कूटनीति पर सवाल
2016 साल की शुरुआत
और आतंकी हमला..आतंकियों ने भारत में धमाके करने के लिए पहले से ही खौफनाक साजिश रच
ली थी..और उसे अंजाम दिया 2 जनवरी 2016 को...यानि शनिवार के दिन। किसी ने सोचा भी
नहीं था कि आतंकी पंजाब की दहलीज़ को फिर दहला देंगे। शनिवार को तड़के 3 बजकर 5
मिनट पर आतंकियों ने पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला कर दिया। पठानकोट में एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमले के बाद देश में सियासी
माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इसके लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार की विदेश और
कूटनीति को जिम्मेदार माना है। इस हमले के साथ
मोदी-नवाज की मुलाकात पर भी सवाल खड़े हो गए..क्योंकि इन आतंकवादियों का नाता
पाकिस्तान से है।
2 जनवरी 2016 को पठानकोट में आत्मघाती हमला...और 25 दिसंबर 2015 को
पाकिस्तान में मोदी-नवाज की मुलाकात। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफगानिस्तान
की यात्रा खत्म करने के बाद अचानक पाकिस्तान जाने का फैसला करते है.. और मोदी के
स्वागत में इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर खास तैयारियां भी की जाती है। मोदी के वहां
पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाता है। खुद पाकिस्तान के वजीरे आलम नवाज शरीफ
ने मोदी का गर्म जोशी से स्वागत किया। उस वक्त बीजेपी के कद्दावर नेतओं ने मोदी के
पाकिस्तान दौरे और कूटनीति की तारीफ की थी..लेकिन उस वक्त भी विपक्ष ने मोदी के
पाकिस्तान दौरे को लेकर सवाल खड़े किए थे। अब एक बार फिर विपक्ष ने पठानकोट में
आतंकी हमला को लेकर पीएम मोदी की विदेश और कूटनीति को जिम्मेदार ठहराया है..तो
वहीं सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया पाकिस्तान दौरे को लेकर भी उठने
लगे हैं।
मोदी-नवाज की दोस्ती को भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत विपक्षी दलों के
नेताओं ने निशाने पर लिया है। हमले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पंजाब में
प्रदर्शन करते हुए। जहां पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए...वहीं
मोदी-नवाज के पुतले भी फूंके। भोपाल में भी यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों
पर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट
करके की पठानकोट हमले की कड़ी निंदा की...उन्होंने शहीदों के परिजनों को सांत्वना
दी।
आतंकी हमले की निंदा करते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा पाकिस्तान
से उफा में बातचीत और पीएम के लाहौर दौरे के बाद भारत को यह सिला मिला है। सरकार
को चाहिए कि वह अपनी कूटनीति और विदेश नीति पर फिर से विचार करे। तो वहीं
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा आतंकी हमला
प्रधानमंत्री मोदी की लिए बड़ी चुनौती है। बीजेपी को अब अपना पुराना रुख
बदलना पड़ेगा। आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते..इस गर्म गर्मी के माहौल
में। तो वहीं आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने भी हमले की निंदा करते हुए..इस पर
सियासत करने वालों को निशाने पर लिया..लालू ने कहा यह भारत की विदेश नीति पर
सवाल करने का सही वक्त नहीं। ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पठानकोट हमले की निंदा करते हुए कहा पाकिस्तान
समेत तमाम पड़ोसी देशों से भारत अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन भारत पर आतंकी
