तन्हाई



बार-बार मेरे ज़हन में....
एक सवाल उठता है।
मुझसे कोई क्यों इतनी नफ़रत करता है?
मेरा नाम सुनते ही...  
क्यों लोगों के चेहरों से हवाईयां उड़ जाती है?
मेरी आहट होते ही...
घबराहट महसूस होने लगती है।
बार-बार मेरे जहन में...
एक सवाल उठता है।
मुझसे कोई क्यों इतनी नफ़रत करता है?
अक्सर मेरे बारे में...
चर्चा आम है।
लेकिन मेरी सच्चाई से कोई अवगत नही है
क्या बताऊं मैं अपने बारे....
जब कोई जानने के लिए ही उत्सुक नही है।
क्या मैं इतनी बुरी हूँ?
जो मेरा नाम सुनते ही...
लोग ख़ामोश हो जाते है।
ख़ामोशी मेरा पैग़ाम ज़रूर है।
लेकिन मेरी पहचान नही....
फिर ख़्यालों के भँवर में दिल डूब जाता है।
खुद से एक सवाल करता है।
मुझसे क्यों कोई इतनी नफ़रत करता है?

जिधर देखती हूं किसी हताश व्यक्ति को...
तो दुआ देने लगती हूं....
मेरी तरह कोई मायूस ना रहे।
तो साया बनकर चलती हूँ। 
और अपनी मंज़िल की तलाश में...
निकल पड़ती हूँ।

चारों तरफ एक ही नज़ारा...
नज़र आता है।
खोया-खोया हर इन्सान रहता है।
तो मेरी आँखों से....
       आँसू निकल पड़ते है।
       उनके दर्द को...
अपने सीने में छुपा लेती हूँ।
और मैं अपने आशियाने में...
खुशी से पनाह देती हूँ।
काली-अंधेरी रात में...
मन में अनेक सवाल उमड़ पड़ते है।
फिर दिल को दुखाने वाला...
एक सवाल ज़हन में आता है।
मुझसे कोई क्यों इतनी नफ़रत करता है?

मैं तो हरपल उसका साथ देती हूं।
जो मुझे याद करता है।
क्योकि मेरा नाम तो तन्हाई है।
जो अक्सर सबको नागवार गुज़रती है।
        आखिर मैं करूं तो करूं क्या?
        बस! हँस देती हूँ...
        एक भीनी सी हंसी
        अपनी बदक़िस्मती पर....
और ढूंढ़ती हूं।
कोई और हाथ
जिसे मेरे सहारे की ज़रूरत हो।

मैं अपनी मज़बूरी का...
ढ़िंढोरा तो नही पीटती हूँ
लेकिन सबके लिए प्यार का नज़राना...
लेकर घूमती हूँ।
अब! चाहे कोई मुझसे...
नफ़रत ही क्यों न करें?
और फिर खो जाती हूं
उन सवालों में...
जो आधी रात को मुझे नींद से उठा देते है
बस! इसी कशमकश में...
खोयी रहती हूं।
मुझसे कोई क्यों इतनी नफ़रत करता है?

हर लम्हा सभी के साथ हूँ।
फिर भी बहुत अकेली हूँ।...
किसी से नाराज़ नही...
सबसे मोहब्बत है मुझे..
अगर किसी से मेरा पता पूछोगे
तो शायद वो घबरा जाए।
मेरे बारे में कुछ न बताएं...
बस! अपनी तो यही कहानी है।
आधी अधुरी ज़िंदगानी है।

मेरे पास देने को तो
कुछ नहीं...
लेकिन बेबसी भरी मेरी जवानी है।
फिर मायूस होकर मेरा दिल...
कहीं खो जाता है।
सवालों के भँवर में फिर डूब जाता है।
और खुद से एक सवाल करता है।
मुझसे कोई क्यों इतनी नफ़रत करता है?



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