही... और ना ही डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर के विषय पर मध्यस्थ बनने का अनुरोध
किया... फिर भी जो धड़ा मोदी सरकार का विरोध करता है... वो सरकार से सवाल
पूछ रहा है... सरकार को कठघरें में खड़ा कर रहा है.. जबकि दूसरी तरफ अमेरिका में
कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप की आपत्तिजनक टिप्पणी को Amate-urish और Embarrassing कहा जा रहा है.. और ऐसे लोगों में अमेरिका के Democratic Party के सदस्य Brad
Sherman शामिल हैं.. जिन्होंने ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका में भारत के राजदूत से माफी मांगी है.. इस बात
पर लोग गौर फरमाए जो सरकार की नीति पर सवाल खड़े कर रहे है... और शरमन ने साफ कर
दिया है, कि जो लोग
दक्षिण एशिया की विदेश नीति को समझते हैं, उन्हें
अच्छी तरह मालूम है, कि कश्मीर के विषय पर भारत ने
हमेशा से किसी तीसरी पार्टी की मध्यस्थता से इंकार किया है..
साथ ही अमेरिकी सांसद शरमन ये भी कहा, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसी
टिप्पणी कभी कर ही नहीं सकते.. डोनाल्ड ट्रंप को कश्मीर विवाद का ज्ञान नहीं है.. उनकी
टिप्पणी ना सिर्फ भ्रमित करने वाली है..बल्कि ट्रंप
ने ऐसी
बात कहकर अमेरिका को शर्मिन्दा कर दिया है.. हैरानी तब होती है जब अमेरिकी सांसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड
ट्रंप के बयान पर भारत के राजदूत से माफी मांगते है.. इस बात को भ्रमित करने वाली
बातते है.. लेकिन हमारे देश के कुछ लोगों को भारत सरकार की बातों पर विश्वास नहीं
है.. हमारे देश के विपक्ष को विदेश मंत्री के बयान में कोई सच्चाई नज़र नहीं आती
है... उन्हें तो प्रधानमंत्री की बात सुननी है.. उन्हें तो प्रधानमंत्री के मुख से
निकलने वाली बातों पर ही विश्वास होगा... लेकिन यह भी एक छलावा है कि क्या विपक्ष
और वो धड़ा मोदी सरकार का विरोध करता आ रहा है... उसे प्रधानमंत्री पर विश्वास
होगा? मुझे नहीं लगता.. अगर अब विश्वास नहीं तो तब विश्वास क्या होगा?
खैर सवाल उठता है कि अगर प्रधानमंत्री के
बयान से अगर यह साफ हो जाए कि... उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर ट्रंप को मध्यस्थता
के लिए नहीं कहा है… तो फिर वो धड़ा क्या करेगा? जो इस वक्त मोदी
सरकार को जमकर घेरा रहा है... क्या वो अपनी करनी के लिए शर्मिंदा होगा? क्या वो माफी
मांगेगा? मुझे लगता है माफी मांगना एक उचित कदम नहीं है.. लेकिन अपने शब्दों
पर लगाम लगाना और अपनी मर्यादा ध्यान रखना बेहद जरूरी है... घृणा होती है ऐसे
लोगों से जो शराफत का चोला पहनकर देश के सम्मान को अपमान में बदलने का काम करते
है... यह कोई भी हो सकते है?
Right
ReplyDeleteशुक्रिया जी
Delete