हमला हुआ तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पठानकोट आतंकी हमले की जांच NIA को सौंप दी गई है।
दिल्ली समेत देश के तमाम बड़े और संवेदनशील शहरों में हाई अलर्ट पर रखा गया है।
गृह मंत्रालय, आर्मी से जुड़े ठिकाने और तमाम अहम जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हिदुंस्तान में हुए
आतंकी हमले की पाकिस्तान ने भी कड़ी निंदा की..पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर
से जारी बयान में भारत में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई है। पाकिस्तान के वजीरे
आलम नवाज़ शरीफ ने दुख की घड़ी में भारत की मदद करने का एलान किया।
एक तरफ
तो दूसरी तरफ सियासत गर्म होने लगी...शनिवार तड़के पंजाब के पठानकोट एयरफोर्स
स्टेशन पर आतंकी हमला हुआ। 17 घंटे में पांच आतंकी मारे गए। एयरफोर्स के एक कमांडो समेत 6 जवान भी शहीद हुए हैं। खुलासा
हुआ है कि आतंकियों ने हमले से पहले पाकिस्तान फोन किया था। बताया जा रहा है कि
आतंकियों ने पाकिस्तान में अशफाक अहमद, अब्दुल शकूर नाम के हैंडलर्स से
बात की थी..तो वहीं हमले का शक जैश-ए-मोहम्मद पर है। इसका सरगना मौलाना मसूद अजहर
है। अजहर वही आतंकी है जिसे 17 साल पहले कंधार प्लेन हाईजैक केस में भारतीयों की रिहाई के
बदले छोड़ा गया था।
सर्च
ऑपरेशन के दौरान पठानकोट एयरबेस में दो और आतंकियों के छिपे होने की खबर है।
डीआईजी
के मुताबिक आतंकियों के छिपे होने की खबर के बाद सुरक्षा बलों का ऑपरेशन और तेज कर
दिया गया है। इस बीच एक बम को डिफ्यूज करते वक्त एनएसजी के एक लेफ्टिनेंट
कर्नल शहीद हो गए हैं। साथ ही 3 जवान भी घायल है। अब तक इस पूरे आतंकी हमले में 7 जवान शहीद हो चुके हैं। इनमें
एक गार्ड है जबकि 5 डीएससी
के जवान शामिल हैं। उधर पठानकोट आतंकी हमले की जांच के लिए एनआईए की टीम कर रही
है।
सवाल
सुरक्षा पर भी खड़े होते है। एक्सपर्ट्स ने इस हमले को बड़ा सिक्युरिटी फेल्योर
बताया..क्योंकि गुरुवार रात ही पुलिस के एक असिस्टेंट कमांडेंट सलविंदर सिंह की 4 आतंकियों ने किडनैपिंग की थी।
इसके बाद पठानकोट और गुरदासपुर को सील कर दिया गया था। हमले का स्पेसिफिक
इंटेलिजेंस इनपुट भी था। आपको बता दें कि पांच महीने पहले
जुलाई में गुरदासपुर जिले के दीनानगर में आतंकी हमला हुआ था। डेढ़ घंटे में 7 हमले हुए थे। 20 साल बाद पंजाब में हुए हमले में 11 घंटे के एनकाउंटर के बाद
आतंकियों को मार गिराया गया। हालांकि अब रविवार को पठानकोट में एक बम को डिफ्यूज करते वक्त
एनएसजी के एक लेफ्टिनेंट कर्नल शहीद हो गए हैं। साथ ही 3 जवान भी घायल है।
पठानकोट
में आतंकी हमले ने एक बार फिर बड़ी चूक की ओर इशारा किया है। ये चूक बरती गई है
पंजाब पुलिस की तरफ से। 31 दिसंबर की रात को आतंकी भारत में दाखिल हो चुके थे। उन्होंने एक
एसपी की कार को कब्जे में लिया। आतंकियों ने पठानकोट में 2 जनवरी की सुबह करीब साढे 3 बजे हमला किया था। ऐसे में साफ
है कि वो हथियारों के साथ करीब 30 किलोमीटर के दायरे में दो दिनों तक घूमते रहे। खास बात ये है
कि जिस जगह पर आतंकियों ने एसपी की गाड़ी छीनी थी, उसी के 500 मीटर की दूरी पर वो एयरबेस के अंदर
घुसे। इसका मतलब ये है कि वो आसपास के एरिया में ही छिपे रहे। गाड़ी छोड़ने के बाद भी आतंकी उसी इलाके में 24 घंटे से ज्यादा वक्त तक रहे। साफ है कि पंजाब
पुलिस ने अगर अपने ही एसपी के दावों पर भरोसा कर लिया होता तो इस हमले से बचा जा
सकता था।
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