मेरी आजादी की 68वीं वर्षगांठ- हिंदुस्तान
मेरा ताज हिमालय है..मेरा लिबास तिरंगा..हां बहूत
खूब पहचाना..मैं वहीं हिंदुस्तान हूं..जिसने 200 सालों तक गुलामी की पीड़ा सही
थी..आज भी मैं उस दिन को याद करके रो पड़ता हूं..जब अंग्रेजों के चुंगल से आजाद
कराने के लिए..मेरे बेटों ने अपने प्राणों को कुर्बान कर दिया..लेकिन आज मैं बहुत
खुश हूं कि..आज मैं आजाद हूं..और हमसब मिलकर आजादी का जश्न मना रहे है..आजादी के
आज 67 साल पूरे हो गए हैं।
आज भी खुद पर गर्व महूसस होता है..जब मेरी
सालगिराह को देश के कोने कोने में धूमधाम से मनाया जाता है...वैसे तो हर साल आजादी
का जश्न निराला होता है..लेकिन मेरे दिल यानि दिल्ली के लालकिला से जब मुझे देश का
प्रधानमंत्री सलाम किया..तो मैं खुशी से फूला नहीं समाया..और झंडा फहरा कर उस
गौरवगाथा को जब उसने याद किया तो मेरी आँखें खुशी के आंसू झलक जाते हैं..और मुझे
इस शुभ घड़ी पर सभी देशवासियों ने बधाई दी..तो हजारों की तदात में बच्चे ने मेरे
लिए रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया..जो एक अदभुतक दर्शय था..जिसे देख मेरी आँखे
खुशी से भर आयी...
जब हर हिंदुस्तानी की जुबान से इंकलाब के नारे
सुनता हूं..तो मुझे उन वीर जवान की याद आती है..जो सरहद पर देश की रक्षा के लिए
अपने प्राण न्योछावर कर देते है..और मैं उन शहादों को कैसे भूल जाऊं..जिन्होनें
आजादी की जंग इसी इंकलाब के बलबूते लड़ी था..और मुझे आजादी का तोहफा देकर वो अमर
हो गए..खुश हूं हो लेता हूं..आज की युवा पीढ़ी में अपने लिए आपार प्रेम को
देखकर..और गर्व महसूस करता हैं कि..आज भी मेरा आस्तिव जिंदा हैं..और फिर आजादी के
जश्न में डूब जाता हूं।


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